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Jhansi News: बस स्टैंड पर अव्यवस्था का बोलबाला, यात्री परेशान
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संवाद न्यूज एजेंसी
मऊरानीपुर। बुंदेलखंड का प्रमुख व्यापारिक केंद्र मऊरानीपुर का बस स्टैंड इन दिनों अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। यात्रियों को बस पकड़ने के लिए स्टैंड के भीतर नहीं, बल्कि सड़कों पर भटकना पड़ता है। प्रशासन की अनदेखी और सुपरफास्ट बसों की मनमानी से आम जनमानस की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
नगर के मुख्य अंबेडकर तिराहे पर प्राइवेट बसें अवैध रूप से खड़ी रहती हैं। ये बसें रेलवे स्टेशन के सामने और डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के पीछे दोनों तरफ रुकती हैं। कायदे से बसों को स्टैंड के भीतर होना चाहिए। लेकिन ये बसें सड़क किनारे 15 से 20 मिनट तक खड़ी रहती हैं। इससे इस प्रमुख चौराहे पर हर पल जाम की स्थिति बनी रहती है। पक्का बस स्टैंड होने के बावजूद बसें सड़क किनारे ही अपना ठिकाना बनाए हुए हैं। रोडवेज डिपो की बसें भी सड़क किनारे ही खड़ी रहती हैं। झांसी, छतरपुर और राठ की ओर जाने वाली अधिकांश सुपरफास्ट बसें स्टैंड में नहीं आतीं। वे सीधे अंबेडकर तिराहा या मुख्य मार्ग पर रुकती हैं। कई बसें तो नगर के भीतर आने से बचते हुए सीधे हाईवे से निकल जाती हैं।
दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को इससे भारी निराशा होती है। उन्हें बसों के लिए सड़कों पर इंतजार करना पड़ता है। त्योहारों के इस सीजन में बस स्टैंड पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ती है। इसके बावजूद वहां अराजकता का माहौल देखने को मिलता है।
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इसके अलावा अंबेडकर तिराहे पर बसों में सवारियां बैठाने के लिए बिचौलियों और एजेंटों का जमावड़ा रहता है। सवारियों को खींचने की होड़ में उनके बीच अक्सर तीखी झड़पें होती हैं। इससे कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं।
पुलिस क्षेत्राधिकार रत्नेश सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। जांच कर कार्रवाई करने की बात कही।
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मऊरानीपुर। बुंदेलखंड का प्रमुख व्यापारिक केंद्र मऊरानीपुर का बस स्टैंड इन दिनों अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। यात्रियों को बस पकड़ने के लिए स्टैंड के भीतर नहीं, बल्कि सड़कों पर भटकना पड़ता है। प्रशासन की अनदेखी और सुपरफास्ट बसों की मनमानी से आम जनमानस की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
नगर के मुख्य अंबेडकर तिराहे पर प्राइवेट बसें अवैध रूप से खड़ी रहती हैं। ये बसें रेलवे स्टेशन के सामने और डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के पीछे दोनों तरफ रुकती हैं। कायदे से बसों को स्टैंड के भीतर होना चाहिए। लेकिन ये बसें सड़क किनारे 15 से 20 मिनट तक खड़ी रहती हैं। इससे इस प्रमुख चौराहे पर हर पल जाम की स्थिति बनी रहती है। पक्का बस स्टैंड होने के बावजूद बसें सड़क किनारे ही अपना ठिकाना बनाए हुए हैं। रोडवेज डिपो की बसें भी सड़क किनारे ही खड़ी रहती हैं। झांसी, छतरपुर और राठ की ओर जाने वाली अधिकांश सुपरफास्ट बसें स्टैंड में नहीं आतीं। वे सीधे अंबेडकर तिराहा या मुख्य मार्ग पर रुकती हैं। कई बसें तो नगर के भीतर आने से बचते हुए सीधे हाईवे से निकल जाती हैं।
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दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को इससे भारी निराशा होती है। उन्हें बसों के लिए सड़कों पर इंतजार करना पड़ता है। त्योहारों के इस सीजन में बस स्टैंड पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ती है। इसके बावजूद वहां अराजकता का माहौल देखने को मिलता है।
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इसके अलावा अंबेडकर तिराहे पर बसों में सवारियां बैठाने के लिए बिचौलियों और एजेंटों का जमावड़ा रहता है। सवारियों को खींचने की होड़ में उनके बीच अक्सर तीखी झड़पें होती हैं। इससे कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं।
पुलिस क्षेत्राधिकार रत्नेश सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। जांच कर कार्रवाई करने की बात कही।