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अभी टूटी सड़कों पर ही चलिए झांसी वालों... निगम के पास मरम्मत कराने के लिए बजट ही नहीं
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झांसी। पिछले एक साल से खराब पड़ीं शहर की तमाम सड़कों और गलियों की मरम्मत के लिए जनता भले ही नगर निगम के दफ्तर में तमाम बार अपनी शिकायत करे या चीखे-चिल्लाए, निगम फिलहाल खस्ताहाल सड़कों और गलियों की मरम्मत नहीं कराएगा। नगर निगम के पास फिलहाल इस मद में पैसा ही नहीं है। इससे शहर की139 खस्ताहाल सड़कों और गलियों की मरम्मत का काम फंस गया है। अधिकारियों का कहना है कि अब नए वित्तीय वर्ष में जो बजट जारी होगा उससे काम कराए जाएंगे।
नगर निगम को शहर के भीतर विकास कार्य कराने की खातिर 15वें वित्त एवं चतुर्थ वित्त आयोग के जरिए मदद मिलती है लेकिन, चतुर्थ वित्त आयोग से मिलने वाली रकम में भारी-भरकम कटौती कर दी गई। निगम को हर माह जहां करीब आठ करोड़ रुपये मिलने थे, वहां उसके खातेे में महज 3 से 4 करोड़ रुपये ही आए। इसका सीधा असर शहर के भीतरी विकास कार्यों पर पड़ रहा।
स्थिति यह है कि खराब एवं क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद बावजूद शहर की तमाम गलियां पिछले एक साल से उसी हाल मेें पड़ी हैं। इनमें कई कार्यों के लिए इस्टीमेट भी तैयार हो गए, लेकिन बाद मेें बजट न होने से इन कार्यों को कराने में निगम प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए। अगर बजट में बढ़ोतरी नहीं हुई तब इन सड़क एवं गलियों की मरम्मत इस साल होना भी संभव नहीं है।
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मरम्मत का काम अटकने से पार्षद भी नाराज
झांसी। इस्टीमेट बन जाने के बाद बजट न होने से निर्माण कार्य अटकने पर पार्षद भी नाराज हैं। कार्यकारिणी सदस्य दिनेश सिंह दीपू के मुताबिक शहर के कई इलाकों में कई वर्षों से मरम्मत कार्य नहीं कराए गए। जब इन स्थानों का नंबर आया तब निगम प्रशासन बजट की कमी का बहाना बनाने लगा। सरवरिया स्वीट से एचएम मेमोरियल स्कूल के बीच, निरंकारी आश्रम से केपी सिंह आवास के बीच, महीपत सिंह के आवास से प्रजापति आवास, मस्जिद की सड़क का इस्टीमेट बन चुका लेकिन, बजट का अभाव बताकर यह काम नहीं कराया गया। कार्यकारिणी सदस्य किशोरी रायकवार का कहना है कई गलियों का निर्माण बजट न होने की बात कहकर नहीं कराया जा रहा। पार्षद विकास खत्री, महेश गौतम, जुगल किशोर आदि का भी कहना है कि फंड न होने से गलियों की मरम्मत का काम भी ठप है।
बजट न होने के अलावा कई महीने आचार संहिता लगी होने की वजह से भी हम लोग कई काम नहीं करा सके। अब नए वित्तीय वर्ष में उम्मीद है कि नगर निगम को पर्याप्त बजट मिलेगा। इसकी मदद से काम कराए जाएंगे।
एसके अंबेडकर
मुख्य अभियंता, नगर निगम
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नगर निगम को शहर के भीतर विकास कार्य कराने की खातिर 15वें वित्त एवं चतुर्थ वित्त आयोग के जरिए मदद मिलती है लेकिन, चतुर्थ वित्त आयोग से मिलने वाली रकम में भारी-भरकम कटौती कर दी गई। निगम को हर माह जहां करीब आठ करोड़ रुपये मिलने थे, वहां उसके खातेे में महज 3 से 4 करोड़ रुपये ही आए। इसका सीधा असर शहर के भीतरी विकास कार्यों पर पड़ रहा।
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स्थिति यह है कि खराब एवं क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद बावजूद शहर की तमाम गलियां पिछले एक साल से उसी हाल मेें पड़ी हैं। इनमें कई कार्यों के लिए इस्टीमेट भी तैयार हो गए, लेकिन बाद मेें बजट न होने से इन कार्यों को कराने में निगम प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए। अगर बजट में बढ़ोतरी नहीं हुई तब इन सड़क एवं गलियों की मरम्मत इस साल होना भी संभव नहीं है।
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मरम्मत का काम अटकने से पार्षद भी नाराज
झांसी। इस्टीमेट बन जाने के बाद बजट न होने से निर्माण कार्य अटकने पर पार्षद भी नाराज हैं। कार्यकारिणी सदस्य दिनेश सिंह दीपू के मुताबिक शहर के कई इलाकों में कई वर्षों से मरम्मत कार्य नहीं कराए गए। जब इन स्थानों का नंबर आया तब निगम प्रशासन बजट की कमी का बहाना बनाने लगा। सरवरिया स्वीट से एचएम मेमोरियल स्कूल के बीच, निरंकारी आश्रम से केपी सिंह आवास के बीच, महीपत सिंह के आवास से प्रजापति आवास, मस्जिद की सड़क का इस्टीमेट बन चुका लेकिन, बजट का अभाव बताकर यह काम नहीं कराया गया। कार्यकारिणी सदस्य किशोरी रायकवार का कहना है कई गलियों का निर्माण बजट न होने की बात कहकर नहीं कराया जा रहा। पार्षद विकास खत्री, महेश गौतम, जुगल किशोर आदि का भी कहना है कि फंड न होने से गलियों की मरम्मत का काम भी ठप है।
बजट न होने के अलावा कई महीने आचार संहिता लगी होने की वजह से भी हम लोग कई काम नहीं करा सके। अब नए वित्तीय वर्ष में उम्मीद है कि नगर निगम को पर्याप्त बजट मिलेगा। इसकी मदद से काम कराए जाएंगे।
एसके अंबेडकर
मुख्य अभियंता, नगर निगम