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स्मार्ट सिटी : नगर निगम रहेगा सिर्फ मॉनीटरिंग पावर में
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Tue, 08 Dec 2015 01:00 AM IST
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झांसी। स्मार्ट सिटी को लेकर सुहाने ख्वाब सजाए नगर निगम से जुड़े कुछ लोगों के लिए यह खबर झटका पहुंचा सकती है। स्मार्ट सिटी के तहत होने वाले कार्यों में वह अपनी मनमर्जी नहीं चला पाएंगे। केंद्रीय टीम की देखरेख में ही योजना से जुड़े कार्य होंगे और उन्हीं के पास वित्तीय पावर होगी। नगर निगम सिर्फ कार्यों की मॉनीटरिंग करेगा और मानक के अनुरूप कार्य न होने पर उसकी रिपोर्ट केंद्र को भेजेगा।
नगर निगम से जुड़े कुछ अफसर, जनप्रतिनिधि व ठेकेदार स्मार्ट सिटी योजना का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि सैकड़ों करोड़ रुपये की लागत से होने वाले निर्माण कार्यों का श्रेय उनको मिल जाएगा, जिसमें वे अपनी मनमर्जी चला लेंगे। यही वजह है कि कुछ लोगों ने स्मार्ट सिटी में झांसी का चयन होने पर लड्डू बांटने की तैयारी भी कर ली थी। इसी बीच आई इस खबर ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। स्मार्ट सिटी में होने वाले कार्यों के लिए खर्च का अधिकार नगर निगम के अफसरों के पास नहीं होगा।
स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत होने वाले कार्यों के वित्तीय अधिकार केंद्र सरकार के पास होंगे। स्मार्ट सिटी के कार्यों पर होने वाले खर्च के लिए स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) बनाया जाएगा। इसका सीईओ केंद्र सरकार का प्रतिनिधि होगा। यह आईएएस स्तर का अधिकारी होगा। कमेटी का सचिव प्रदेश सरकार का प्रतिनिधि होगा, जो पीसीएस स्तर का अधिकारी होगा। कमेटी में नगर निगम के दो प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो महापौर और नगर आयुक्त हो सकते हैं। हालांकि नगर निगम के दो प्रतिनिधि कौन से होंगे, इसको लेकर अभी स्पष्ट गाइड लाइन नहीं आई है। लेकिन, इतनी ही खबर से नगर निगम के जनप्रतिनिधियों से लेकर अफसरों तक में मायूसी है।
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केंद्रीय स्तर पर ही होंगे टेंडर
स्मार्ट सिटी के तहत सभी बड़े-बड़े काम होने हैं। कार्यों की लागत कम से कम सौ करोड़ रुपये होगी। सभी कार्यों के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी केंद्र स्तर से होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियां सभी टेंडरों को हथिया लेंगी और स्थानीय कॉन्ट्रेक्टर हाथ मलते रह जाएंगे।
11 अरब 50 करोड़ की बनी है कार्ययोजना
नगर निगम ने सिटी को स्मार्ट बनाने के लिए महानगर में होने वाले विभिन्न कार्यों के लिए 11 अरब 50 करोड़ रुपये की कार्य योजना तैयार की है। कार्य योजना में अब सिर्फ ड्राफ्टिंग का कार्य ही शेष रह गया है। 12 दिसंबर तक यह कार्य पूरा हो जाएगा और उसके बाद इस पर महापौर, नगर आयुक्त व नगर निगम के अन्य अफसर मंथन करेंगे। मंथन के बाद 15 दिसंबर को इसे राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। राज्य सरकार कार्य योजना को केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के पास भेजेगी।
स्मार्ट सिटी के तहत होने वाले सभी कार्य एसपीवी की देखरेख में होंगे। कार्यों को निर्बाध रूप से समय पर पूरा कराने के लिए ही यह कदम उठाया गया है। नगर निगम के पास कार्यों की मॉनीटरिंग का पूरा अधिकार होगा। जहां भी कार्य मानक के अनुरूप नहीं हो रहा होगा, उसकी रिपोर्ट हम केंद्र सरकार को भेजेंगे।
इं. आरके सिंह
नोडल अधिकारी, स्मार्ट सिटी
नगर निगम झांसी।
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नगर निगम से जुड़े कुछ अफसर, जनप्रतिनिधि व ठेकेदार स्मार्ट सिटी योजना का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि सैकड़ों करोड़ रुपये की लागत से होने वाले निर्माण कार्यों का श्रेय उनको मिल जाएगा, जिसमें वे अपनी मनमर्जी चला लेंगे। यही वजह है कि कुछ लोगों ने स्मार्ट सिटी में झांसी का चयन होने पर लड्डू बांटने की तैयारी भी कर ली थी। इसी बीच आई इस खबर ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। स्मार्ट सिटी में होने वाले कार्यों के लिए खर्च का अधिकार नगर निगम के अफसरों के पास नहीं होगा।
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स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत होने वाले कार्यों के वित्तीय अधिकार केंद्र सरकार के पास होंगे। स्मार्ट सिटी के कार्यों पर होने वाले खर्च के लिए स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) बनाया जाएगा। इसका सीईओ केंद्र सरकार का प्रतिनिधि होगा। यह आईएएस स्तर का अधिकारी होगा। कमेटी का सचिव प्रदेश सरकार का प्रतिनिधि होगा, जो पीसीएस स्तर का अधिकारी होगा। कमेटी में नगर निगम के दो प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो महापौर और नगर आयुक्त हो सकते हैं। हालांकि नगर निगम के दो प्रतिनिधि कौन से होंगे, इसको लेकर अभी स्पष्ट गाइड लाइन नहीं आई है। लेकिन, इतनी ही खबर से नगर निगम के जनप्रतिनिधियों से लेकर अफसरों तक में मायूसी है।
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केंद्रीय स्तर पर ही होंगे टेंडर
स्मार्ट सिटी के तहत सभी बड़े-बड़े काम होने हैं। कार्यों की लागत कम से कम सौ करोड़ रुपये होगी। सभी कार्यों के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी केंद्र स्तर से होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियां सभी टेंडरों को हथिया लेंगी और स्थानीय कॉन्ट्रेक्टर हाथ मलते रह जाएंगे।
11 अरब 50 करोड़ की बनी है कार्ययोजना
नगर निगम ने सिटी को स्मार्ट बनाने के लिए महानगर में होने वाले विभिन्न कार्यों के लिए 11 अरब 50 करोड़ रुपये की कार्य योजना तैयार की है। कार्य योजना में अब सिर्फ ड्राफ्टिंग का कार्य ही शेष रह गया है। 12 दिसंबर तक यह कार्य पूरा हो जाएगा और उसके बाद इस पर महापौर, नगर आयुक्त व नगर निगम के अन्य अफसर मंथन करेंगे। मंथन के बाद 15 दिसंबर को इसे राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। राज्य सरकार कार्य योजना को केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के पास भेजेगी।
स्मार्ट सिटी के तहत होने वाले सभी कार्य एसपीवी की देखरेख में होंगे। कार्यों को निर्बाध रूप से समय पर पूरा कराने के लिए ही यह कदम उठाया गया है। नगर निगम के पास कार्यों की मॉनीटरिंग का पूरा अधिकार होगा। जहां भी कार्य मानक के अनुरूप नहीं हो रहा होगा, उसकी रिपोर्ट हम केंद्र सरकार को भेजेंगे।
इं. आरके सिंह
नोडल अधिकारी, स्मार्ट सिटी
नगर निगम झांसी।