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Jhansi News: 4.97 करोड़ की निविदा पर घमासान, विरोध करने वाले अफसर को समिति से हटाया
Wed, 08 Jul 2026 02:17 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Wed, 08 Jul 2026 02:17 AM IST
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झांसी। उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) की 4.97 करोड़ रुपये की निविदा को लेकर विवाद गहरा गया है। आरोप है कि एक फर्म को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से निविदा प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई। जब निविदा समिति के सदस्य एवं झांसी के अधिशासी अभियंता मुकेश पाल ने नियमों का हवाला देते हुए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से इन्कार किया तो उन्हें समिति से हटाकर उरई के अधिशासी अभियंता हिमांशु नेगी को सदस्य बना दिया गया। मामले की शिकायत जल निगम के प्रबंध निदेशक (सीएमडी) तक पहुंचने के बाद मुख्य अभियंता ने जांच शुरू करा दी है।
पहले 5.94 करोड़ की निविदा, फिर घटाकर 4.97 करोड़
सूत्रों के मुताबिक बबीना पेयजल आपूर्ति योजना के संचालन, रखरखाव और अन्य कार्यों के लिए पहले 5.94 करोड़ रुपये की निविदा जारी की गई थी। नियमों के अनुसार इस प्रकार के कार्यों की निविदा सिविल निर्माण खंड के माध्यम से होनी चाहिए थी, लेकिन इसे इलेक्ट्रिकल डिवीजन से जारी किया गया। इस पर आपत्ति उठने के बाद पहली निविदा निरस्त कर दी गई। इसके बाद कार्यों का दायरा कम करते हुए लागत घटाकर 4.97 करोड़ रुपये (497.22 लाख) कर दी गई और दोबारा निविदा प्रक्रिया शुरू की गई।
हस्ताक्षर से इन्कार, फिर बदल दी समिति
दूसरी बार फाइल निविदा समिति के सदस्य एवं सिविल निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता मुकेश पाल के पास पहुंची। आरोप है कि उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद अधीक्षण अभियंता ने उन्हें समिति से हटाकर उरई डिवीजन के अधिशासी अभियंता हिमांशु नेगी को सदस्य नामित कर दिया। इसी कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
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सीएमडी तक पहुंची शिकायत
झांसी निवासी डॉ. अरुण कुमार सिंह ने पूरे प्रकरण में निविदा प्रक्रिया में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जल निगम के प्रबंध निदेशक से शिकायत की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि नियमों का पालन कराने वाले अधिकारी को हटाकर पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। सीएमडी के निर्देश पर मुख्य अभियंता आरके पंकज ने मामले की जांच शुरू करा दी है।
क्या कहते हैं मुख्य अभियंता
मुख्य अभियंता आरके पंकज ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायत में उठाए गए सभी बिंदुओं की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निविदा प्रक्रिया में समिति की क्या होती है भूमिका?
सरकारी विभागों में निर्धारित वित्तीय सीमा से अधिक की निविदाओं का परीक्षण और अनुमोदन विभागीय टेंडर (निविदा) समिति करती है। समिति के सदस्य तकनीकी योग्यता, वित्तीय बोली और नियमों के अनुपालन की जांच कर अपनी सहमति देते हैं। किसी सदस्य द्वारा आपत्ति दर्ज करने पर उसका परीक्षण करना और आवश्यकता होने पर निर्णय का कारण रिकॉर्ड करना प्रशासनिक पारदर्शिता का हिस्सा माना जाता है। ऐसे में किसी सदस्य को प्रक्रिया के बीच हटाया जाना स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब हटाने का कारण उसकी आपत्ति से जुड़ा होने का आरोप लगाया जाए।
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पहले 5.94 करोड़ की निविदा, फिर घटाकर 4.97 करोड़
सूत्रों के मुताबिक बबीना पेयजल आपूर्ति योजना के संचालन, रखरखाव और अन्य कार्यों के लिए पहले 5.94 करोड़ रुपये की निविदा जारी की गई थी। नियमों के अनुसार इस प्रकार के कार्यों की निविदा सिविल निर्माण खंड के माध्यम से होनी चाहिए थी, लेकिन इसे इलेक्ट्रिकल डिवीजन से जारी किया गया। इस पर आपत्ति उठने के बाद पहली निविदा निरस्त कर दी गई। इसके बाद कार्यों का दायरा कम करते हुए लागत घटाकर 4.97 करोड़ रुपये (497.22 लाख) कर दी गई और दोबारा निविदा प्रक्रिया शुरू की गई।
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हस्ताक्षर से इन्कार, फिर बदल दी समिति
दूसरी बार फाइल निविदा समिति के सदस्य एवं सिविल निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता मुकेश पाल के पास पहुंची। आरोप है कि उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद अधीक्षण अभियंता ने उन्हें समिति से हटाकर उरई डिवीजन के अधिशासी अभियंता हिमांशु नेगी को सदस्य नामित कर दिया। इसी कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
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सीएमडी तक पहुंची शिकायत
झांसी निवासी डॉ. अरुण कुमार सिंह ने पूरे प्रकरण में निविदा प्रक्रिया में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जल निगम के प्रबंध निदेशक से शिकायत की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि नियमों का पालन कराने वाले अधिकारी को हटाकर पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। सीएमडी के निर्देश पर मुख्य अभियंता आरके पंकज ने मामले की जांच शुरू करा दी है।
क्या कहते हैं मुख्य अभियंता
मुख्य अभियंता आरके पंकज ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायत में उठाए गए सभी बिंदुओं की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निविदा प्रक्रिया में समिति की क्या होती है भूमिका?
सरकारी विभागों में निर्धारित वित्तीय सीमा से अधिक की निविदाओं का परीक्षण और अनुमोदन विभागीय टेंडर (निविदा) समिति करती है। समिति के सदस्य तकनीकी योग्यता, वित्तीय बोली और नियमों के अनुपालन की जांच कर अपनी सहमति देते हैं। किसी सदस्य द्वारा आपत्ति दर्ज करने पर उसका परीक्षण करना और आवश्यकता होने पर निर्णय का कारण रिकॉर्ड करना प्रशासनिक पारदर्शिता का हिस्सा माना जाता है। ऐसे में किसी सदस्य को प्रक्रिया के बीच हटाया जाना स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब हटाने का कारण उसकी आपत्ति से जुड़ा होने का आरोप लगाया जाए।