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Jhansi News: पारीछा बांध से निकाली जाएगी गाद... बढ़ेगा जल का भंडार
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड के सबसे पुराने बांधों में शुमार परीछा बांध से गाद निकाली जाएगी। सवा सौ साल पुराने इस बांध में बड़ी मात्रा में गाद होने से यहां पानी संग्रहण की क्षमता कम हो गई है। साथ ही बांध को केन-बेतवा लिंक परियोजना से भी जोड़ा जा रहा है। अफसरों का कहना है कि गाद निकलने के बाद यहां अधिक पानी का भंडारण होगा। नए स्लूज गेट के जरिये यह गाद निकाली जाएगी।
पारीछा बांध का निर्माण वर्ष 1910 में अंग्रेजों ने कराया था। इस दौरान बांध की भंडराण क्षमता करीब 107.25 मिलियन घनमीटर थी। अब इसकी भंडारण क्षमता घटकर 78.74 मिलियन घनमीटर रह गई है। इस बांध को केन-बेतवा लिंक परियोजना से भी जोड़ा जाना है। ऐसे में पारीछा बांध का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। इसके तहत ही बांध के पुराने गेट बदलकर उनको मैकेनिकल गेट में तब्दील किया जाएगा। साथ ही पानी की भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए गाद भी निकलवाई जाएगी। सिंचाई अफसरों का कहना है गाद निकालने के लिए बांध के नीचे नए स्लूज गेट बनाए जाएंगे। बारिश के दिनों में यह स्लूज गेट खोलकर गाद निकाली जाएगी। वहीं, केन-बेतवा लिंक परियोजना के मुख्य अभियंता देवेश शुक्ला के मुताबिक स्लूज गेट के जरिये ही इस बांध की गाद निकाली जा सकती है। बांध के जीर्णोद्धार के लिए कार्ययोजना में अन्य बिंदु भी शामिल किए गए हैं।
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इनसेट
टीम ने किया तकनीकी परीक्षणकेन-बेतवा लिंक परियोजना के मुख्य कार्यपालक अधिकारी वीके दीक्षित की अगुआई में झांसी पहुंची टीम ने बरुआसागर कैनाल एवं पारीछा बांध पर प्रस्तावित कार्यों का जायजा लिया। टीम ने पारीछा बांध के विविध तकनीकी पहलुओं का परीक्षण किया। बता दें, 50 हजार करोड़ की केन-बेतवा लिंक परियोजना में केन और बेतवा नदी को आपस में 220 किलोमीटर लंबी लिंक कैनाल के जरिये जोड़ा जाएगा। इसका आखिरी सिरा बरुआसागर झील को बनाया गया है। इस दौरान मुख्य अभियंता देवेश शुक्ला, अधिशासी अभियंता अरविंद सचान समेत अन्य वरिष्ठ अभियंता मौजूद रहे।
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झांसी। बुंदेलखंड के सबसे पुराने बांधों में शुमार परीछा बांध से गाद निकाली जाएगी। सवा सौ साल पुराने इस बांध में बड़ी मात्रा में गाद होने से यहां पानी संग्रहण की क्षमता कम हो गई है। साथ ही बांध को केन-बेतवा लिंक परियोजना से भी जोड़ा जा रहा है। अफसरों का कहना है कि गाद निकलने के बाद यहां अधिक पानी का भंडारण होगा। नए स्लूज गेट के जरिये यह गाद निकाली जाएगी।
पारीछा बांध का निर्माण वर्ष 1910 में अंग्रेजों ने कराया था। इस दौरान बांध की भंडराण क्षमता करीब 107.25 मिलियन घनमीटर थी। अब इसकी भंडारण क्षमता घटकर 78.74 मिलियन घनमीटर रह गई है। इस बांध को केन-बेतवा लिंक परियोजना से भी जोड़ा जाना है। ऐसे में पारीछा बांध का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। इसके तहत ही बांध के पुराने गेट बदलकर उनको मैकेनिकल गेट में तब्दील किया जाएगा। साथ ही पानी की भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए गाद भी निकलवाई जाएगी। सिंचाई अफसरों का कहना है गाद निकालने के लिए बांध के नीचे नए स्लूज गेट बनाए जाएंगे। बारिश के दिनों में यह स्लूज गेट खोलकर गाद निकाली जाएगी। वहीं, केन-बेतवा लिंक परियोजना के मुख्य अभियंता देवेश शुक्ला के मुताबिक स्लूज गेट के जरिये ही इस बांध की गाद निकाली जा सकती है। बांध के जीर्णोद्धार के लिए कार्ययोजना में अन्य बिंदु भी शामिल किए गए हैं।
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टीम ने किया तकनीकी परीक्षणकेन-बेतवा लिंक परियोजना के मुख्य कार्यपालक अधिकारी वीके दीक्षित की अगुआई में झांसी पहुंची टीम ने बरुआसागर कैनाल एवं पारीछा बांध पर प्रस्तावित कार्यों का जायजा लिया। टीम ने पारीछा बांध के विविध तकनीकी पहलुओं का परीक्षण किया। बता दें, 50 हजार करोड़ की केन-बेतवा लिंक परियोजना में केन और बेतवा नदी को आपस में 220 किलोमीटर लंबी लिंक कैनाल के जरिये जोड़ा जाएगा। इसका आखिरी सिरा बरुआसागर झील को बनाया गया है। इस दौरान मुख्य अभियंता देवेश शुक्ला, अधिशासी अभियंता अरविंद सचान समेत अन्य वरिष्ठ अभियंता मौजूद रहे।
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