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सिंगल फेज इंजन की जल्द होगी विदाई, अब थ्री फेज इंजन के सहारे दौड़ेगी ट्रेन
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झांसी। रेल यातायात आसान बनाने को अब रेलवे नई पीढ़ी के रेल इंजनों को इस्तेमाल में ला रहा है। झांसी डिवीजन में चरणबद्व तरीके से थ्री फेज इंजनों का इस्तेमाल शुरू किया जाएगा। इसके लिए डिवीजन में तैयारियां आरंभ हो गई हैं। रेल अफसरों का कहना है कि इनके सहारे रेल यातायात आसान बनाया जा सकेगा।
झांसी रेल मंडल के पास सिंगल फेज इंजनों में अभी डब्ल्यूएजी-5, डब्ल्यूएपी-4, डब्ल्यूएजी-7 जनरेशन के कुल 249 इलेक्ट्रिक इंजन हैं। यह सभी इंजन डीसी करेंट पर काम करते हैं। इन इंजनों की क्षमता सिर्फ 3700-3900 टन भार वहन करने की ही है जबकि अब आ रहे नए जनरेशन के इंजन 5400 टन भार वहन करने में सक्षम हैं। यह इंजन डब्ल्यूएजी-9 जनरेशन केे हैं। इनमें बिजली की बचत होने के साथ ही इनके केबिन से गाड़ियों पर नियंत्रण भी पहले के मुकाबले सटीक तरीके से रखा जा सकता है। कई रेल मंडलों ने इन थ्री फेज रेल इंजनों का इस्तेमाल भी शुरू कर दिया है। अब झांसी रेल मंडल को भी यह इंजन जल्द मिलने हैं। इसके लिए वर्कशाप कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रेल अफसरों का कहना है कि जल्द ही यह इंजन मंडल को मिलने की उम्मीद है हालांकि पहली खेप में कितने इंजन दिए जाएंगे यह साफ नहीं हुआ है।
3500 टन से अधिक भार को खींचना होता है मुश्किल
सिंगल फेज इंजन के सहारे 3500 टन से अधिक भार खींचना काफी मुश्किल होता है। इसका असर यातायात के समय पालन पर भी पड़ता है। झांसी रेल मंडल में कई ट्रैक काफी चढ़ाई पर हैं। मंडल के डबरा ग्वालियर सेेक्शन के डाउन ट्रैक पर अनंतपेठ से आंतरी स्टेशन के बीच, बबीना ललितपुर सेक्शन के डाउन ट्रैक पर माताटीला, बसई और बुढ़पुरा स्टेशन के बीच, झांसी बांदा सिंगल ट्रैक पर ओरछा से झांसी के बीच चढ़ाई वाला क्षेत्र है। इनके बीच अगर कोई भरी हुई मालगाड़ी किसी कारण से खड़ी हो जाए तो वह दोबारा तभी आगे बढ़ती है जब उसमें दूसरा इंजन जोड़ा जाएगा। खासकर बारिश के समय इन स्टेशनों के बीच मालगाड़ियों को दो इंजन लगाकर आगे बढ़ाना पड़ता है। रेल अफसरों का कहना है कि बारिश के दौरान रोजाना 15 से 20 भरी मालगाड़ियों को दूसरा इंजन लगाने के बाद ही चढ़ाई पार कराई जा पड़ता है।
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झांसी रेल मंडल के पास सिंगल फेज इंजनों में अभी डब्ल्यूएजी-5, डब्ल्यूएपी-4, डब्ल्यूएजी-7 जनरेशन के कुल 249 इलेक्ट्रिक इंजन हैं। यह सभी इंजन डीसी करेंट पर काम करते हैं। इन इंजनों की क्षमता सिर्फ 3700-3900 टन भार वहन करने की ही है जबकि अब आ रहे नए जनरेशन के इंजन 5400 टन भार वहन करने में सक्षम हैं। यह इंजन डब्ल्यूएजी-9 जनरेशन केे हैं। इनमें बिजली की बचत होने के साथ ही इनके केबिन से गाड़ियों पर नियंत्रण भी पहले के मुकाबले सटीक तरीके से रखा जा सकता है। कई रेल मंडलों ने इन थ्री फेज रेल इंजनों का इस्तेमाल भी शुरू कर दिया है। अब झांसी रेल मंडल को भी यह इंजन जल्द मिलने हैं। इसके लिए वर्कशाप कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रेल अफसरों का कहना है कि जल्द ही यह इंजन मंडल को मिलने की उम्मीद है हालांकि पहली खेप में कितने इंजन दिए जाएंगे यह साफ नहीं हुआ है।
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3500 टन से अधिक भार को खींचना होता है मुश्किल
सिंगल फेज इंजन के सहारे 3500 टन से अधिक भार खींचना काफी मुश्किल होता है। इसका असर यातायात के समय पालन पर भी पड़ता है। झांसी रेल मंडल में कई ट्रैक काफी चढ़ाई पर हैं। मंडल के डबरा ग्वालियर सेेक्शन के डाउन ट्रैक पर अनंतपेठ से आंतरी स्टेशन के बीच, बबीना ललितपुर सेक्शन के डाउन ट्रैक पर माताटीला, बसई और बुढ़पुरा स्टेशन के बीच, झांसी बांदा सिंगल ट्रैक पर ओरछा से झांसी के बीच चढ़ाई वाला क्षेत्र है। इनके बीच अगर कोई भरी हुई मालगाड़ी किसी कारण से खड़ी हो जाए तो वह दोबारा तभी आगे बढ़ती है जब उसमें दूसरा इंजन जोड़ा जाएगा। खासकर बारिश के समय इन स्टेशनों के बीच मालगाड़ियों को दो इंजन लगाकर आगे बढ़ाना पड़ता है। रेल अफसरों का कहना है कि बारिश के दौरान रोजाना 15 से 20 भरी मालगाड़ियों को दूसरा इंजन लगाने के बाद ही चढ़ाई पार कराई जा पड़ता है।
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