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रीढ़ में लगने वाले स्टेरॉयड इंजेक्शन से होती हड्डियां कमजोर
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झांसी। कमर दर्द को दूर करने के लिए रीढ़ की हड्डी में मरीज स्टेरॉयड इंजेक्शन लगवाते हैं। इस इंजेक्शन को लगाए जाने के बाद कई मरीजों की रीढ़ की हड्डी लगभग दो महीने तक कमजोर रहती है। ऐसे में चोट लगने पर मरीजों की हड्डी टूटने का डर रहता है। इसलिए ऑस्टियोपोरोसिस की दवा भी साथ चलाई जानी चाहिए। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक, एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी विभाग की संयुक्त रिसर्च रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। यह रिपोर्ट अमेरिका के प्रसिद्ध शोध जनरल में प्रकाशित भी हुई है।
मेडिकल कॉलेज में पेन क्लीनिक पर तमाम मरीज उपचार कराने के लिए आते हैं। मरीज के दर्द के अनुसार उपचार किया जाता है। कई मरीजों को व्यायाम की विधियां बताई जाती हैं तो कइयों को दवाओं और दर्द निवारक इंजेक्शन देने की भी जरूरत पड़ जाती है। दर्द से राहत के लिए स्टेरॉयड इंजेक्शन दिए जाते हैं। स्टेरॉयड इंजेक्शन देने के बाद लगभग डेढ़ सौ मरीजों पर इसके असर का पता करने के लिए ऑर्थोपेडिक, एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी विभाग की तरफ से किए गए शोध किया गया। रिसर्च में बोन मिनिरल डेंसिटी और बोन टर्नओवर मार्कर की जांच की गई। शोध में सामने आया कि कमर दर्द को दूर करने के लिए रीढ़ की हड्डी में जब स्टेरॉयड इंजेक्शन लगाया जाता है तो दो महीने तक हड्डी कमजोर रहती है। ऐसे में चोट लगने या गिरने से हड्डी टूटने का डर रहता है। इसलिए इंजेक्शन लगाने के साथ-साथ मरीज को ऑस्टियोपोरोसिस (अस्थिसुषिरता) दूर करने की दवाएं भी साथ में दी जाएं, ताकि हड्डी में कमजोरी न आए। यह शोध अमेरिकन पेन सोसाइटी के जनरल में प्रकाशित हुआ है, जो कि विश्व विख्यात जनरल है। शोध कार्य में अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पारस गुप्ता, एनेस्थीसिया आचार्य डॉ. अंशुल जैन, पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मयंक सिंह, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. रचना चौरसिया शामिल रहीं।
इस तरह की गई जांच
मेडिकल कॉलेज के पेन क्लीनिक में आने वाले मरीजों के रक्त का नमूना लेकर बोन टर्नओवर मार्कर मापे गए। साथ ही बीएमडी स्कैन मशीन से बोन मिनरल डेंसिटी मापी गई। लगभग 50 फीसदी मरीजों की हड्डी कमजोर मिली हैं।
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मेडिकल कॉलेज में पेन क्लीनिक पर तमाम मरीज उपचार कराने के लिए आते हैं। मरीज के दर्द के अनुसार उपचार किया जाता है। कई मरीजों को व्यायाम की विधियां बताई जाती हैं तो कइयों को दवाओं और दर्द निवारक इंजेक्शन देने की भी जरूरत पड़ जाती है। दर्द से राहत के लिए स्टेरॉयड इंजेक्शन दिए जाते हैं। स्टेरॉयड इंजेक्शन देने के बाद लगभग डेढ़ सौ मरीजों पर इसके असर का पता करने के लिए ऑर्थोपेडिक, एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी विभाग की तरफ से किए गए शोध किया गया। रिसर्च में बोन मिनिरल डेंसिटी और बोन टर्नओवर मार्कर की जांच की गई। शोध में सामने आया कि कमर दर्द को दूर करने के लिए रीढ़ की हड्डी में जब स्टेरॉयड इंजेक्शन लगाया जाता है तो दो महीने तक हड्डी कमजोर रहती है। ऐसे में चोट लगने या गिरने से हड्डी टूटने का डर रहता है। इसलिए इंजेक्शन लगाने के साथ-साथ मरीज को ऑस्टियोपोरोसिस (अस्थिसुषिरता) दूर करने की दवाएं भी साथ में दी जाएं, ताकि हड्डी में कमजोरी न आए। यह शोध अमेरिकन पेन सोसाइटी के जनरल में प्रकाशित हुआ है, जो कि विश्व विख्यात जनरल है। शोध कार्य में अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पारस गुप्ता, एनेस्थीसिया आचार्य डॉ. अंशुल जैन, पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मयंक सिंह, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. रचना चौरसिया शामिल रहीं।
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इस तरह की गई जांच
मेडिकल कॉलेज के पेन क्लीनिक में आने वाले मरीजों के रक्त का नमूना लेकर बोन टर्नओवर मार्कर मापे गए। साथ ही बीएमडी स्कैन मशीन से बोन मिनरल डेंसिटी मापी गई। लगभग 50 फीसदी मरीजों की हड्डी कमजोर मिली हैं।
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