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झटका: सर्जरी की 50 फीसदी एमएस सीटों को मान्यता नहीं
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज को बड़ा झटका लगा है। नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) ने एमएस जनरल सर्जरी की 50 फीसदी सीटों को मान्यता देने से साफ इंकार कर दिया है। ऐसा सर्जरी विभाग के दो प्रोफेसरों के शोधपत्र कम प्रकाशित होने पर किया गया है। साथ ही आगे से इन बढ़ी सीटों पर प्रवेश भी गैर कानूनी करार दिया है।
2017-18 से पहले मेडिकल कॉलेज में एमएस सर्जरी की छह सीटें हुआ करती थीं। जिसे सरकार की अनुमति के बाद बढ़ाकर 12 कर दिया गया। जनवरी 2021 को नेशनल मेडिकल काउंसिल की टीम ने सर्जरी विभाग का निरीक्षण किया। इस दौरान शिक्षकों, परीक्षा से संबंधित मानकों का परीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की गई। टीम ने अपनी रिपोर्ट काउंसिल को सौंपी। रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया कि सर्जरी विभाग के दो प्रोफेसरों के शोध पत्र कम प्रकाशित हुए हैं। इस कारण बढ़ी हुई सीटों को मान्यता नहीं दी जा सकती है। साथ ही पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजूकेशन बोर्ड ने प्राचार्य को पत्र लिखकर कहा कि आगे से बढ़ी हुई सीटों पर कतई प्रवेश न लिए जाएं। यदि ऐसा किया जाता है तो ये गैरकानूनी होगा। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा शिक्षकों के प्रमोशन को लेकर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। बड़ा सवाल ये उठता है कि जब शोध पत्र पूरे नहीं थे, तो चिकित्सा शिक्षकों को प्रोन्नती क्यों दी गई?
चार बैच के छात्र अधर में
एमएस सर्जरी की बढ़ी हुई सीटों को मान्यता नहीं मिलने की वजह से अब चार बैच के छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है। बढ़ी हुई छह सीटों पर प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राएं अब एमएस का पंजीकरण नहीं करा सकेंगे। इससे छात्र-छात्राओं के सामने बढ़ी परेशानी खड़ी हो गई है।
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ये है नियम
पद शोध पत्र
प्रोफेसर 4
एसोसिएट प्रोफेसर 2
असिस्टेंट प्रोफेसर 1
पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजूकेशन बोर्ड का पत्र प्राप्त हो गया है। उन्होंने छह सीटों पर मान्यता नहीं देने की बात कही है। हालांकि, पुनर्विचार के लिए पत्र भेजा जा रहा है। उम्मीद है कि सभी सीटों पर अनुमति मिल जाएगी।
डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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2017-18 से पहले मेडिकल कॉलेज में एमएस सर्जरी की छह सीटें हुआ करती थीं। जिसे सरकार की अनुमति के बाद बढ़ाकर 12 कर दिया गया। जनवरी 2021 को नेशनल मेडिकल काउंसिल की टीम ने सर्जरी विभाग का निरीक्षण किया। इस दौरान शिक्षकों, परीक्षा से संबंधित मानकों का परीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की गई। टीम ने अपनी रिपोर्ट काउंसिल को सौंपी। रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया कि सर्जरी विभाग के दो प्रोफेसरों के शोध पत्र कम प्रकाशित हुए हैं। इस कारण बढ़ी हुई सीटों को मान्यता नहीं दी जा सकती है। साथ ही पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजूकेशन बोर्ड ने प्राचार्य को पत्र लिखकर कहा कि आगे से बढ़ी हुई सीटों पर कतई प्रवेश न लिए जाएं। यदि ऐसा किया जाता है तो ये गैरकानूनी होगा। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा शिक्षकों के प्रमोशन को लेकर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। बड़ा सवाल ये उठता है कि जब शोध पत्र पूरे नहीं थे, तो चिकित्सा शिक्षकों को प्रोन्नती क्यों दी गई?
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चार बैच के छात्र अधर में
एमएस सर्जरी की बढ़ी हुई सीटों को मान्यता नहीं मिलने की वजह से अब चार बैच के छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है। बढ़ी हुई छह सीटों पर प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राएं अब एमएस का पंजीकरण नहीं करा सकेंगे। इससे छात्र-छात्राओं के सामने बढ़ी परेशानी खड़ी हो गई है।
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प्रोफेसर 4
एसोसिएट प्रोफेसर 2
असिस्टेंट प्रोफेसर 1
पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजूकेशन बोर्ड का पत्र प्राप्त हो गया है। उन्होंने छह सीटों पर मान्यता नहीं देने की बात कही है। हालांकि, पुनर्विचार के लिए पत्र भेजा जा रहा है। उम्मीद है कि सभी सीटों पर अनुमति मिल जाएगी।
डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।