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Jhansi News: सैंपल पेपर और रोज रिवीजन की सफलता में अहम भूमिका, बोलीं आईसीएसई टॉपर आराध्या
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बेटी अराध्या को चूमतीं उनकी मां नीलम।
- फोटो : AU
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। सीआईएससीई की 12वीं की परीक्षा 98 फीसदी अंकों से पास करने वालीं आराध्या परया स्कूल और काेचिंग में जो पढ़ाया जाता था, उसे घर पर एक से दो घंटे रिवीजन करती थीं। बोर्ड परीक्षा से पहले सैंपल पेपर हल करने से भी परीक्षा में उन्हें काफी मदद मिली।
खातीबाबा निवासी आराध्या का कहना है कि कई-कई घंटे पढ़ाई करने से बेहतर है कि स्कूल में मन लगाकर पढ़ाई करें। वह भी स्कूल और कोचिंग में पूरे फोकस के साथ पढ़ाई करती थीं। स्कूल में उनकी उपस्थिति भी नियमित रहती थी। यही उनकी सफलता का बड़ा कारण है। बोर्ड परीक्षा से पहले उन्होंने पिछले साल के पेपर भी हल किए थे। परीक्षा के तनाव को उन्होंने कभी भी खुद पर हावी नहीं होने दिया।
उन्होंने कैथेड्रल कॉलेज से ही हाईस्कूल किया था और 88 फीसदी अंक आए थे। बताया कि ड्राइंग, सिंगिंग, डांस उनकी हॉबी है। अब वह मैनेजमेंट क्षेत्र में कॅरियर बनाना चाहती हैं। वह कक्षा छह में पढ़ने वाले अपने भाई को भी घर पर पढ़ाती हैं। उनके पिता गिरधर कुमार जालौन में सरकारी शिक्षक और मां नीलम परया गृहिणी हैं।
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झांसी। सीआईएससीई की 12वीं की परीक्षा 98 फीसदी अंकों से पास करने वालीं आराध्या परया स्कूल और काेचिंग में जो पढ़ाया जाता था, उसे घर पर एक से दो घंटे रिवीजन करती थीं। बोर्ड परीक्षा से पहले सैंपल पेपर हल करने से भी परीक्षा में उन्हें काफी मदद मिली।
खातीबाबा निवासी आराध्या का कहना है कि कई-कई घंटे पढ़ाई करने से बेहतर है कि स्कूल में मन लगाकर पढ़ाई करें। वह भी स्कूल और कोचिंग में पूरे फोकस के साथ पढ़ाई करती थीं। स्कूल में उनकी उपस्थिति भी नियमित रहती थी। यही उनकी सफलता का बड़ा कारण है। बोर्ड परीक्षा से पहले उन्होंने पिछले साल के पेपर भी हल किए थे। परीक्षा के तनाव को उन्होंने कभी भी खुद पर हावी नहीं होने दिया।
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उन्होंने कैथेड्रल कॉलेज से ही हाईस्कूल किया था और 88 फीसदी अंक आए थे। बताया कि ड्राइंग, सिंगिंग, डांस उनकी हॉबी है। अब वह मैनेजमेंट क्षेत्र में कॅरियर बनाना चाहती हैं। वह कक्षा छह में पढ़ने वाले अपने भाई को भी घर पर पढ़ाती हैं। उनके पिता गिरधर कुमार जालौन में सरकारी शिक्षक और मां नीलम परया गृहिणी हैं।
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