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मथनपुरा का स्कूल.. जहां पथते हैं कंडे, बंधती हैं भैंस...इन सबके बीच पढ़ते हैं बच्चे भी
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झांसी। ब्लाक बड़ा गांव। ग्राम पंचायत पहलगुआं का मजरा है मथनपुरा। इस गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में अगर आप जाएंगे तो प्रवेश द्वार के पास ही गोबर का ढेर मिलेगा। जगह जगह उपले पथ रहे हैं। इतना ही नहीं स्कूल परिसर में भैंस भी चरती दिख जाएंगी। लेकिन मजे की बात देखिए कि स्कूल का निरीक्षण करने जाने वाले अफसरों को शायद यह सब नहीं दिखता है। अगर दिखता होता तो स्कूल की सफाई हो गई होती। स्कूल के चार कमरों में बच्चे पढ़ते हैं। हर क्लास रूम में गोबर की दुर्गंध रहती है।
बुधवार को अमर उजाला की टीम भी इस स्कूल में पहुंची। जब हम परिसर में पहुंचे तो लग ही नहीं रहा था कि यह स्कूल है। जगह जगह उपले पथे थे। भैंसें चर रहीं थीं। परिसर में गंदा पानी भरा था। इन गड्ढों में भैंस नहा रही थीं। शिक्षा विभाग के अधिकारी यूं तो दावा करते हैं कि परिषदीय स्कूलों को पब्लिक स्कूलों की तरह तैयार किया जा रहा है वहीं स्कूल की ऐसी तस्वीर यह बताने के लिए काफी है कि इन स्कूलों पर कितना ध्यान दिया जा रहा है। चार कमरों के इस स्कूल में 88 बच्चे पंजीकृत हैं और शिक्षक चार हैं। जब इंचार्ज प्रधानाचार्य रीता सोलंकी से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि गांववालों की कई बार मिलकर यह सब हटाने के लिए कहा जा चुका है लेकिन कोई तैयार ही नहीं होता। कहने लगते हैं कि जब बाउंड्री बन जाएगी तब अपने कंडे और गोबर के ढेर को हटा लेंगे।
अभी तक इस तरह का प्रकरण पता नहीं था, जिस भी स्कूल में ऐसा है, ग्रामप्रधान से बात करके स्कूल परिसर साफ करवाया जाएगा। - बीएसए, वेदराम
गांववालों को कई बार स्कूल परिसर से ये सब हटाने के लिए कहा गया है, लेकिन गांववाले नहीं मानते। एक महीने के अंदर बाउंड्री और गेट लग जाएगा तो यह सब बंद हो जाएगा। - सतीश गौतम, ग्राम प्रधान
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मल्टीपल हैंडवाश भी तोड़ा
शिक्षक रेनू चौरसिया ने बताया कि स्कूल में कायाकल्प योजना के तहत मल्टीपल हैंडवॉश बनावाया गया था। जिसे भी कुछ लोगों ने तोड़ गिया
पानी की पाइप लाइन तक तोड़ दी
शिक्षक जितेंद्र शुक्ला ने बताया कि स्कूल में शौचालय में रनिंग वाटर के लिए पाइप लाइन लगाई गई थी, जिसको गांववाले निकाल कर ही ले गए।
खेल के मैदान में फैले पड़े पत्थर
विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के खेलने के लिए मैदान तो बहुत बड़ा है। लेकिन मैदान बच्चों के खेलने लायक ही नहीं है। मैदान में बड़े-बड़े पत्थर पड़े हैं, परिसर में कूड़ा-कचरा भी फैला पड़ा है।
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बुधवार को अमर उजाला की टीम भी इस स्कूल में पहुंची। जब हम परिसर में पहुंचे तो लग ही नहीं रहा था कि यह स्कूल है। जगह जगह उपले पथे थे। भैंसें चर रहीं थीं। परिसर में गंदा पानी भरा था। इन गड्ढों में भैंस नहा रही थीं। शिक्षा विभाग के अधिकारी यूं तो दावा करते हैं कि परिषदीय स्कूलों को पब्लिक स्कूलों की तरह तैयार किया जा रहा है वहीं स्कूल की ऐसी तस्वीर यह बताने के लिए काफी है कि इन स्कूलों पर कितना ध्यान दिया जा रहा है। चार कमरों के इस स्कूल में 88 बच्चे पंजीकृत हैं और शिक्षक चार हैं। जब इंचार्ज प्रधानाचार्य रीता सोलंकी से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि गांववालों की कई बार मिलकर यह सब हटाने के लिए कहा जा चुका है लेकिन कोई तैयार ही नहीं होता। कहने लगते हैं कि जब बाउंड्री बन जाएगी तब अपने कंडे और गोबर के ढेर को हटा लेंगे।
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अभी तक इस तरह का प्रकरण पता नहीं था, जिस भी स्कूल में ऐसा है, ग्रामप्रधान से बात करके स्कूल परिसर साफ करवाया जाएगा। - बीएसए, वेदराम
गांववालों को कई बार स्कूल परिसर से ये सब हटाने के लिए कहा गया है, लेकिन गांववाले नहीं मानते। एक महीने के अंदर बाउंड्री और गेट लग जाएगा तो यह सब बंद हो जाएगा। - सतीश गौतम, ग्राम प्रधान
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मल्टीपल हैंडवाश भी तोड़ा
शिक्षक रेनू चौरसिया ने बताया कि स्कूल में कायाकल्प योजना के तहत मल्टीपल हैंडवॉश बनावाया गया था। जिसे भी कुछ लोगों ने तोड़ गिया
पानी की पाइप लाइन तक तोड़ दी
शिक्षक जितेंद्र शुक्ला ने बताया कि स्कूल में शौचालय में रनिंग वाटर के लिए पाइप लाइन लगाई गई थी, जिसको गांववाले निकाल कर ही ले गए।
खेल के मैदान में फैले पड़े पत्थर
विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के खेलने के लिए मैदान तो बहुत बड़ा है। लेकिन मैदान बच्चों के खेलने लायक ही नहीं है। मैदान में बड़े-बड़े पत्थर पड़े हैं, परिसर में कूड़ा-कचरा भी फैला पड़ा है।