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घोटाला खुलने पर पंचायतों का भुगतान से इंकार
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scam in covid 19 fund
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झांसी। कोविड-19 किट की खरीद में लाखों रुपये का घपला सामने आने के बाद ग्राम पंचायतों ने भुगतान करने से हाथ खड़े कर दिए। अधिकांश पंचायतों ने इस कोविड किट के लिए भुगतान करने से मना कर दिया है। उधर, इस पूरी खरीद के पीछे एक बड़े नाम के सामने आने से अब अफसरों ने जांच के बजाए लीपापोती शुरू कर दी।
कोविड की रोकथाम के लिए सरकार ने ग्राम पंचायत स्तर पर कोविड किट की खरीदारी के निर्देश दिए थे। इस किट में थर्मल स्कैनर, ऑक्सीमीटर, एन-95 मास्क, ग्लव्स, सैनिटाइजर आदि शामिल था। झांसी की सभी 496 ग्राम पंचायतों को अपने स्तर पर यह खरीदारी करनी थी लेकिन, बिचौलियों ने आपदा में अवसर तलाश लिए। ग्राम पंचायतों के बजाए बड़े नाम की शह पर इनकी केंद्रीय खरीद की कोशिश शुरू हुई हालांकि पेंच फंस जाने से ब्लॉक स्तर पर खरीद हुई। एक ग्राम पंचायत के लिए 15-16 हजार रुपये के उपकरण खरीदे गए। जिन उपकरणों को खरीदा गया उनके मनमाने रेट लगाए गए। सामान्य बाजार में थर्मल स्कैनर की कीमत करीब 1500-2000 के बीच है लेकिन, उसे 4500-5000 में खरीदा गया। वह भी चाइनीज स्कैनर।
इसी तरह ऑक्सीमीटर भी ढाई गुना अधिक कीमत पर खरीदे गए। एन-95 मास्क की सामान्य कीमत करीब 200-250 है लेकिन पंचायतों के लिए इसे 750 रुपये में खरीदा गया। इस तरह करीब 75 लाख रुपये की खरीद हुई। समाचार पत्रों में इस गड़बड़ी का खुलासा होने पर हंगामा मच गया। इस तरह की खरीद को लेकर तमाम ग्राम प्रधान पहले से विरोध में थे लेकिन, मामले के खुलासे के बाद ज्यादातर पंचायतों ने भुगतान से ही इंकार कर दिया। उधर, शुरू में अफसरों ने मामले की जांच कराने के तमाम दावे किए लेकिन, जैसे ही खरीद के पीछे बड़ा नाम सामने आया इन अफसरों ने चुप्पी साध लेने में अब बेहतरी समझ रहे हैं। खुलासे के दो दिन बाद भी जांच की दिशा में कोई कदम आगे नहीं बढ़ सका है।
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जीएसटी में भी पंजीकृत नहीं फर्म!
जिन एजेंसियों ने मेडिकल किट की आपूर्ति की उनमें एक को छोड़कर किसी के पास जीएसटी रजिस्ट्रेशन तक नहीं है। जानकारों के मुताबिक अगर इसी की जांच कर ली जाए तब बाकी एजेंसियों का फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है लेकिन, अफसर इसकी जांच करने को भी राजी नहीं हैं।
कोविड रोकथाम के कार्यों में ही अत्याधिक व्यस्तता है इस वजह से जांच अभी आगे नहीं बढ़ी है। बिल की कॉपी भी नहीं मिल पा रही। जब बिल की कॉपी मिल जाएगी तब उसका मिलान कराया जाएगा। समय मिलने पर डीपीआरओ से पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी।
शैलेष राय, सीडीओ
मुझे समाचार पत्रों के माध्यम से मालूम चला लेकिन, आगे क्या कार्रवाई हो रही इसके बारे में मुझे नहीं पता। इस मामले में मैं कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
संजय बरनवाल, उपनिदेशक पंचायत, झांसी मंडल
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कोविड की रोकथाम के लिए सरकार ने ग्राम पंचायत स्तर पर कोविड किट की खरीदारी के निर्देश दिए थे। इस किट में थर्मल स्कैनर, ऑक्सीमीटर, एन-95 मास्क, ग्लव्स, सैनिटाइजर आदि शामिल था। झांसी की सभी 496 ग्राम पंचायतों को अपने स्तर पर यह खरीदारी करनी थी लेकिन, बिचौलियों ने आपदा में अवसर तलाश लिए। ग्राम पंचायतों के बजाए बड़े नाम की शह पर इनकी केंद्रीय खरीद की कोशिश शुरू हुई हालांकि पेंच फंस जाने से ब्लॉक स्तर पर खरीद हुई। एक ग्राम पंचायत के लिए 15-16 हजार रुपये के उपकरण खरीदे गए। जिन उपकरणों को खरीदा गया उनके मनमाने रेट लगाए गए। सामान्य बाजार में थर्मल स्कैनर की कीमत करीब 1500-2000 के बीच है लेकिन, उसे 4500-5000 में खरीदा गया। वह भी चाइनीज स्कैनर।
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इसी तरह ऑक्सीमीटर भी ढाई गुना अधिक कीमत पर खरीदे गए। एन-95 मास्क की सामान्य कीमत करीब 200-250 है लेकिन पंचायतों के लिए इसे 750 रुपये में खरीदा गया। इस तरह करीब 75 लाख रुपये की खरीद हुई। समाचार पत्रों में इस गड़बड़ी का खुलासा होने पर हंगामा मच गया। इस तरह की खरीद को लेकर तमाम ग्राम प्रधान पहले से विरोध में थे लेकिन, मामले के खुलासे के बाद ज्यादातर पंचायतों ने भुगतान से ही इंकार कर दिया। उधर, शुरू में अफसरों ने मामले की जांच कराने के तमाम दावे किए लेकिन, जैसे ही खरीद के पीछे बड़ा नाम सामने आया इन अफसरों ने चुप्पी साध लेने में अब बेहतरी समझ रहे हैं। खुलासे के दो दिन बाद भी जांच की दिशा में कोई कदम आगे नहीं बढ़ सका है।
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जिन एजेंसियों ने मेडिकल किट की आपूर्ति की उनमें एक को छोड़कर किसी के पास जीएसटी रजिस्ट्रेशन तक नहीं है। जानकारों के मुताबिक अगर इसी की जांच कर ली जाए तब बाकी एजेंसियों का फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है लेकिन, अफसर इसकी जांच करने को भी राजी नहीं हैं।
कोविड रोकथाम के कार्यों में ही अत्याधिक व्यस्तता है इस वजह से जांच अभी आगे नहीं बढ़ी है। बिल की कॉपी भी नहीं मिल पा रही। जब बिल की कॉपी मिल जाएगी तब उसका मिलान कराया जाएगा। समय मिलने पर डीपीआरओ से पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी।
शैलेष राय, सीडीओ
मुझे समाचार पत्रों के माध्यम से मालूम चला लेकिन, आगे क्या कार्रवाई हो रही इसके बारे में मुझे नहीं पता। इस मामले में मैं कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
संजय बरनवाल, उपनिदेशक पंचायत, झांसी मंडल