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हड़ताल: 37 ऑपरेशन टले, इलाज न मिलने पर दर्द से कराहते रहे मरीज

Sun, 18 Aug 2024 04:43 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 18 Aug 2024 04:43 AM IST
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Strike: 37 operations postponed, patients kept groaning in pain due to lack of treatment
- मेडिकल कॉलेज में ज्यादातर वार्ड हुए खाली, रोगियों की न जांच हुई, न दवा मिली
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- बेमियादी हड़ताल में शामिल रेजिडेंट डॉक्टरों ने बंद कराए पर्चे के काउंटर
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। रेजिडेंट डॉक्टरों की बेमियादी हड़ताल से शनिवार को मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गईं। सुबह 10 बजे के बाद जूनियर डॉक्टरों ने पर्चा काउंटर बंद करा दिया। जिन मरीजों के शुरुआती दो घंटे में पर्चे बने, उनको न तो दवाएं मिलीं, न कोई जांच हुई। 37 ऑपरेशन टाल दिए गए। इलाज न मिलने पर मरीज दर्द से कराहते रहे। भर्ती मरीज डिस्चार्ज कराकर कहीं और चले गए।
कोलकाता में महिला डॉक्टर की हत्या के विरोध में चल रही रेजिडेंट डॉक्टरों की बेमियादी हड़ताल ने शनिवार को बड़ा रूप ले लिया। हड़ताल में सीनियर डॉक्टर और एमबीबीएस इंटर्न भी शामिल हो गए। आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) ने 24 घंटे के लिए ओपीडी बंद रखने के एलान कर दिया। इस वजह से आंदोलित रेजिडेंट डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज की ओपीडी भी नहीं चलने दी। सुबह 10 बजे तक मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए आए 402 रोगियों के पर्चे बन गए थे। तभी आंदोलित जूनियर डॉक्टरों ने नारेबाजी करते हुए पर्चा काउंटरों बंद करवा दिया। इस वजह से उपचार के लिए आए रोगियों को काफी दिक्कत हुई। कई रोगियों ने ओपीडी में बैठे वरिष्ठ डॉक्टरों को पर्चा नहीं बनने की शिकायत करते हुए इलाज करने का अनुरोध किया मगर उनको राहत नहीं मिली। वहीं, जिन रोगियों के पर्चे बन गए थे, उनमें से कुछ रोगियों को डॉक्टरों ने दवा के साथ जांच भी लिखी। मगर इन मरीजों को न तो दवा मिली और न जांचें हो सकीं। इससे रोगी इधर-उधर भटकते रहे। यही नहीं, मेडिकल कॉलेज में 37 रोगियों के आपरेशन नहीं हो सके। वार्डों में भर्ती मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिला तो शुक्रवार से वह खुद डिस्चार्ज करवाकर कहीं और चले गए। शनिवार को वार्ड आठ को छोड़कर बाकी जगह इक्का-दुक्का मरीज ही नजर आए।
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आईएमए के साथ रेजिडेंट डॉक्टरों ने भरी हुंकार
मेडिकल कॉलेज के गेट नंबर दो पर पूर्वाह्न 11 बजे आईएमए के पदाधिकारियों और रेजिडेंट डॉक्टरों की संयुक्त सभा हुई। आईएमए अध्यक्ष डॉ. प्रताप सिंह, सचिव डॉ. रविकांत, रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. नीरज कुमार शर्मा आदि ने मांगें पूरी न होने पर बड़ा आंदोलन करने की बात कही।
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नर्सिंगहोम में ओपीडी चालू थी, हुई कहासुनी
झांसी। मेडिकल कॉलेज के सामने एक नर्सिंग होम के अंदर गेट बंद करके ओपीडी चल रही थी। इसकी सूचना पर आईएमए के पदाधिकारी और रेजीडेंट डॉक्टर को हुई तो वो नर्सिंगहोम पहुंचे। आईएमए अध्यक्ष और सचिव ने डॉक्टर से सिर्फ इमरजेंसी सेवा देने की बात कही तो उनके बीच काफी कहासुनी हो गई। आईएमए अध्यक्ष और सचिव ने बताया कि डॉक्टर ने आईएमए के फैसले को मानने से इन्कार कर दिया है।


जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी में डॉक्टरों ने देखे मरीज

मेडिकल कॉलेज और नर्सिंगहोमो को छोड़ दें तो डॉक्टरों की हड़ताल का असर जिला अस्पताल और सीएचसी, पीएचसी में नहीं दिखा। यहां पर डॉक्टरों ने ओपीडी में मरीज देखे। हालांकि, ज्यादातर स्वास्थ्य इकाइयों में चिकित्सक विरोध के तौर पर काली पट्टी जरूर बांधे रहे।




मरीजों ने बयां किया दर्द
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रात से पेट में दर्द हो रहा है। हंसारी से मेडिकल कॉलेज इलाज कराने आई हूं। यहां पर्चा नहीं बन रहा है। कई घंटों से दर्द से कराह रही हूं। - नेहा।


वार्ड आठ में छोटे भाई की पत्नी भर्ती है। उसकी हालत चिंताजनक है। डॉक्टर देख नहीं रहे हैं। अब मरीज को कहीं और ले जा रहे हैं। - भूपेंद्र।


बेटे महेंद्र को काफी तेज बुखार आ रहा है। चिरगांव से मेडिकल कॉलेज इलाज कराने आई हूं। यहां पर्चा नहीं बन रहा है। बहुत परेशानी हो रही है। गायत्री।



त्वचा संबंधी समस्या होने पर मेडिकल कॉलेज इलाज कराने आई हूं। पर्चा काउंटर बंद हैं। बिना पर्चे के कोई भी डॉक्टर दवा लिखने को तैयार नहीं हैं। - साक्षी।
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