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मच्छर, मक्खी से बचाव वाली किट पहनकर कोरोना से लड़ेंगे डॉक्टर
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sefty kit corona afraid
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों को उपलब्ध कराई गई पीपीई किट विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों पर खरा नहीं उतर रही है। यह लेवल-1 की किट है, जबकि लेवल-4 की पीपीई किट उपलब्ध कराई जानी चाहिए। लेवल-1 की किट में पानी अंदर प्रवेश कर जा रहा है। ऐसे में यदि किसी कोरोना वायरस से पीड़ित मरीज का सैंपल डॉक्टर लेने जाते हैं और उसके छींकने, खांसने पर संक्रमण फैलने का डर है। इस पर डॉक्टरों, टेक्नीशियनों ने इलाज करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती निमोनिया पीड़ित मरीज को कोरोना वायरस से संक्रमित होने की आशंका थी। डॉक्टरों ने लेवल-1 की पीपीई किट पहनकर डरते-डरते मरीज का सैंपल लिया। रिपोर्ट में कोरोना वायरस की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन डॉक्टरों, टेक्नीशियनों ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य से कोरोना से संक्रमित मरीज मिलने पर इलाज करने से इंकार कर दिया है। सूत्रों ने बताया कि पीपीई किट की गुणवत्ता ठीक नहीं हुई। लेवल-1 की किट होने की वजह से इसमें पानी अथवा खांसने, छींकने पर मुंह से निकलने वाला द्रव्य अंदर प्रवेश कर कपड़ों में पहुंच जा रहा है। जबकि, लेवल-4 में ऐसा बिल्कुल नहीं हो पाता है।
ये है अंतर
लेवल-4 वाली पीपीई किट में छोटे से छोटे वायरस, बैक्टीरिया तक अंदर प्रवेश नहीं कर पाते हैं। ऐसे में किसी भी संक्रमित मरीज का इलाज करने के दौरान डॉक्टरों में वायरस फैलने की संभावना नहीं रहती है। एम्स, सफदरजंग जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में लेवल-4 की पीपीई किट डॉक्टरों को दी जा रही है।
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प्रमुख सचिव ने दिया आश्वासन
मेडिकल कॉलेज में रविवार को निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव अमित मोहन ने निरीक्षण के दौरान डॉक्टरों से बातचीत में कहा कि एम्स और सफदरजंग में पता कर लें कि वहां डॉक्टर कौन सी पीपीई किट का उपयोग कर रहे हैं। जो किट वहां दी जा रही है, वही झांसी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को दी जाएगी।
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मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती निमोनिया पीड़ित मरीज को कोरोना वायरस से संक्रमित होने की आशंका थी। डॉक्टरों ने लेवल-1 की पीपीई किट पहनकर डरते-डरते मरीज का सैंपल लिया। रिपोर्ट में कोरोना वायरस की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन डॉक्टरों, टेक्नीशियनों ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य से कोरोना से संक्रमित मरीज मिलने पर इलाज करने से इंकार कर दिया है। सूत्रों ने बताया कि पीपीई किट की गुणवत्ता ठीक नहीं हुई। लेवल-1 की किट होने की वजह से इसमें पानी अथवा खांसने, छींकने पर मुंह से निकलने वाला द्रव्य अंदर प्रवेश कर कपड़ों में पहुंच जा रहा है। जबकि, लेवल-4 में ऐसा बिल्कुल नहीं हो पाता है।
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ये है अंतर
लेवल-4 वाली पीपीई किट में छोटे से छोटे वायरस, बैक्टीरिया तक अंदर प्रवेश नहीं कर पाते हैं। ऐसे में किसी भी संक्रमित मरीज का इलाज करने के दौरान डॉक्टरों में वायरस फैलने की संभावना नहीं रहती है। एम्स, सफदरजंग जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में लेवल-4 की पीपीई किट डॉक्टरों को दी जा रही है।
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प्रमुख सचिव ने दिया आश्वासन
मेडिकल कॉलेज में रविवार को निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव अमित मोहन ने निरीक्षण के दौरान डॉक्टरों से बातचीत में कहा कि एम्स और सफदरजंग में पता कर लें कि वहां डॉक्टर कौन सी पीपीई किट का उपयोग कर रहे हैं। जो किट वहां दी जा रही है, वही झांसी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को दी जाएगी।