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सिर्फ पांच साल में सिमटा 170 महिला ग्राम प्रधानों का राजनीतिक जीवन

Sat, 10 Apr 2021 02:04 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 10 Apr 2021 02:04 AM IST
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sirf paanch saal me hi simta 170 mehlaoin ka  political carrer
झांसी। पिछली दफा 170 ग्राम पंचायतों की कमान महिलाओं के हाथ में थीं। लेकिन अधिकांश मामलों में इन सभी गांवों की बागडोर परिवार के पुरुष सदस्य ही उठाते दिखे।
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जिन महिलाओं को इस बार सीट आरक्षित होने पर चुनाव लड़ने का मौका मिला, उनमें से तकरीबन सभी महिलाएं चुनावी मैदान से बाहर हैं। उनकी जगह उनके पति, पुत्र या देवर चुनावी मैदान में है। ऐसे में इन महिलाओं का राजनीतिक जीवन सिर्फ पांच साल में ही सिमट कर रह गया।
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महिलाओं को गांव की सरकार में मौका दिए जाने के साथ ही उनमें नेतृत्व की भावना विकसित करने के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया। उप्र पंचायत राज अधिनियम-1947 के जरिए उनके लिए कुल एक तिहाई सीट आरक्षित की गई। आरक्षित सीटों का प्रावधान वर्ष 1995 से लागू है। लेकिन पांच चुनाव बीतने के बावजूद पंचायत स्तर पर महिला नेतृत्व उभरता नहीं दिखता। उनकी जगह ज्यादातर कमान परिवार के ही पुरुषोें ने हथिया रखी है। पिछली दफे जनपद की परसुवां, धनौरा, गोकुल, ककरबई, डुमरई, खैलार, सगौली, बामौर, झबरा, चमरऊवा, रक्सा, पुनावलीकलां, राजापुर, बरूआपुरा, बमेर, टहरौली किला, ढिपकई, बंकापहाड़ी, धुरैया, खड़ौरा, गुढ़ा, अम्मरगढ़, सेमरी, लुहरगांव घाट, उजयान, चिरगांव देहात, महाराजगंज, पूंछ, महेलुवा, कुम्हरार, भरोसा, पहाड़पुरा, साकिन, सेरसा, बराटा, पारीछा समेत ग्राम प्रधान की कुल 170 सीटें महिलाओं के लिए पिछली बार आरक्षित हुईं थी। लेकिन पांच साल के पूरे कार्यकाल के दौरान इनमें से अधिकांश पंचायतों की बागडोर महिला ग्राम प्रधानों के बजाए उनके पति, बेटे, देवर ही संभाले रहे। यहां तक महिला ग्राम प्रधानों के नाम से जिला स्तरीय बैठकों में भी शिरकत करते रहे।
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इन सीटोें मेें 69 सीटें सामान्य वर्ग में आरक्षित हुई हैं। इसके अलावा कुछ दूसरे वर्गों को भी आरक्षित हुई हैं। लेकिन सामान्य सीट में भी किसी निवर्तमान महिला ग्राम प्रधान ने इस बार उम्मीदवारी नहीं जताई। निवर्तमान महिला ग्राम प्रधानोें के बजाए अधिकांश जगहों पर उनके पति, पुत्र अथवा देवर ही इस बार चुनावी मैदान में हैं। बबीना निवासी रामबहादुर रायकवार का कहना है बबीना ग्रामीण पिछली बार महिला को आरक्षित थी। लेकिन यह सीट अब सामान्य के लिए आरक्षित है लेकिन, निवर्तमान प्रधान की भागीदारी चुनाव में नहीं है। इसी तरह पुरा सीट भी महिला होने के बाद इस बार सभी उम्मीदवारों के लिए खुली हुई है। लेकिन इसके बावजूद महिला के बजाए सीट पर पुरुष वर्चस्व ही देखने को मिल रहा है।
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