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अब तक 32 फीसदी ही हुई गेहूं की खरीद, चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 08 May 2017 01:18 AM IST
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mandi
- फोटो : demo
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झांसी। गेहूं खरीद में अभी भी जिला काफी पिछड़ा है। कुल एक लाख 51 हजार मिट्रिक टन लक्ष्य के मुकाबले अभी तक सिर्फ 49 हजार 389 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा सका है। यह लक्ष्य के सापेक्ष 32.71 प्रतिशत है। डीएम कर्ण सिंह चौहान ने इस पर चिंता जताते हुए खरीद में तेजी के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि एफसीआई खरीद में सहयोग करे। राशन के बोरों की सिलाई यदि हाथ से हुई है तो कोटेदार उसे स्वीकार न करें। साथ ही नैफेड के मंडल प्रभारी को चेतावनी भी दी।
कलेक्ट्रेट सभागार में गेहूं खरीद की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रों पर किसान को गेहूं बेचने के लिए अधिक इंतजार न करना पड़े। इसका ध्यान रखा जाए। गल्ला मंडी में बने चबूतरे किसानों के लिए बनवाए गए हैं। इन पर व्यापारी कब्जा न कर सकें। एफसीआई के प्रबंधक नवीन मेहता को निर्देश दिए कि खरीद में सहयोग दें। ट्रकों से गेहूं उतारने में जल्दी करें, ताकि खरीद केंद्रों से गेहूं उठकर गोदाम में जल्द पहुंच सके। उन्होंने नैफेड के मंडल प्रभारी विवेक प्रताप सिंह को चेतावनी दी। अभी वक्त है। 15 जून तक गेहूं की खरीद की जाएगी। कहा कि वह लापरवाही न बरतें। समीक्षा बैठक में एडीएम विजय बहादुर सिंह, डिप्टी आरएमओ धनंजय सिंह, डीआईओ दीपक सक्सेना उपस्थित रहे।
किसान खसरा खतौनी लेकर जाएं
गेहूं बेचने आने वाले किसान अपने साथ खसरा, खतौनी, आधार कार्ड और बैंक पास बुक की फोटो काफी लेकर जाएं, ताकि उन्हें खरीद केंद्र पर सहूलियत मिल सके। यदि किसान उपरोक्त कागजों में से कोई एक नहीं ले जाता है, तो उसे गेहूं बेचने में दिक्कत आ सकती है।
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पिछले पांच साल में कभी लक्ष्य पूरा नहीं
2013-14 में 95,500 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य था, लेकिन 13196.05 मीट्रिक टन (13.82 प्रतिशत) खरीदहुई थी। 2014-15 में 74,304 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य था और 6,277.35 मीट्रिक टन (8.45 प्रतिशत) खरीद हुई थी। 2015-16 में 57,000 मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य था व 49,889.35 मीट्रिक टन (87.54 प्रतिशत) खरीद हुई थी। 2016-17 में 76,000 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य था और 27,551.97 मीट्रिक टन (36.25 प्रतिशत) खरीद हुई थी। 2017-18 में 1,51,000 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य है। इसके सापेक्ष अब तक 49,389.93 मीट्रिक टन (32.71 प्रतिशत) खरीद हो चुकी है।
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कलेक्ट्रेट सभागार में गेहूं खरीद की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रों पर किसान को गेहूं बेचने के लिए अधिक इंतजार न करना पड़े। इसका ध्यान रखा जाए। गल्ला मंडी में बने चबूतरे किसानों के लिए बनवाए गए हैं। इन पर व्यापारी कब्जा न कर सकें। एफसीआई के प्रबंधक नवीन मेहता को निर्देश दिए कि खरीद में सहयोग दें। ट्रकों से गेहूं उतारने में जल्दी करें, ताकि खरीद केंद्रों से गेहूं उठकर गोदाम में जल्द पहुंच सके। उन्होंने नैफेड के मंडल प्रभारी विवेक प्रताप सिंह को चेतावनी दी। अभी वक्त है। 15 जून तक गेहूं की खरीद की जाएगी। कहा कि वह लापरवाही न बरतें। समीक्षा बैठक में एडीएम विजय बहादुर सिंह, डिप्टी आरएमओ धनंजय सिंह, डीआईओ दीपक सक्सेना उपस्थित रहे।
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किसान खसरा खतौनी लेकर जाएं
गेहूं बेचने आने वाले किसान अपने साथ खसरा, खतौनी, आधार कार्ड और बैंक पास बुक की फोटो काफी लेकर जाएं, ताकि उन्हें खरीद केंद्र पर सहूलियत मिल सके। यदि किसान उपरोक्त कागजों में से कोई एक नहीं ले जाता है, तो उसे गेहूं बेचने में दिक्कत आ सकती है।
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पिछले पांच साल में कभी लक्ष्य पूरा नहीं
2013-14 में 95,500 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य था, लेकिन 13196.05 मीट्रिक टन (13.82 प्रतिशत) खरीदहुई थी। 2014-15 में 74,304 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य था और 6,277.35 मीट्रिक टन (8.45 प्रतिशत) खरीद हुई थी। 2015-16 में 57,000 मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य था व 49,889.35 मीट्रिक टन (87.54 प्रतिशत) खरीद हुई थी। 2016-17 में 76,000 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य था और 27,551.97 मीट्रिक टन (36.25 प्रतिशत) खरीद हुई थी। 2017-18 में 1,51,000 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य है। इसके सापेक्ष अब तक 49,389.93 मीट्रिक टन (32.71 प्रतिशत) खरीद हो चुकी है।