रेलवे बोर्ड ने 12 मई से स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया था, जो अब 30 जून तक जारी रहेगा। इन ट्रेनों में आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर ऑनलाइन टिकट बन रहे हैं। अधिकांश यात्री टिकट बनवाने के लिए एजेंटों का सहारा ले रहे हैं। इसकी आड़ में ई टिकट के अवैध कारोबारी भी सक्रिय हो गए हैं। एक आईडी पर एक महीने के दौरान पांच से ज्यादा टिकट न बनें और मुसाफिर ई टिकट के अवैध कारोबारियों के चक्कर में न पड़ सकें। इसके लिए रेलवे सुरक्षा एजेंसियाें ने ऑनलाइन टिकटों पर निगरानी बढ़ा दी है। कोरोना वायरस के चलते रेलवे ने 23 मार्च से ट्रेनों का संचालन पूरी तरह बंद कर रखा है। साथ ही रेलवे ने 12 मई से स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया, जो अब 30 जून तक चलेगी। इसके बाद ही नियमित ट्रेनों के संचालन पर कोई निर्णय होगा। इन ट्रेनों में भी ऑनलाइन टिकटों की बुकिंग होगी। यात्री सात दिन तक का अग्रिम टिकट बुक करा सकेंगे। 12 मई की शाम में इंटरनेट साइट खुलते ही 54 हजार यात्रियों ने महज छह घंटे के अंदर टिकट बुक कराए थे। चूंकि, अधिकांश यात्री ऑनलाइन टिकट नहीं बना पाते हैं, इस कारण वे आईआरसीटीसी के एजेंट का सहारा लेते हैं। इनमें ही कुछ एजेंट व अनाधिकृत लोग दूसरे की आईडी पर ई टिकट बनाना शुरू कर देते हैं, जो अपराध की श्रेणी में आता है। ई टिकट के अवैध कारोबार पर नजर रखने के लिए आरपीएफ व आईआरसीटीसी ने निगरानी बढ़ा दी है। इस संबंध में आरपीएफ कमांडेंट उमाकांत तिवारी ने बताया कि एक आईडी पर पांच से ज्यादा टिकट बनते ही संबंधित व्यक्ति को पकड़ा जाएगा। आईआरसीटीसी की मदद से ई टिकट की बुकिंग पर लगातार नजर रखी जा रही है। ये भी चल रहा है खेल पिछले दिनों नई दिल्ली से बंगलूरू सिटी जाने राजधानी स्पेशल ट्रेन में चार बिना टिकट यात्री पकड़े गए थे, जो नई दिल्ली से झांसी के लिए सफर कर रहे थे। यात्रियों ने टिकट बुक कराया था, उसका उनके पास मेसेज भी था। लेकिन टिकट बुक कराने वाले ने उनके साथ धोखा किया। ट्रेन चलने से पूर्व ही टिकट को कैंसल कर दिया, जिसके बारे में यात्रियों को जानकारी नहीं दी। पकड़े जाने पर यात्रियों को भारी भरकम जुर्माना भरना पड़ा। चूंकि, इस समय लॉकडाउन में फंसे लोग अपने घर लौटने के लिए सबसे अधिक सफर कर रहे हैं। ऐसे में इन यात्रियों को गुमराह करना आसान बना हुआ है। इसलिए लोगों को भरोसेमंद एजेंट से ही टिकट बुक कराना चाहिए।