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कोरोना काल में हुए डिप्रेशन से अभी भी 50 प्रतिशत मरीज नहीं उबर पाए

Thu, 07 Apr 2022 12:12 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 07 Apr 2022 12:12 AM IST
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Still 50 percent of the patients could not recover from the depression during the Corona period.
झांसी। पिछले दो साल के कोरोना काल में झांसी में अवसाद का शिकार हुए 50 प्रतिशत डिप्रेशन के मरीजों का अभी भी डॉक्टरों के पास इलाज चल रहा है। इसके अलावा चौथी लहर की आशंका के चलते एंजायटी (घबराहट) के मरीजों को समय-समय पर पैनिक अटैक आने लगते हैं। इन दोनों बीमारियों से ग्रसित रोगी अभी तक पूरी तरह ठीक नहीं हो पाए हैं।
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कोरोना काल में कई लोगों ने अपने परिजनों को खो दिया। कई लोग इस तरह बीमारी की चपेट में आ गए कि ठीक होने में महीनों लग गए। लंबे समय तक आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान उनके व्यवहार में बदलाव आया। वह डिप्रेशन से लेकर एंजायटी तक का शिकार हो गए। इन मरीजों का मनोचिकित्सक, फिजीशियन के पास इलाज चला। डॉक्टरों के मुताबिक अभी भी डिप्रेशर और एंजायटी के 50-50 प्रतिशत मरीज इलाज कराने के लिए आ रहे हैं। चीन समेत कुछ देशों में कोरोना की चौथी लहर के मामले सामने आने के बाद उनको बीमारी फिर से उबर आती है। कइयों को पैनिक अटैक आने शुरू हो गए हैं। तो कुछ लोगों ने फिर से लोगों से दूरियां बनानी शुरू कर दी हैं।
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डिप्रेशन में ये लक्षण आते
- हमेशा मन उदास रहना
- हर समय थकना रहना
- पसंदीदा काम में रुचि नहीं होना
- बहुत ज्यादा या कम नींद आना
- आत्महत्या के विचार आना
- एकाग्रता की कमी आना
- याददाश्त भी कम होना
एंजायटी के लक्षण
- चौंककर उठना
- घबराहट होना
- हाथ-पैर सुन्न लगना
- सिर दर्द होना
- सीने में दर्द महसूस होना
अभी भी कोरोना काल में डिप्रेशन का शिकार हुए 3000 मरीज और एंजायटी के पांच हजार रोगी इलाज कराने के लिए आ रहे हैं। चौथी लहर की डर से कइयों को पैनिक अटैक आने लगे हैं। - डॉ. शिकाफा जाफरीन, मनोचिकित्सक।
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50 प्रतिशत यानी ढाई हजार डिप्रेशन, चार हजार एंजायटी के रोगी अभी भी बीमारी से उबर नहीं पाए हैं। वह लगातार इलाज कराने के लिए आ रहे हैं। कइयों में डिप्रेशन फिर से उबर आता है। - डॉ. अर्जित गौरव, मनोचिकित्सक।
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