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फसलें रूठीं, बीमा पॉलिसी छूटीं
Jhansi
Updated Wed, 27 Apr 2016 12:46 AM IST
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फसलें रूठीं, बीमा पॉलिसी छूटीं
- फोटो : demo
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झांसी। सूखे की त्रासदी झेल रहे बुंदेलखंड के किसानों के पास अब बीमा का विकल्प भी खत्म होता जा रहा है। धन के अभाव के कारण किसान पॉलिसी का प्रीमियम जमा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में कृषकों की पॉलिसियां धड़ाधड़ बंद हो रहीं है या उन्हें पॉलिसी सरेंडर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बीमा कंपनियों के आंकड़े कुछ ऐसी ही हकीकत बयां कर रहे हैं।
कानपुर रीजन के अंतर्गत आने वाले बुंदेलखंड क्षेत्र में भारतीय जीवन बीमा निगम कीडेढ़ दर्जन से अधिक शाखाएं हैं। इसमें झांसी में तीन शाखाओं के अलावा जालौन, उरई, राठ, महोबा, ललितपुर, मऊरानीपुर, बबीना, मोंठ, तालबेहट, बरुआसागर, गुरसरांय, टोड़ी फतेहपुर आदि स्थानों पर बीमा निगम की शाखाएं खुली हुई हैं। इन सभी शाखाओं में मिलाकर बारह लाख से अधिक पॉलिसी हैं, जिसमें चार लाख से अधिक पॉलिसी ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के नाम हैं। जानकारों के अनुसार, पिछले एक साल में दो लाख से अधिक पॉलिसी प्रीमियम जमा न होने के कारण बंद हो चुकी हैं। इनमें पचास हजार ऐसी पॉलिसी भी शामिल हैं, जो तीन साल पूरा होने के बाद सरेंडर कर दी गई। यह सभी पॉलिसी पचास हजार से तीन लाख रुपये तक के बीमा की हैं। यह हाल बीमा क्षेत्र की अग्रणी कंपनी एलआईसी का ही नहीं, बल्कि दौड़ में शामिल अन्य कंपनियों का भी ऐसा ही हाल बना हुआ है। हाल यह है कि महीने में अगर किसानों की दो- चार नई पॉलिसी खुल जाएं तो बड़ी होती है।
दरअसल, किसान इस उम्मीद से बीमा कराते हैं कि अगर उनके साथ कोई हादसा हो जाए तो थोड़ी बहुत आर्थिक मदद तो परिवार को मिल ही जाएगी। पर, वर्तमान हालातों में किसान के पास खाने के लाले पड़े हुए हैं तो वह पॉलिसी की प्रीमियम कहां से जमा कराएं।
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‘सूखे का असर तो हर क्षेत्र में पड़ रहा है, पर सिर्फ इसी कारण से अधिकांश बीमा पॉलिसी बंद हो रहीं हैं, ऐसा कहना भी ठीक नहीं है। अगर ऐसे ही हालात बने रहे तो जरूर इसका प्रभाव अधिक बढ़ जाएगा।’
सुदेश कुमार पांडेय
सीनियर ब्रांच मैनेजर, एलआईसी।
केश नंबर एक
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बबीना क्षेत्र के ग्राम कोटी निवासी महीपत राजपूत ने बताया कि उन्होंने दो साल पहले पचास हजार रुपये का बीमा कराया था। तीन माह में 1428 रुपये की किस्त बनती थी। सूखे के कारण इस बार फसल नहीं हो सकी। इस कारण वह पिछले छह माह से किस्त जमा नहीं कर पा रहे हैं।
केश नंबर दो
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बरुआसागर क्षेत्र के ग्राम तैंदोल निवासी बल्लू ने बताया कि तीन साल पहले उनके भाई की मृत्यु हो गई थी। पर, उनके परिवार को एक रुपये की कहीं से भी आर्थिक मदद नहीं मिल सकी। उन्होंने किसी तरह खुद का एक लाख रुपये का बीमा कराया था। ओलावृष्टि व सूखे से उनकी दो फसलें चौपट हो चुकी हैं। घर में दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो रहा है। इस कारण पिछले एक साल से वह बीमा की किस्त जमा नहीं कर सके है।
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कानपुर रीजन के अंतर्गत आने वाले बुंदेलखंड क्षेत्र में भारतीय जीवन बीमा निगम कीडेढ़ दर्जन से अधिक शाखाएं हैं। इसमें झांसी में तीन शाखाओं के अलावा जालौन, उरई, राठ, महोबा, ललितपुर, मऊरानीपुर, बबीना, मोंठ, तालबेहट, बरुआसागर, गुरसरांय, टोड़ी फतेहपुर आदि स्थानों पर बीमा निगम की शाखाएं खुली हुई हैं। इन सभी शाखाओं में मिलाकर बारह लाख से अधिक पॉलिसी हैं, जिसमें चार लाख से अधिक पॉलिसी ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के नाम हैं। जानकारों के अनुसार, पिछले एक साल में दो लाख से अधिक पॉलिसी प्रीमियम जमा न होने के कारण बंद हो चुकी हैं। इनमें पचास हजार ऐसी पॉलिसी भी शामिल हैं, जो तीन साल पूरा होने के बाद सरेंडर कर दी गई। यह सभी पॉलिसी पचास हजार से तीन लाख रुपये तक के बीमा की हैं। यह हाल बीमा क्षेत्र की अग्रणी कंपनी एलआईसी का ही नहीं, बल्कि दौड़ में शामिल अन्य कंपनियों का भी ऐसा ही हाल बना हुआ है। हाल यह है कि महीने में अगर किसानों की दो- चार नई पॉलिसी खुल जाएं तो बड़ी होती है।
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दरअसल, किसान इस उम्मीद से बीमा कराते हैं कि अगर उनके साथ कोई हादसा हो जाए तो थोड़ी बहुत आर्थिक मदद तो परिवार को मिल ही जाएगी। पर, वर्तमान हालातों में किसान के पास खाने के लाले पड़े हुए हैं तो वह पॉलिसी की प्रीमियम कहां से जमा कराएं।
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‘सूखे का असर तो हर क्षेत्र में पड़ रहा है, पर सिर्फ इसी कारण से अधिकांश बीमा पॉलिसी बंद हो रहीं हैं, ऐसा कहना भी ठीक नहीं है। अगर ऐसे ही हालात बने रहे तो जरूर इसका प्रभाव अधिक बढ़ जाएगा।’
सुदेश कुमार पांडेय
सीनियर ब्रांच मैनेजर, एलआईसी।
केश नंबर एक
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बबीना क्षेत्र के ग्राम कोटी निवासी महीपत राजपूत ने बताया कि उन्होंने दो साल पहले पचास हजार रुपये का बीमा कराया था। तीन माह में 1428 रुपये की किस्त बनती थी। सूखे के कारण इस बार फसल नहीं हो सकी। इस कारण वह पिछले छह माह से किस्त जमा नहीं कर पा रहे हैं।
केश नंबर दो
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बरुआसागर क्षेत्र के ग्राम तैंदोल निवासी बल्लू ने बताया कि तीन साल पहले उनके भाई की मृत्यु हो गई थी। पर, उनके परिवार को एक रुपये की कहीं से भी आर्थिक मदद नहीं मिल सकी। उन्होंने किसी तरह खुद का एक लाख रुपये का बीमा कराया था। ओलावृष्टि व सूखे से उनकी दो फसलें चौपट हो चुकी हैं। घर में दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो रहा है। इस कारण पिछले एक साल से वह बीमा की किस्त जमा नहीं कर सके है।