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धारा 60 ही क्यों , 272 क्यों नहीं
ब्यूरो
Updated Thu, 04 Feb 2016 12:09 AM IST
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झांसी। आबकारी अधिनियम की धारा 60 शराब के अवैध कारोबारियों के लिए अभयदान से कम नहीं है। इस धारा में मामला दर्ज होने पर आरोपियों को थाने से ही जमानत मिल जाती है। जबकि, ऐसे मामलों में आईपीसी की धारा 272 का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें सजा के कड़े प्रावधान हैं। बावजूद, यह नहीं लगाई जाती है, जिससे अवैध शराब का कारोबार जमकर फलफूल रहा है।
आबकारी विभाग द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में अब तक जिले में अवैध शराब के कारोबार में लिप्त 1,620 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। बावजूद, शराब का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है। जगह-जगह खुलेआम कच्ची शराब की बिक्री हो रही है और इसे बनाने के लिए भट्टियां भी खूब धधक रही हैं।
वहीं, लाइसेंसी मदिरा भी व्यापक पैमाने पर मिलावट की चपेट में है। पिछले माह नगर में दो करोड़ से अधिक रुपये की मिलावटी शराब पकड़ी गई थी। जबकि, इससे पूर्व चिरगांव में भी इसी तरह का मामला पकड़ा गया था। यह कारोबार जिले में अब भी खूब फलफूल रहा है। इसकी मुख्य वजह आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली बनी हुई है।
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इक्का-दुक्का मामलों को छोड़ बाकी सभी में अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है। इसमें से ज्यादातर आरोपियों को थाने से ही मुचलके पर छोड़ दिया जाता है। बाहर निकल कर एक बार फिर वह अपने काम को अंजाम देने में जुट जाते हैं।
जबकि, शराब में खतरनाक अपमिश्रण पाए जाने पर आईपीसी की धारा 272 का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। इस धारा के तहत मिलावट को संज्ञेय व अजमानतीय अपराधों में रखा गया है। इसका विचारण सत्र न्यायालय में ही किया जा सकता है। लेकिन, यह धारा शराब के अवैध कारोबारियों पर नहीं लगाई जाती। आबकारी विभाग इससे बचता है, जिससे अवैध शराब के कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।
लाइसेंसी दुकानों पर खूब बिक रही मिलावटी शराब
झांसी। लाइसेंसी दुकानों पर मिलावटी शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी है, परंतु दुकानों की जांच की जहमत नहीं उठाई जाती। सात जनवरी को खुशीपुरा में नकली अंग्रेजी शराब का जखीरा पकड़े जाने के बाद मजबूरी में आबकारी विभाग ने कुछ दुकानों की जांच की थी, जिनमें दो दुकानों पर मिलावटी शराब की बोतल पकड़ी भी गई थीं। लेकिन उसके बाद एक भी दुकान पर छापामारी नहीं की गई और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
नकली के साथ ओवररेटिंग की भी मार
झांसी। शराब के शौकीनों पर मिलावट के साथ-साथ ओवररेटिंग की भी दोहरी मार पड़ रही है। खासतौर पर ज्यादा बिकने वाले ब्रांड रॉयल चैलेंज, ब्लेंडर प्राइड, रॉयल स्टेग की बोतल पर बीस रुपये तक अधिक वसूल किए जा रहे हैं। इसी तरह क्वार्टर पर भी दस रुपये तक अधिक वसूले जा रहे हैं। वहीं, बीयर की प्रति बोतल /केन पर बीस रुपये तक की ओवररेटिंग हो रही है।
सबको पता है, सबको खबर है, पर इच्छाशक्ति का है अभाव
झांसी। चाहे असली दुकानों पर नकली, मिलावटी और सीमावर्ती प्रांतों की शराब बिकने का मामला हो, चाहे सड़क के किनारे लहंगा और गुलाबो नाम से बिकने का, ऐसा नहीं नीचे से लेकर ऊपर तक के पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों तक को पता नहीं, या दिखता नहीं। लेकिन बदस्तूर यह गोरखधंधा जारी है।
हैरत की बात तो यह है कि पिछले दिनों एक आला अधिकारी की समीक्षा बैठक में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इसके लिए जिम्मेदार विभाग की कार्य प्रणाली और कर्णधारों की इच्छाशक्ति पर सवालिया निशान उठाते हुए यहां तक कह दिया था कि यह गोरखधंधा तो जरा सी कड़ाई पर रुक सकता है, बशर्ते वह रोकना चाहे, आधे मिनट के सन्नाटे के बाद बैठक में विषय को ही बदल दिया गया।
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आबकारी विभाग द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में अब तक जिले में अवैध शराब के कारोबार में लिप्त 1,620 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। बावजूद, शराब का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है। जगह-जगह खुलेआम कच्ची शराब की बिक्री हो रही है और इसे बनाने के लिए भट्टियां भी खूब धधक रही हैं।
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वहीं, लाइसेंसी मदिरा भी व्यापक पैमाने पर मिलावट की चपेट में है। पिछले माह नगर में दो करोड़ से अधिक रुपये की मिलावटी शराब पकड़ी गई थी। जबकि, इससे पूर्व चिरगांव में भी इसी तरह का मामला पकड़ा गया था। यह कारोबार जिले में अब भी खूब फलफूल रहा है। इसकी मुख्य वजह आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली बनी हुई है।
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इक्का-दुक्का मामलों को छोड़ बाकी सभी में अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है। इसमें से ज्यादातर आरोपियों को थाने से ही मुचलके पर छोड़ दिया जाता है। बाहर निकल कर एक बार फिर वह अपने काम को अंजाम देने में जुट जाते हैं।
जबकि, शराब में खतरनाक अपमिश्रण पाए जाने पर आईपीसी की धारा 272 का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। इस धारा के तहत मिलावट को संज्ञेय व अजमानतीय अपराधों में रखा गया है। इसका विचारण सत्र न्यायालय में ही किया जा सकता है। लेकिन, यह धारा शराब के अवैध कारोबारियों पर नहीं लगाई जाती। आबकारी विभाग इससे बचता है, जिससे अवैध शराब के कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।
लाइसेंसी दुकानों पर खूब बिक रही मिलावटी शराब
झांसी। लाइसेंसी दुकानों पर मिलावटी शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी है, परंतु दुकानों की जांच की जहमत नहीं उठाई जाती। सात जनवरी को खुशीपुरा में नकली अंग्रेजी शराब का जखीरा पकड़े जाने के बाद मजबूरी में आबकारी विभाग ने कुछ दुकानों की जांच की थी, जिनमें दो दुकानों पर मिलावटी शराब की बोतल पकड़ी भी गई थीं। लेकिन उसके बाद एक भी दुकान पर छापामारी नहीं की गई और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
नकली के साथ ओवररेटिंग की भी मार
झांसी। शराब के शौकीनों पर मिलावट के साथ-साथ ओवररेटिंग की भी दोहरी मार पड़ रही है। खासतौर पर ज्यादा बिकने वाले ब्रांड रॉयल चैलेंज, ब्लेंडर प्राइड, रॉयल स्टेग की बोतल पर बीस रुपये तक अधिक वसूल किए जा रहे हैं। इसी तरह क्वार्टर पर भी दस रुपये तक अधिक वसूले जा रहे हैं। वहीं, बीयर की प्रति बोतल /केन पर बीस रुपये तक की ओवररेटिंग हो रही है।
सबको पता है, सबको खबर है, पर इच्छाशक्ति का है अभाव
झांसी। चाहे असली दुकानों पर नकली, मिलावटी और सीमावर्ती प्रांतों की शराब बिकने का मामला हो, चाहे सड़क के किनारे लहंगा और गुलाबो नाम से बिकने का, ऐसा नहीं नीचे से लेकर ऊपर तक के पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों तक को पता नहीं, या दिखता नहीं। लेकिन बदस्तूर यह गोरखधंधा जारी है।
हैरत की बात तो यह है कि पिछले दिनों एक आला अधिकारी की समीक्षा बैठक में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इसके लिए जिम्मेदार विभाग की कार्य प्रणाली और कर्णधारों की इच्छाशक्ति पर सवालिया निशान उठाते हुए यहां तक कह दिया था कि यह गोरखधंधा तो जरा सी कड़ाई पर रुक सकता है, बशर्ते वह रोकना चाहे, आधे मिनट के सन्नाटे के बाद बैठक में विषय को ही बदल दिया गया।