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Jhansi News: नहरों से नहीं निकाली सिल्ट, टेल तक पानी पहुंचना मुश्किल

Tue, 15 Oct 2024 02:22 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 15 Oct 2024 02:22 AM IST
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Silt not removed from canals, water difficult to reach tail
संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। रबी की फसलों की बुआई का सीजन शुरू हो गया है। लेकिन, नहर की सफाई नहीं हो पाई है। नहरों में कहीं गंदगी भरी पड़ी है तो कहीं झाड़ियां उगी हैं। नहरों का पानी टेल तक पहुंचना मुश्किल है।
विंध्याचल की तलहटी में फसलों की सिंचाई बांधों पर निर्भर है। यहां नलकूप, कुएं से न के बराबर सिंचाई की जाती है। वर्तमान में यहां चौदह बांध परियोजनाएं हैं और फसलों की सिंचाई के लिए इन बांधों से नहरें और माइनर निकाली गई हैं।
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पानी टेल तक पहुंचाने के लिए इन नहरों की सिल्ट सफाई कराई जाती है। यह सिल्ट सफाई सभी नहरों और माइनरों में की जाती है, लेकिन अभी तक सिल्ट सफाई शुरू नहीं हुई। जबकि किसान रबी की फसल बुआई करने की तैयारी में जुटे हैं। कई किसानों ने खाद-बीज खरीद का कार्य पूरा कर लिया है। जबकि, कुछ बुआई की व्यवस्था के लिए बैंकों व साहूकारों के चक्कर लगा रहे हैं तो कुछ उपज बेचकर खाद बीज खरीदने में जुटे हैं।
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एक अक्तूबर से दलहनी फसलों में चना व मटर की बुआई का सीजन शुरू हो गया है। कुछ क्षेत्रों में किसानों ने बुआई शुरू भी कर दी है। किसान अन्य फसलों की बुआई की तैयारियां कर रहे हैं। जबकि, नहर से सिंचाई पर आश्रित कई किसान इसके खुलने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन, नहरों का खुलना तो दूर सफाई तक शुरू नहीं हो पाई है। ऐसा ही हाल गोविंद सागर बांध की 14.300 किलोमीटर बायीं व 52 किलोमीटर लंबी दायीं नहर का बना हुआ है।
यहां नहर में झाड़ियां उग आई हैं। बायीं नहर आजादपुरा में गंदगी से बजबजा रही है। कचरा से पूरी तरह भरी पड़ी है। तुवन चौराहा पर पुलिया के पास भारी मात्रा में कचरा फंसा हुआ है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के आगे नहर में जगह-जगह बड़ी झाड़ियां खड़ी हैं। हालत यह है कि झाड़ियों से नहर नजर तक नहीं आ रही है। करीब 52 किलोमीटर लंबी दायीं नहर का भी यही हाल है।
इस नहर में गोविंद सागर बांध से लेकर कस्बा बार तक गंदगी ही गंदगी है। यही हाल रजवारा, इमलिया, बरखिरिया, खजरा, देवरान आदि सभी माइनरों का है, जिसमें झाड़ियां खड़ी हैं। ऐसे में किसान नहर में पानी आने को लेकर चिंतित हैं।
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नहर खुलने में 16 दिन का समय शेष
रबी फसलों की बुआई व पलेवा के लिए एक नवंबर से नहरों का संचालन किया जाता है। नहरों का पानी टेल तक आने की किसान उम्मीद लगा रहे हैं। लेकिन 16 दिन में इतनी लंबी नहरों की सिल्ट सफाई होना मुश्किल है। नहरों के आखिरी छोर वाले किसान टेल तक पानी मिलने को लेकर चिंतित हैं।

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रोस्टर के अनुसार होता है नहर का संचालन
बांधों से नहर संचालित होने का सिंचाई विभाग बाकायदा एक रोस्टर बनाता है और इसे जारी करता है। इस रोस्टर के अनुसार बांधों से नहरों का संचालन किया जाता है। रोस्टर में यह तय किया जाता है कि कब-कब नहर खुलेगी और कब बंद होगी। इससे किसानों को नहर संचालन की पूर्व से जानकारी रहती है।
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बांधों से निकली नहरों का विवरण
बांध - सिंचित भूमि - नहर की लंबाई - रजवाहा - अल्पिका - योग
गोविंद सागर - 10820 हेक्टेयर - 66.300 किमी. - 16 किमी - 107.790 किमी - 190.09 किमी.
शहजाद - 11000 हेक्टेयर - 43.750 किमी. - 13.500 किमी. - 59.350 किमी. - 116.600 किमी.
रोहिणी - 2000 हेक्टेयर - 8.460 किमी. - 00 - 11.520 किमी. - 19.980 किमी.
जामनी - 11000 हेक्टेयर - 86.370 किमी. - 53.380 किमी. - 108.950 किमी. - 230.700 किमी.
सजनाम - 7000 हेक्टेयर - 39.950 किमी. - 19.640 किमी. - 49.500 किमी. - 109.090 किमी.
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नहर की सिल्ट सफाई का काम शुरू होने वाला है। चार नवंबर से गोविंद सागर बांध की नहर का संचालन शुरू होगा। टेल तक पानी पहुंचाया जाएगा।
इंजी. शैलेष कुमार, अधिशासी अभियंता, राजघाट निर्माण खंड
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