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स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसने की तैयारी
amarujala
Updated Sun, 22 Apr 2018 01:57 AM IST
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school, jhasni news
- फोटो : demo
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निजी स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसने की तैयारी कर ली गई है। इसके लिए शासन के निर्देश पर मंडल स्तर पर शुल्क नियामक समिति का गठन किया जा रहा है। समिति की अध्यक्ष मंडलायुक्त होंगी और सचिव का पदभार संयुक्त शिक्षा निदेशक संभालेंगे। समिति अभिभावकों की ओर से आने वाले फीस संबंधी शिकायतों का निस्तारण करेगी।
ज्यादातर निजी स्कूलों में मनमाने ढंग से फीस वसूली जा रही है। हर साल फीस में बढ़ोत्तरी कर दी जाती है। यहां तक कि कई स्कूलों में तो हर साल एडमिशन फीस तक ली जाती है। इस पर अंकुश लगाने के लिए शासन के निर्देश पर मंडल स्तर पर शुल्क नियामक समिति गठित की जा रही है। समिति में मंडलायुक्त और संयुक्त शिक्षा निदेशक अध्यक्ष और सचिव की भूमिका में होंगे। जबकि, मंडलायुक्त की ओर से नामित चार्टर्ड अकाउंटेंट, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता स्तर के अभियंता, राज्य वित्त एवं लेखा सेवा के वरिष्ठ अधिकारी, मंडलायुक्त द्वारा नामित किसी विद्यालय के अभिभावक शिक्षक एसोसिएशन के प्रतिनिधि तथा किसी वित्त पोषित विद्यालय के प्रधानाचार्य को बतौर सदस्य समिति में शामिल किया जाएगा। मंडल में समिति का गठन 30 अप्रैल तक किया जाना है।
सुनवाई न होने पर समिति से शिकायत
स्कूल की फीस के संबंध में अभिभावक को सबसे पहले शिकायत विद्यालय के प्रधानाचार्य को करनी होगी। प्रधानाचार्य द्वारा पंद्रह दिन के भीतर शिकायत का निस्तारण न किए जाने पर शिकायत विद्यालय के प्रबंधन से करनी होगी। प्रबंधन यदि पंद्रह दिन में शिकायत निस्तारित नहीं करता है, तो फिर शिकायत शुल्क नियामक समिति के पास आएगी। समिति की शिकायत की जांच कर कार्रवाई करेगी।
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स्कूलों से मांगा फीस का ब्योरा
जिले के सभी निजी स्कूलों से फीस का ब्योरा मांगा गया है। जिला विद्यालय निरीक्षक डा. नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि शुल्क नियामक समिति के काम शुरू करने से पहले सभी विद्यालयों की कक्षाबार फीस का ब्योरा लिया जा रहा है। यह ब्योरा स्कूलों को शिक्षा विभाग में उपलब्ध कराना होगा।
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ज्यादातर निजी स्कूलों में मनमाने ढंग से फीस वसूली जा रही है। हर साल फीस में बढ़ोत्तरी कर दी जाती है। यहां तक कि कई स्कूलों में तो हर साल एडमिशन फीस तक ली जाती है। इस पर अंकुश लगाने के लिए शासन के निर्देश पर मंडल स्तर पर शुल्क नियामक समिति गठित की जा रही है। समिति में मंडलायुक्त और संयुक्त शिक्षा निदेशक अध्यक्ष और सचिव की भूमिका में होंगे। जबकि, मंडलायुक्त की ओर से नामित चार्टर्ड अकाउंटेंट, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता स्तर के अभियंता, राज्य वित्त एवं लेखा सेवा के वरिष्ठ अधिकारी, मंडलायुक्त द्वारा नामित किसी विद्यालय के अभिभावक शिक्षक एसोसिएशन के प्रतिनिधि तथा किसी वित्त पोषित विद्यालय के प्रधानाचार्य को बतौर सदस्य समिति में शामिल किया जाएगा। मंडल में समिति का गठन 30 अप्रैल तक किया जाना है।
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सुनवाई न होने पर समिति से शिकायत
स्कूल की फीस के संबंध में अभिभावक को सबसे पहले शिकायत विद्यालय के प्रधानाचार्य को करनी होगी। प्रधानाचार्य द्वारा पंद्रह दिन के भीतर शिकायत का निस्तारण न किए जाने पर शिकायत विद्यालय के प्रबंधन से करनी होगी। प्रबंधन यदि पंद्रह दिन में शिकायत निस्तारित नहीं करता है, तो फिर शिकायत शुल्क नियामक समिति के पास आएगी। समिति की शिकायत की जांच कर कार्रवाई करेगी।
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स्कूलों से मांगा फीस का ब्योरा
जिले के सभी निजी स्कूलों से फीस का ब्योरा मांगा गया है। जिला विद्यालय निरीक्षक डा. नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि शुल्क नियामक समिति के काम शुरू करने से पहले सभी विद्यालयों की कक्षाबार फीस का ब्योरा लिया जा रहा है। यह ब्योरा स्कूलों को शिक्षा विभाग में उपलब्ध कराना होगा।