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क्रांति भगत सिंह जैसी होना चाहिए : धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
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संवाद न्यूज एजेंसी
अजनर (महोबा)। बागेश्वर धाम से झांसी के ओरछा तक निकाली जा रही नौ दिवसीय सनातन हिंदू एकता पदयात्रा रविवार को महोबा के चमरुआ गांव होते हुए नौगांव पहुंची। यात्रा में शामिल पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। इस मौके पर हजारों की संख्या में भक्तों की भीड़ जुटी रही।
पद यात्रा के दौरान कस्बा नौगांव में पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि क्रांति भगत सिंह जैसी होना चाहिए। यह क्रांति राष्ट्र भक्ति में होना चाहिए। आज सभी जो सड़कों पर उतरकर क्रांति कर रहे हैं वह अपने लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए है। ताकि, यह देश गजवा ए हिंद न हो जाए।
वहीं, कार्यक्रम में कथावाचक अनुरुद्धाचार्य ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने कर्म के हिसाब से स्थान दिए थे न कि जाति के हिसाब से। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण का खुलकर विरोध करो। अपने समाज के लोगों की आवश्यकताओं को हम-आप खुद पूरा करें। ताकि, दूसरे समाज वाले लालच देकर धर्मांतरण न करा सके। बोले कि यदि, आज न चेते तो आने वाले 30 साल बाद सनातन बर्बादी की कगार पर आ जाएगा।
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पदयात्रा में भक्त हाथों में भगवा ध्वज लेकर रामधुन गाते चलते रहे। महोबा के चमरुआ गांव में ग्रामीणों ने पदयात्रा में शामिल भक्तों का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।
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अजनर (महोबा)। बागेश्वर धाम से झांसी के ओरछा तक निकाली जा रही नौ दिवसीय सनातन हिंदू एकता पदयात्रा रविवार को महोबा के चमरुआ गांव होते हुए नौगांव पहुंची। यात्रा में शामिल पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। इस मौके पर हजारों की संख्या में भक्तों की भीड़ जुटी रही।
पद यात्रा के दौरान कस्बा नौगांव में पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि क्रांति भगत सिंह जैसी होना चाहिए। यह क्रांति राष्ट्र भक्ति में होना चाहिए। आज सभी जो सड़कों पर उतरकर क्रांति कर रहे हैं वह अपने लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए है। ताकि, यह देश गजवा ए हिंद न हो जाए।
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वहीं, कार्यक्रम में कथावाचक अनुरुद्धाचार्य ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने कर्म के हिसाब से स्थान दिए थे न कि जाति के हिसाब से। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण का खुलकर विरोध करो। अपने समाज के लोगों की आवश्यकताओं को हम-आप खुद पूरा करें। ताकि, दूसरे समाज वाले लालच देकर धर्मांतरण न करा सके। बोले कि यदि, आज न चेते तो आने वाले 30 साल बाद सनातन बर्बादी की कगार पर आ जाएगा।
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पदयात्रा में भक्त हाथों में भगवा ध्वज लेकर रामधुन गाते चलते रहे। महोबा के चमरुआ गांव में ग्रामीणों ने पदयात्रा में शामिल भक्तों का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।