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बीमार है मेडिकल कॉलेज हॉस्टल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Nov 2016 12:32 AM IST
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- फोटो : demo
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कमरों की टपकती छत, टॉयलेट के टूटे कमोड, बाथरूम में मकड़ी के जाल, जगह-जगह फैली गंदगी। ये स्थिति हैं मेडिकल कॉलेज के छात्रावास क्रमांक दो, धनवंतरी छात्रावास की। इतना ही नहीं, बिजली के उपकरण खुले पड़े हैं, इस कारण कभी भी अनहोनी होने की आशंका बनी रहती है। इतना ही नहीं, यहां रहने वाले छात्रों को पानी की समस्या से भी आए दिन दो-चार होना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज के सीनियर हॉस्टल में लगभग 200 पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्र रहते हैं। हॉस्टल में छात्रों के लिए तीन मेस और 27 शौचालय व इतनी ही बाथरूम हैं। उचित प्रबंधन के अभाव में यहां गंदगी का अंबार लगा है और अधिकतर शौचालय और बाथरूम खराब हैं, जिससे उनका उपयोग नहीं हो पाता है। कुछ ही शौचालय चालू हैं, जिनका छात्र उपयोग करते हैं। मेस में बैठने की जगह बिजली की और साफ सफाई की व्यवस्था न होने के कारण छात्र वहां बैठकर खाना नहीं खा पाते हैं।
शौचालयों में मकड़ी के जाले देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि महीनों से सफाई नहीं हुई है। आधे से अधिक शौचालय और बाथरूम खराब होने के कारण उपयोग में नहीं आ पाते हैं। यहां फैले कूड़े से उठती दुर्गंध अव्यवस्थाओं की कहानी बयां कर रही है। बिजली की व्यवस्था के लिए लगाई गई लाइटें भी शोपीस बनी हैं, जो न सिर्फ टूटी हैं, बल्कि उनके तार भी लटक कर दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं। पानी की समस्या से भी छात्रों को दो चार होना पड़ता है। कई दिनों तक पानी न आने से नहाने की भी समस्या उत्पन्न हो जाती है। यह सिर्फ एक ही हॉस्टल की समस्या नहीं है, बल्कि मेडिकल कॉलेज परिसर में बने लगभग सभी छात्रावासों की समस्या है।
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ये हैं परेशानियां
- सफाई न होना
- पानी की किल्लत
- मेस में बैठने की व्यवस्था न होना
- लाइटें टूटी पड़ी हैं
- जिम में रखी मशीनें खराब
- ड्रेनेज सिस्टम खराब होने से बाथरूम चोक
- हॉस्टल के आसपास गंदगी जमा होना
- खुले पड़े बिजली के उपकरण
- शौचालय और बाथरूमों में फैली गंदगी और आधे से अधिक खराब
- छतों से टपकता पानी और जर्जर भवन
- आवारा पशुओं का स्वच्छंद विचरण
इनका दावा
हॉस्टल के वार्डेन डा. सूर्य प्रकाश का कहना है कि सफाई के लिए तीन स्वीपर लगाए गए हैं। बजट के अभाव में कुछ काम नहीं हो पाते हैं। नवीनीकरण का काम चल रहा है जल्द ही समस्याएं खत्म हो जाएंगी।
शौचालयों में गंदगी जमा है और महीनों से टूटे पड़े हैं। पानी की समस्या भी रहती है जिससे नहाने को भी पानी नहीं मिल पाता है। कई बार शिकायत की लेकिन व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं हुआ। मेस में गंदगी और लाइट की व्यवस्था न होने से वहां बैठकर खाना नहीं खा पाते हैं।
डा. रोहित जैन
पीजी छात्र
यह सिर्फ एक हॉस्टल की समस्या नहीं है सभी छात्रावासों में यही समस्याएं हैं। भवन जर्जर होने सेे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। हॉस्टल में साफ सफाई करने वाला नहीं आता छात्रों को खुद ही करवानी पड़ती है।
डा. आशुतोष
जूडा उपाध्यक्ष
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मेडिकल कॉलेज के सीनियर हॉस्टल में लगभग 200 पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्र रहते हैं। हॉस्टल में छात्रों के लिए तीन मेस और 27 शौचालय व इतनी ही बाथरूम हैं। उचित प्रबंधन के अभाव में यहां गंदगी का अंबार लगा है और अधिकतर शौचालय और बाथरूम खराब हैं, जिससे उनका उपयोग नहीं हो पाता है। कुछ ही शौचालय चालू हैं, जिनका छात्र उपयोग करते हैं। मेस में बैठने की जगह बिजली की और साफ सफाई की व्यवस्था न होने के कारण छात्र वहां बैठकर खाना नहीं खा पाते हैं।
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शौचालयों में मकड़ी के जाले देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि महीनों से सफाई नहीं हुई है। आधे से अधिक शौचालय और बाथरूम खराब होने के कारण उपयोग में नहीं आ पाते हैं। यहां फैले कूड़े से उठती दुर्गंध अव्यवस्थाओं की कहानी बयां कर रही है। बिजली की व्यवस्था के लिए लगाई गई लाइटें भी शोपीस बनी हैं, जो न सिर्फ टूटी हैं, बल्कि उनके तार भी लटक कर दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं। पानी की समस्या से भी छात्रों को दो चार होना पड़ता है। कई दिनों तक पानी न आने से नहाने की भी समस्या उत्पन्न हो जाती है। यह सिर्फ एक ही हॉस्टल की समस्या नहीं है, बल्कि मेडिकल कॉलेज परिसर में बने लगभग सभी छात्रावासों की समस्या है।
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ये हैं परेशानियां
- सफाई न होना
- पानी की किल्लत
- मेस में बैठने की व्यवस्था न होना
- लाइटें टूटी पड़ी हैं
- जिम में रखी मशीनें खराब
- ड्रेनेज सिस्टम खराब होने से बाथरूम चोक
- हॉस्टल के आसपास गंदगी जमा होना
- खुले पड़े बिजली के उपकरण
- शौचालय और बाथरूमों में फैली गंदगी और आधे से अधिक खराब
- छतों से टपकता पानी और जर्जर भवन
- आवारा पशुओं का स्वच्छंद विचरण
इनका दावा
हॉस्टल के वार्डेन डा. सूर्य प्रकाश का कहना है कि सफाई के लिए तीन स्वीपर लगाए गए हैं। बजट के अभाव में कुछ काम नहीं हो पाते हैं। नवीनीकरण का काम चल रहा है जल्द ही समस्याएं खत्म हो जाएंगी।
शौचालयों में गंदगी जमा है और महीनों से टूटे पड़े हैं। पानी की समस्या भी रहती है जिससे नहाने को भी पानी नहीं मिल पाता है। कई बार शिकायत की लेकिन व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं हुआ। मेस में गंदगी और लाइट की व्यवस्था न होने से वहां बैठकर खाना नहीं खा पाते हैं।
डा. रोहित जैन
पीजी छात्र
यह सिर्फ एक हॉस्टल की समस्या नहीं है सभी छात्रावासों में यही समस्याएं हैं। भवन जर्जर होने सेे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। हॉस्टल में साफ सफाई करने वाला नहीं आता छात्रों को खुद ही करवानी पड़ती है।
डा. आशुतोष
जूडा उपाध्यक्ष