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जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव से पहले सपा को झटका, प्रबल दावेदार का ही इंकार
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झांसी। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर अपना कब्जा कायम रखने की तैयारी में जुटी समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। सपा की ओर से प्रबल दावेदार माने जा रहे चुरारा से जिला पंचायत सदस्य हेमंत सेठ ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस चुनाव में किस्मत आजमाने नहीं जा रहे हैं। बल्कि, उनका फोकस अगले साल होने पर विधानसभा के चुनाव पर है। ऐसे में सपा में पसोपेश की स्थिति पैदा हो गई है।
जिला पंचायत के पिछले सदन में समाजवादी पार्टी के पास 24 में से 16 सदस्यों की ताकत थी। जबकि, भाजपा और बसपा के महज चार-चार ही सदस्य चुनकर जिला पंचायत में पहुंचे थे। सदन में पूर्ण बहुमत होने पर सपा ने आसानी से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हथिया ली थी। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद बुंदेलखंड की सभी जिला पंचायतों के अध्यक्ष बदल गए थे, लेकिन झांसी सीट इसमें अपवाद बनी रही थी। यहां पूरे पांच साल तक जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी सपा के खाते में बनी रही। हालांकि, इस बार हुए चुनाव में सपा को करारा झटका लगा। पार्टी के सिर्फ पांच अधिकृत प्रत्याशी ही चुनकर जिला पंचायत के सदन में पहुंचे हैं। बावजूद, सपा ने चुनाव निपटते ही अध्यक्ष पद की तैयारी शुरू कर दी थी। पार्टी का दावा था कि बसपा, कांग्रेस और निर्दलियों के बूते वो अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बना ले जाएगी। अनुसूचित जाति के लिए सीट आरक्षित होने की वजह से शुरुआत से ही माना जा रहा था कि सपा मऊरानीपुर की पूर्व विधायक डा. रश्मि आर्य के देवर चुरारा सीट से जिला पंचायत सदस्य हेमंत सेठ पर दाव लगाएगी। जिला इकाई ने प्रदेशीय नेतृत्व को ये संदेश पहुंचा दिया था। लेकिन, अब हेमंत सेठ ने स्पष्ट कर दिया है कि वे जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव नहीं लड़ने जा रहे हैं। उनका पूरा फोकस अगले साल होने वाले विधानसभा के चुनाव पर है, जिसमें मऊरानीपुर सीट से उनकी भाभी रश्मि आर्या चुनाव लड़ने जा रही हैं। ऐसे में अब सपा ने नए सिरे से प्रत्याशी की तलाश शुरू कर दी है।
सपा जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव पूरे दमखम के साथ लड़ेगी। आवश्यकता पड़ने पर किसी निर्दलीय पर भी दांव लगाने से पार्टी पीछे नहीं हटेगी। जीत के लिए जरूरी बहुमत हमने जुटा लिया है। अन्य दलों के व निर्दलीय भी हमारे संपर्क में हैं।
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- महेश कश्यप, जिलाध्यक्ष - सपा
14 सदस्यों का साथ मिलने का भाजपा का दावा
झांसी। अनुकूल परिस्थितियां होने के बाद भी भाजपा जिला पंचायत के चुनाव में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। उसके सिर्फ नौ सदस्य ही जिला पंचायत के सदन में पहुंचे हैं। जबकि, अध्यक्ष बनाने के लिए 24 सदस्यों वाले जिला पंचायत में 13 सदस्यों का समर्थन हासिल होना जरूरी है। सदन में पूर्ण बहुमत न होने की वजह से भाजपा के लिए भी अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बना पाना आसान नहीं है। लेकिन, इस बार भाजपा कोई भी मौका हाथ से गंवाना नहीं चाहती। यही वजह से है कि प्रदेशीय नेतृत्व खुद इस चुनाव पर नजर जमाए हुए है। भाजपा की एक अघोषित टीम हवा का रुख अपनी ओर मोड़ने में जुटी हुई है। चुनाव में किसी तरह की अड़चन पैदा न हो, इसके 14 जिला पंचायत सदस्यों के प्रमाण पत्र इकट्ठा कर लिए गए हैं। निर्दलीय छह सदस्यों को भाजपा अपना मान कर चल रही है।
भाजपा को चौदह सदस्यों का समर्थन हासिल हो चुका है। इसके अलावा भी कई सदस्य हमारे संपर्क में हैं। ऐसे में भाजपा आसानी से अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बना लेगी। जबकि, दूसरे दलों के पास प्रत्याशी भी नहीं हैं। भाजपा जल्द प्रत्याशी घोषित कर देगी।
- मुकेश मिश्रा, महानगर अध्यक्ष - भाजपा
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जिला पंचायत के पिछले सदन में समाजवादी पार्टी के पास 24 में से 16 सदस्यों की ताकत थी। जबकि, भाजपा और बसपा के महज चार-चार ही सदस्य चुनकर जिला पंचायत में पहुंचे थे। सदन में पूर्ण बहुमत होने पर सपा ने आसानी से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हथिया ली थी। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद बुंदेलखंड की सभी जिला पंचायतों के अध्यक्ष बदल गए थे, लेकिन झांसी सीट इसमें अपवाद बनी रही थी। यहां पूरे पांच साल तक जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी सपा के खाते में बनी रही। हालांकि, इस बार हुए चुनाव में सपा को करारा झटका लगा। पार्टी के सिर्फ पांच अधिकृत प्रत्याशी ही चुनकर जिला पंचायत के सदन में पहुंचे हैं। बावजूद, सपा ने चुनाव निपटते ही अध्यक्ष पद की तैयारी शुरू कर दी थी। पार्टी का दावा था कि बसपा, कांग्रेस और निर्दलियों के बूते वो अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बना ले जाएगी। अनुसूचित जाति के लिए सीट आरक्षित होने की वजह से शुरुआत से ही माना जा रहा था कि सपा मऊरानीपुर की पूर्व विधायक डा. रश्मि आर्य के देवर चुरारा सीट से जिला पंचायत सदस्य हेमंत सेठ पर दाव लगाएगी। जिला इकाई ने प्रदेशीय नेतृत्व को ये संदेश पहुंचा दिया था। लेकिन, अब हेमंत सेठ ने स्पष्ट कर दिया है कि वे जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव नहीं लड़ने जा रहे हैं। उनका पूरा फोकस अगले साल होने वाले विधानसभा के चुनाव पर है, जिसमें मऊरानीपुर सीट से उनकी भाभी रश्मि आर्या चुनाव लड़ने जा रही हैं। ऐसे में अब सपा ने नए सिरे से प्रत्याशी की तलाश शुरू कर दी है।
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सपा जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव पूरे दमखम के साथ लड़ेगी। आवश्यकता पड़ने पर किसी निर्दलीय पर भी दांव लगाने से पार्टी पीछे नहीं हटेगी। जीत के लिए जरूरी बहुमत हमने जुटा लिया है। अन्य दलों के व निर्दलीय भी हमारे संपर्क में हैं।
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- महेश कश्यप, जिलाध्यक्ष - सपा
14 सदस्यों का साथ मिलने का भाजपा का दावा
झांसी। अनुकूल परिस्थितियां होने के बाद भी भाजपा जिला पंचायत के चुनाव में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। उसके सिर्फ नौ सदस्य ही जिला पंचायत के सदन में पहुंचे हैं। जबकि, अध्यक्ष बनाने के लिए 24 सदस्यों वाले जिला पंचायत में 13 सदस्यों का समर्थन हासिल होना जरूरी है। सदन में पूर्ण बहुमत न होने की वजह से भाजपा के लिए भी अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बना पाना आसान नहीं है। लेकिन, इस बार भाजपा कोई भी मौका हाथ से गंवाना नहीं चाहती। यही वजह से है कि प्रदेशीय नेतृत्व खुद इस चुनाव पर नजर जमाए हुए है। भाजपा की एक अघोषित टीम हवा का रुख अपनी ओर मोड़ने में जुटी हुई है। चुनाव में किसी तरह की अड़चन पैदा न हो, इसके 14 जिला पंचायत सदस्यों के प्रमाण पत्र इकट्ठा कर लिए गए हैं। निर्दलीय छह सदस्यों को भाजपा अपना मान कर चल रही है।
भाजपा को चौदह सदस्यों का समर्थन हासिल हो चुका है। इसके अलावा भी कई सदस्य हमारे संपर्क में हैं। ऐसे में भाजपा आसानी से अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बना लेगी। जबकि, दूसरे दलों के पास प्रत्याशी भी नहीं हैं। भाजपा जल्द प्रत्याशी घोषित कर देगी।
- मुकेश मिश्रा, महानगर अध्यक्ष - भाजपा