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बुंदेलखंड के 2905 गांवों में खुल गए वर्षों से बंद हजारों मकानों के ताले

Tue, 31 Mar 2020 01:09 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 31 Mar 2020 01:09 AM IST
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झांसी। कोई मकान पांच साल से बंद पड़ा था तो किसी मकान को छोड़कर उसके लोग दस साल पहले शहर में चले गए थे। बस त्योहारों पर ही आना-जाना होता था लेकिन अब लॉकडाउन में लोगों को अपने गांवों की याद आने लगी। बुंदेलखंड में ही 2905 ग्राम पंचायतों में बंद पड़े हजारों मकानों के ताले खुल गए हैं। झांसी, ललितपुर, जालौन, बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा जिले के हर गांव में इस समय मजदूरों की वापसी हो रही है। स्थिति यह है कि प्रशासन ने पहले 50 बसों की व्यवस्था की थी लेकिन अब संख्या बढ़ाकर 100 करनी पड़ी है।
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बुंदेलखंड से शहरों की तरफ सबसे ज्यादा पलायन हुआ है। रोजगार के साधन न होने के कारण यहां के लोग मजदूरी के लिए दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के शहरों में जाते हैं। इस क्षेत्र के गांवों से बढ़ते पलायन के कारण मकानों पर ताले लगते चले गए। लेकिन अब लॉकडाउन के दौरान जब सब कुछ बंद हुआ तो शहर छोड़कर लोग अपने गांव की तरफ दौड़ रहे हैं। झांसी में पिछले चार दिनों के भीतर 50 हजार से भी ज्यादा लोग पहुंच चुके हैं जबकि आने का सिलसिला लगातार जारी है। कमिश्नर सुभाष चंद्र शर्मा ने बताया कि पहले 50 बसों की व्यवस्था की गई थी लेकिन आने वाले परिवारों की भीड़ को देख 100 बसें लगा दी गईं हैं। अपने गांव जाने के लिए ग्वालियर रोड पर वाहन का इंतजार कर रहे झांसी के गांव ढिकौली निवासी राममिलन ने बताया कि वह दिल्ली में मजदूरी करने के लिए एक साल पहले गया था, दीपावली पर ही आया था। लेकिन अब परिवार के साथ लौट आया है। निवाड़ी तहसील के गांव वृषभानपुरा निवासी रामस्वरूप अपनी पत्नी और बच्चों के साथ गाजियाबाद में मजदूरी करके परिवार की गुजर बसर कर रहा था। उसके बूढ़े मां-बाप गांव में रहते थे। लेकिन अब रामस्वरूप को भी वापस लौटना पड़ा है। जालौन निवासी दिलीप कुमार ने बताया कि तीन साल पहले चला गया था। लेकिन अब गांव ही उसका सहारा बनेगा। कम से कम खाने के तो लाले नहीं पड़ेंगे। टीकमगढ़ निवासी दुबंदी ने बताया कि चार साल पहले वह और उसके भाई नोएडा में रहकर मजदूरी कर रहे थे। लेकिन वहां तो कुछ है नहीं लिहाजा गांव जा रहे हैं। मजदूरी पर गेहूं की कटाई करके खाने लायक अनाज तो कमा ही लेंगे। ललितपुर जिले के ग्राम ननोरा निवासी गणपत, कला देवी, पार्वती व सिया आगरा की एक फैक्टरी में काम करते हैं लॉकडाउन होते ही मालिक ने फैक्टरी पर ताला डाल दिया जिससे वे बेरोजगार हो गए, कोई साधन न मिलने के बाद भी वे आगरा से पैदल चलकर अपने गांव ननोरा पहुंचे हैं। इसके पहले वे दीपावली के पूजन पर घर आए थे , इसके बाद से घर में ताला पड़ा था। रविवार को घर पहुंचकर अपने मकानों के ताले खोले तथा साफ सफाई की है।
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आंकड़े
बुंदेलखंड में शामिल जिलों की संख्या-7
मजदूरों की संख्या-23 लाख
गांवों की संख्या-2905
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