{"_id":"572506424f1c1bf536a917f5","slug":"smart-grid-power-grip-in-electricity-theif","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिजली चोरों पर शिकंजा कसेगा ‘स्मार्ट ग्रिड’ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिजली चोरों पर शिकंजा कसेगा ‘स्मार्ट ग्रिड’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 01 May 2016 01:34 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। देश व्यापी बिजली चोरी रोकने की मुहिम झांसी से शुरू की जाने वाली है। यह बिजली चोरों के लिए बुरी खबर है। केंद्र सरकार ने इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए झांसी को चुना है। इसके लागू हो जाने के बाद बिजली चोरी करना नामुमकिन हो जाएगा। इतना ही नहीं विद्युत बकाया होने पर आफिस से ही कनेक्शन भी काट दिया जाएगा।
गौरतलब है कि भारत सरकार के ‘टेक्निकल प्रपोजल टू नेशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन मार्च 2016’ के तहत झांसी को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना जाना लगभग तय हो गया है। भारत सरकार ने रिडक्शन आफ नॉन टेक्निकल लोसेस इन इंडिया सिटीज को बनाने के लिए ‘टेक्निकल प्रोपोजल टू नेशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन मार्च 2016’ प्रोजेक्ट (स्मार्ट ग्रिड) तैयार किया है। प्रोजेक्ट का मकसद शहरों में होने वाली चोरी व अन्य लाइन लॉस को पूरी तरह रोका जाना है।
योजना के तहत उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे, जिनकी निगरानी विभाग द्वारा बनाए गए कंट्रोल रूम से होगी। ट्रांसफार्मरों व विद्युत लाइनों को भी निगरानी में रखा जा सकेगा। उपभोक्ताओं को बिल जारी व बकाया होने पर कंट्रोल रूप से बिजली काट दी जाएगी। केंद्र सरकार ने ‘स्मार्ट ग्रिड प्रोजेक्ट’ का काम विश्वस्तरीय कंपनी सीमेंस को सौंपा गया है। कंपनी ने हाल में ही ब्राजील में उक्त प्रोजेक्ट को पूरा किया है, जहां चोरी व लाइन लॉस घटकर पांच प्रतिशत रह गया है। इस प्रोजेक्ट के सुपरवीजन के लिए आईएएस अफसर प्रभुनाथ सिंह को शामिल किया गया है, जो पूर्व में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम आगरा के प्रबंध निदेशक के पद पर कार्य कर चुके हैं। उनकी मंशा है कि इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरूआत झांसी से की जाए। इसके लिए उन्होंने विद्युत वितरण खंड दो के अधिशासी अभियंता पंकज अग्रवाल को तैयार रहने को कहा है। उनसे कहा गया है कि झांसी में पायलट प्रोजेक्ट उनकी देखरेख में ही पूरा होगा। हालांकि, अधिशासी अभियंता इस प्रोजेक्ट पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
विज्ञापन
तीस फीसदी होती है बिजली चोरी व लाइन लॉस
महानगर के साठ हजार से अधिक उपभोक्ताओं के मीटर परिसर के बाहर लगने के बाद भी बीस फीसदी घरेलू उपभोक्ता अब भी बिजली चोरी कर रहे हैं। यह कड़वी सच्चाई विभाग खुद स्वीकार करता है। महानगर में हर माह औसतन साढ़े चार करोड़ यूनिट बिजली खर्च होती है। गर्मियों में यह मांग बढ़कर पांच करोड़ बीस लाख यूनिट तक पहुंच जाती है। इस हिसाब से यूपी पावर कारपोरेशन को हर माह कम से कम 30 करोड़ या अधिकतम 32 करोड़ का राजस्व मिलना चाहिए। लेकिन, तमाम प्रयासों के बाद भी यह आंकड़ा सिमटकर बाइस से चौबीस करोड़ पर रह जाता है। शहर में दस प्रतिशत बिजली लाइन लॉस में जाती है। इसके मुख्य कारण कम क्षमता के विद्युत तार, क्षमता के हिसाब से ट्रांसफार्मरों का न लगा होना, वोल्टेज समस्या, लाइन में ज्वाइंट आदि हैं। महानगर में विद्युत खपत के हिसाब से विभाग को प्रति यूनिट 7.50 रुपये मिलना चाहिए, मगर 4.77 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से ही राजस्व प्राप्त हो पा रहा है।
विज्ञापन
गौरतलब है कि भारत सरकार के ‘टेक्निकल प्रपोजल टू नेशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन मार्च 2016’ के तहत झांसी को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना जाना लगभग तय हो गया है। भारत सरकार ने रिडक्शन आफ नॉन टेक्निकल लोसेस इन इंडिया सिटीज को बनाने के लिए ‘टेक्निकल प्रोपोजल टू नेशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन मार्च 2016’ प्रोजेक्ट (स्मार्ट ग्रिड) तैयार किया है। प्रोजेक्ट का मकसद शहरों में होने वाली चोरी व अन्य लाइन लॉस को पूरी तरह रोका जाना है।
विज्ञापन
योजना के तहत उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे, जिनकी निगरानी विभाग द्वारा बनाए गए कंट्रोल रूम से होगी। ट्रांसफार्मरों व विद्युत लाइनों को भी निगरानी में रखा जा सकेगा। उपभोक्ताओं को बिल जारी व बकाया होने पर कंट्रोल रूप से बिजली काट दी जाएगी। केंद्र सरकार ने ‘स्मार्ट ग्रिड प्रोजेक्ट’ का काम विश्वस्तरीय कंपनी सीमेंस को सौंपा गया है। कंपनी ने हाल में ही ब्राजील में उक्त प्रोजेक्ट को पूरा किया है, जहां चोरी व लाइन लॉस घटकर पांच प्रतिशत रह गया है। इस प्रोजेक्ट के सुपरवीजन के लिए आईएएस अफसर प्रभुनाथ सिंह को शामिल किया गया है, जो पूर्व में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम आगरा के प्रबंध निदेशक के पद पर कार्य कर चुके हैं। उनकी मंशा है कि इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरूआत झांसी से की जाए। इसके लिए उन्होंने विद्युत वितरण खंड दो के अधिशासी अभियंता पंकज अग्रवाल को तैयार रहने को कहा है। उनसे कहा गया है कि झांसी में पायलट प्रोजेक्ट उनकी देखरेख में ही पूरा होगा। हालांकि, अधिशासी अभियंता इस प्रोजेक्ट पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
विज्ञापन
तीस फीसदी होती है बिजली चोरी व लाइन लॉस
महानगर के साठ हजार से अधिक उपभोक्ताओं के मीटर परिसर के बाहर लगने के बाद भी बीस फीसदी घरेलू उपभोक्ता अब भी बिजली चोरी कर रहे हैं। यह कड़वी सच्चाई विभाग खुद स्वीकार करता है। महानगर में हर माह औसतन साढ़े चार करोड़ यूनिट बिजली खर्च होती है। गर्मियों में यह मांग बढ़कर पांच करोड़ बीस लाख यूनिट तक पहुंच जाती है। इस हिसाब से यूपी पावर कारपोरेशन को हर माह कम से कम 30 करोड़ या अधिकतम 32 करोड़ का राजस्व मिलना चाहिए। लेकिन, तमाम प्रयासों के बाद भी यह आंकड़ा सिमटकर बाइस से चौबीस करोड़ पर रह जाता है। शहर में दस प्रतिशत बिजली लाइन लॉस में जाती है। इसके मुख्य कारण कम क्षमता के विद्युत तार, क्षमता के हिसाब से ट्रांसफार्मरों का न लगा होना, वोल्टेज समस्या, लाइन में ज्वाइंट आदि हैं। महानगर में विद्युत खपत के हिसाब से विभाग को प्रति यूनिट 7.50 रुपये मिलना चाहिए, मगर 4.77 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से ही राजस्व प्राप्त हो पा रहा है।