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सोते-सोते खुल जाती है नींद तो हो सकता स्लीप एप्निया
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झांसी। सोते समय कुछ देर के लिए सांस रुक जाने से झटके से आपकी नींद खुल जाती है तो ये स्लीप एप्निया बीमारी हो सकती है। अगर इस बीमारी का लंबे समय तक इलाज नहीं कराया जाता है तो ये बेहद खतरनाक हो सकता है। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का कहना है कि पिछले एक साल में इस बीमारी के 500 मरीज आ चुके हैं। 10 लोगों की जान भी जा चुकी है।
गायक-संगीतकार बप्पी लाहिरी का निधन ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया से होने के बाद ये बीमारी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। इस बीमारी में अधिकांश मामलों में लोगों को पता ही नहीं होता है कि उन्होंने सांस लेना बंद कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि स्लीप एप्निया के रिस्क फैक्टर में पुरुष होना, ज्यादा वजनी होना, 40 से अधिक उम्र, गर्दन का आकार ज्यादा होना, परिवार में किसी की इस बीमारी की हिस्ट्री आदि शामिल है। चूंकि, मेडिकल कॉलेज में अधिकांश गंभीर मरीज ही आते हैं, ऐसे में हर महीने दो से तीन रोगियों को भर्ती करना पड़ता है।
ऐसे मरीजों को वाई पैप मशीन के जरिए सांस दिलाई जाती है। इस बीमारी के गंभीर मरीजों की गर्दन की सर्जरी भी करनी पड़ जाती है। बताया गया कि इस बीमारी में शरीर में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। दिमाग में सूजन आने लगती है और धीरे-धीरे मरीज कोमा में चला जाता है। वहीं, जो मरीज इसका इलाज नहीं कराते हैं, उन्हें स्ट्रोक, हाइपरटेंशन, ह्रदयघात, डिप्रेशन, सिर दर्द आदि हो सकता है।
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ये हैं लक्षण
- नींद में घुटन सी महसूस होना
- सोते समय सांस न आना
- नाक से सांस लेते हुए आवाज आना
- सोते वक्त सांस में रुकावट आना
- रात में बार-बार नींद का खुलना
ऐसे कर सकते हैं बचाव
- मोटापा कम करें
- शराब का सेवन न करें
- धूम्रपान भी न करें
- योगा, व्यायाम करें
मेडिकल कॉलेज में हर महीने ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया के 40 से 45 मरीज आते हैं। पिछले एक साल में लगभग 500 रोगी आ चुके हैं। 10 की जान भी जा चुकी है। समय पर इलाज करा लिया जाए तो बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है।
- डॉ. रामबाबू, प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, मेडिकल कॉलेज।
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गायक-संगीतकार बप्पी लाहिरी का निधन ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया से होने के बाद ये बीमारी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। इस बीमारी में अधिकांश मामलों में लोगों को पता ही नहीं होता है कि उन्होंने सांस लेना बंद कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि स्लीप एप्निया के रिस्क फैक्टर में पुरुष होना, ज्यादा वजनी होना, 40 से अधिक उम्र, गर्दन का आकार ज्यादा होना, परिवार में किसी की इस बीमारी की हिस्ट्री आदि शामिल है। चूंकि, मेडिकल कॉलेज में अधिकांश गंभीर मरीज ही आते हैं, ऐसे में हर महीने दो से तीन रोगियों को भर्ती करना पड़ता है।
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ऐसे मरीजों को वाई पैप मशीन के जरिए सांस दिलाई जाती है। इस बीमारी के गंभीर मरीजों की गर्दन की सर्जरी भी करनी पड़ जाती है। बताया गया कि इस बीमारी में शरीर में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। दिमाग में सूजन आने लगती है और धीरे-धीरे मरीज कोमा में चला जाता है। वहीं, जो मरीज इसका इलाज नहीं कराते हैं, उन्हें स्ट्रोक, हाइपरटेंशन, ह्रदयघात, डिप्रेशन, सिर दर्द आदि हो सकता है।
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ये हैं लक्षण
- नींद में घुटन सी महसूस होना
- सोते समय सांस न आना
- नाक से सांस लेते हुए आवाज आना
- सोते वक्त सांस में रुकावट आना
- रात में बार-बार नींद का खुलना
ऐसे कर सकते हैं बचाव
- मोटापा कम करें
- शराब का सेवन न करें
- धूम्रपान भी न करें
- योगा, व्यायाम करें
मेडिकल कॉलेज में हर महीने ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया के 40 से 45 मरीज आते हैं। पिछले एक साल में लगभग 500 रोगी आ चुके हैं। 10 की जान भी जा चुकी है। समय पर इलाज करा लिया जाए तो बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है।
- डॉ. रामबाबू, प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, मेडिकल कॉलेज।