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एसी में बैठकर समीक्षा करने वालों इस स्कूल को भी देख लो, यहां न बत्ती है न पानी

Thu, 19 May 2022 12:30 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 19 May 2022 12:30 AM IST
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Sitting in AC, look at this school who reviews it, there is neither light nor water here
झांसी। सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लाख दावे हो रहे हैं। अफसर भी दफ्तरों में बैठकर स्कूलों में सभी सुविधाएं होने के दावे कर देते हैं लेकिन हकीकत जाननी है तो सैंयर गेट स्थित प्राथमिक कंपोजिट विद्यालय में जाइए। यह एक ऐसा स्कूल है न बिजली का कनेक्शन है और न ही पानी का इंतजाम। स्कूल की बाउंड्री के बाहर एक हैंडपंप लगा है उससे ही पानी लाया जाता है। कई दफा अफसरों तक यह मुद्दा लोगों ने पहुंचाया मगर नतीजा सिफर ही रहा।
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ये विद्यालय सैंयर गेट पर स्थित है। इस प्राथमिक कंपोजिट विद्यालय की कक्षा देखें तो बच्चे भीषण गर्मी में एक हाथ से लिखते हैं और दूसरे हाथ से अपनी ही कॉपी-किताबों से खुद को पंखा झलते हैं। वहीं तीन शिक्षकों की हालत भी ऐसी ही है, पढ़ाते-पढ़ाते वो भी बच्चों की तरह पसीने से लथपथ हो जाते हैं। कहने को तो विद्यालय दता भवन बढ़िया है लेकिन यहां बिना बिजली-पानी के बच्चों की पढ़ाई दुश्वार है। इस भीषण गर्मी में बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।
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स्कूल में लगे नल सिर्फ देखने के लिए हैं, कभी उनमें से पानी निकलता किसी ने नहीं देखा। स्कूल के कमरों में लाइट तो लगी है, लेकिन अभी तक बिजली पहुंची ही नहीं।
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स्थिति यह है कि कक्षा एक से पांचवीं तक के 153 बच्चे बिना पंखे के गर्मी में जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। जब अमर उजाला की टीम स्कूल पहुंची तो पाया कि बच्चे एक हाथ से लिख रहे तो दूसरे हाथ से खुद को हवा कर रहे और बार-बार पसीना पोछ रहे। छुट्टी के समय बच्चों के कपड़े पसीने से भीगे दिखते हैं। इस संबंध में बीएसए वेदराम ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान सभी विद्यालयों में बिजली कनेक्शन के लिए बिजली विभाग को धनराशि प्रेषित की गई थी। यदि कोई विद्यालय रह गया है तो उसे जल्द ही संज्ञान में लेकर बिजली कनेक्शन करवाया जाएगा।
153 बच्चों के लिए सिर्फ एक बाल्टी पानी
झांसी। विद्यालय में पानी के लिए कक्षा के बाहर एक बाल्टी रखी है जिसमें बाहर किसी हैंडपंप से भरकर पानी रख देते हैं। उसी से बच्चे पानी पीते रहते हैं। मिडडे मील के पहले बच्चे हाथ धोएं या खाना खाकर पानी पीएं। सभी में यही पानी उपयोग होता है। बच्चों का कहना है कि हाथ धोने में पानी इस्तेमाल करते हैं तो खाना खाने के बाद पानी कम पड़ जाता है। हैंडपंप में भी पानी का स्तर बहुत नीचे है, जैसे-तैसे उसमें से पानी निकलता है।
अधिकारियों की नजर भी नहीं पहुंच रही...
झांसी। एक ओर परिषदीय स्कूल में नामांकन के लिए सीडीओ और जिलाधिकारी लगातार प्रयास कर रहे हैं। अधिकारी स्कूल भी गोद ले रहे हैं, लगातार समीक्षा भी की जा रही है। लेकिन ऐसे स्कूलों पर अधिकारियों की नजर भी नहीं पहुंच रही है। एसी कमरे में बैठकर आदर्श स्कूल का ढांचा बनाने वाले, वर्षों से संचालित स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं पहुंचा पा रहे।

फर्नीचर के नाम पर एक मेज बस...
स्कूल में कुछ पुराना फर्नीचर है, जो कि कबाड़ हो चुका है। फर्नीचर में भी सिर्फ मेज ही है, वह भी पुरानी हो चुकी है। प्रधानाध्यापिका मंजू अग्रवाल ने बताया कि वे भी कई वर्षों से बिजली कनेक्शन के लिए प्रयास कर रही हैं। लेकिन अभी तक विभाग ने बिजली कनेक्शन स्कूल में नहीं करवाया है।
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