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बिजली उत्पादन में मालगाड़ी की धीमी गति बन रही बाधा, कोयला लेकर देरी से पहुंच रहीं
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झांसी। रेलवे धनबाद, रांची और सिंगरौली से आने वाली कोयले से भरीं मालगाड़ियों को समय पर पारीछा थर्मल पावर प्लांट नहीं पहुंचा पा रहा है। इस कारण प्लांट की चौथी इकाई शुरू नहीं हो पा रही है। बुधवार को भी दो की जगह एक मालगाड़ी कोयला ही प्लांट को मिल सका। इसी तरह ललितपुर स्थित बजाज संयंत्र में दो इकाइयों से उत्पादन हो रहा है। यहां की एक इकाई तकनीकी खराबी से मंगलवार से बंद है।
झांसी के थर्मल पावर संयंत्र और ललितपुर में स्थित बजाज पावर प्लांट में रोजाना 2900 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। लेकिन, कोयले की कमी की वजह से पिछले 13 दिन में उत्पादन में भारी गिरावट आ गई थी। वर्तमान में पारीछा की चार इकाइयों में तीन से उत्पादन हो रहा है। 210 मेगावाट की एक इकाई बंद चल रही है। चारों इकाइयों को एक साथ चलाने के लिए तीन से चार मालगाड़ी (रैक) कोयले की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन इन दिनों एक या दो मालगाड़ी कोयला ही प्रतिदिन मिल पा रहा है। बुधवार को दो रैक मिलने की उम्मीद थी, लेकिन एक ही मिल सकी। दरअसल, मंगलवार को एक रैक मिर्जापुर में थी। मिर्जापुर से पारीछा की दूरी करीब 500 किलोमीटर है। बावजूद इसके रेलवे मालगाड़ी को 24 घंटे बाद भी पारीछा तक नहीं पहुंचा सका। स्टॉक में भी 12 हजार टन ही कोयला बचा है। इस कारण चौथी इकाई को चालू करना संभव नहीं हो पा रहा है।
इसी तरह ललितपुर प्लांट की 660- 660 मेगावाट की तीन इकाइयों से दो से उत्पादन हो रहा है। एक इकाई मंगलवार को तकनीकी खराबी से बंद हो गई थी, जिसकी मरम्मत की जा रही है। ।
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- बुधवार को दो मालगाड़ी कोयला मिलने की उम्मीद थी, लेकिन एक ही मिल सकी। कोयले की कमी से चौथी इकाई को चालू करना संभव नहीं हो पा रहा है।
एमके सचान, मुख्य महाप्रबंधक (पारीछा थर्मल पावर प्लांट)।
- तीन में से दो इकाइयों से उत्पादन चालू है। तकनीकी खराबी से बंद एक इकाई का मरम्मत कार्य चल रहा है।
राजीव श्रीवास्तव, असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट (बजाज पावर प्लांट)
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झांसी के थर्मल पावर संयंत्र और ललितपुर में स्थित बजाज पावर प्लांट में रोजाना 2900 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। लेकिन, कोयले की कमी की वजह से पिछले 13 दिन में उत्पादन में भारी गिरावट आ गई थी। वर्तमान में पारीछा की चार इकाइयों में तीन से उत्पादन हो रहा है। 210 मेगावाट की एक इकाई बंद चल रही है। चारों इकाइयों को एक साथ चलाने के लिए तीन से चार मालगाड़ी (रैक) कोयले की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन इन दिनों एक या दो मालगाड़ी कोयला ही प्रतिदिन मिल पा रहा है। बुधवार को दो रैक मिलने की उम्मीद थी, लेकिन एक ही मिल सकी। दरअसल, मंगलवार को एक रैक मिर्जापुर में थी। मिर्जापुर से पारीछा की दूरी करीब 500 किलोमीटर है। बावजूद इसके रेलवे मालगाड़ी को 24 घंटे बाद भी पारीछा तक नहीं पहुंचा सका। स्टॉक में भी 12 हजार टन ही कोयला बचा है। इस कारण चौथी इकाई को चालू करना संभव नहीं हो पा रहा है।
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इसी तरह ललितपुर प्लांट की 660- 660 मेगावाट की तीन इकाइयों से दो से उत्पादन हो रहा है। एक इकाई मंगलवार को तकनीकी खराबी से बंद हो गई थी, जिसकी मरम्मत की जा रही है। ।
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- बुधवार को दो मालगाड़ी कोयला मिलने की उम्मीद थी, लेकिन एक ही मिल सकी। कोयले की कमी से चौथी इकाई को चालू करना संभव नहीं हो पा रहा है।
एमके सचान, मुख्य महाप्रबंधक (पारीछा थर्मल पावर प्लांट)।
- तीन में से दो इकाइयों से उत्पादन चालू है। तकनीकी खराबी से बंद एक इकाई का मरम्मत कार्य चल रहा है।
राजीव श्रीवास्तव, असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट (बजाज पावर प्लांट)