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अज्ञानता को हटाओ और ज्ञान को प्रवेश कराओ
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 19 May 2017 01:25 AM IST
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yati sammelan
- फोटो : demo
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गणाचार्य विराग सागर महाराज ने कहा कि जीवन से अज्ञानता को हटाकर ज्ञान का प्रवेश कराओ और अच्छे काम कर मनुष्य का जीवन सार्थक करो। करगुवां जी जैन मंदिर में चल रहे युग प्रतिक्रमण - यति सम्मेलन महा महोत्सव में बृहस्पतिवार को उन्होंने हुई धर्मसभा में कहा कि जीवन में ज्ञान का प्रज्वलित दीपक होना चाहिए, जिसके प्रकाश से अहंकार दूर हो जाता है।
गणाचार्य ने दिव्य देशना में कहा कि मेरी यहीं प्रार्थना है कि संसार के सभी प्राणियों के जीवन में ज्ञान रूपी दीपक का प्रकाश हो। अज्ञान रूपी दीपक हमेशा के लिए दूर हो जाए। अज्ञानी प्राणी ज्ञान के अभाव में न जाने कितने प्रकार के पाप कर लेता है। ज्यादा से ज्यादा और अधिक भौतिक सुख सुविधाएं पाने क ी लालच में बेसुध हुआ जा रहा है, जिसका फल भविष्य में प्रत्येक क्षण दुख प्रदान करता है। सत्यता तो यह है कि जीवन का कोई भरोसा नहीं है। कब, किस मोड़ पर जीवन की शाम हो जाए। यदि जीवन की शाम होने से पहले हम संभल जाए और संभलकर सावधान हो जाए, तो अच्छा है।
उन्होंने कहा कि पुण्य की घड़ी जब उदय मानी जाती है, जब कोई व्यक्ति पुण्य की ओर बढ़ता है। संयम लेने और उनका पालन करने का संकल्प लेने का समय ही पुण्य उदय होने का क्षण है। धन, दौलत या संपदा प्राप्त होना पुण्य का उदय नहीं है। यह केवल तुम्हारे पुराने पुण्य का उदय है। पुरुषार्थ में लगकर अगले जन्म को सुधारने की कोशिश में लग जाओ। अन्यथा पूर्व कर्मों के पुण्य उदय से जो सुख सुविधाएं मिली है, वह आगे मिलने वाली नहीं है। प्रवचन अवसर पर पुलिस उपनिरीक्षक जयवीर सिंह यादव ने आचार्य श्री का आशीर्वाद लेकर रात्रि भोजन न करने और शाकाहारी भोजन करने का संकल्प लिया।
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कामिनी ने तीन कलश सिर पर रख किया मंगलाचरण
यति सम्मेलन में आईं खंडवा की कामिनी ने सिर पर तीन कलश और उसके ऊपर दीपक रखकर मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। रात में शास्त्र सभा के बाद राजेंद्र एंड पार्टी के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
अहिंसा प्रधान देश है भारत
आचार्य विशुद्ध सागर जी ने कहा कि भारत अहिंसा प्रधान देश है, जिसमें सभी धर्म संप्रदाय के लोग शांति से रहते है। विश्व को शांति का संदेश देता है, हमारा भारत। यति सम्मेलन में ससंघ आए आचार्य विशुद्ध सागर जी ने गुरु विराग सागर की महिमा का वर्णन कर कहा कि आचार्य श्री ने अब तक दस प्रांतों में शिविर लगाकर 21 लाख लोगोें को अहिंसा, व्यसन मुक्ति और शाकाहार अभियान से लाभान्वित कर उन्हें अहिंसा के मार्ग पर लगा दिया है। उन्होंने प्राचीन परंपराओं को पुनर्जीवित कर इसे सजाने और संवारने का काम किया है। युग प्रतिक्रमण एवं यति सम्मेलन के इस आयोजन से करगुवां जी महा तीर्थ बन गया है। श्रमणी आर्यिका विशिष्ट श्री माताजी ने कहा कि गुरु परमात्मा की कृति, आत्मा की विधि, संसार की निधि और मोक्ष मार्ग की विधि है। इससे पूर्व यति सम्मेलन में आए विशुद्ध सागर जी का मंदिर के मुख्य द्वार पर अगवानी की गई।
करगुवां जी में वर्षा योग कर चुके है विशुद्ध सागर
आचार्य विशुद्ध सागर जी ने 16 वर्ष की आयु में ही गणाचार्य विराग सागर जी से दीक्षा ले ली थी। तब वह कक्षा दस में पढ़ते थे। भिंड जिले में जन्में आचार्य का लौकिक नाम पहले राजेंद्र था। महाराष्ट्र राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के कई जिलों व कस्बों में वह पद विहार कर गए। वर्ष 1999 में उन्होंने करगुवां जी मंदिर में वर्षायोग किया था। उनके अनुसार गृहस्थ जीवन में आत्म सुख नहीं है। आत्म सुख के लिए उन्होंने वैराग्य अपना लिया।
ये रहे मौजूद
सम्मेलन में राजीव जैन, अजीत जैनबंधु शास्त्री, वरुण जैन, कैलाश चंद्र जैन, दिगंबर जैन पंचायत समिति के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जैन, प्रवीण जैन, प्रदीप जैन आदित्य, शैलेंद्र जैन, सुभाष जैन, विनोद जैन, निखिल जैन, दिनेश जैन, सोनू वैसाखिया, यश मैनवार, कुमकुम, बाबूलाल सराफ, मनीष जैन, योगेश जैन आदि मौजूद रहे। वहीं, महापौर किरन वर्मा, डा. नीति शास्त्री, अशोक यादव, बालकृष्ण अरोरा, निर्मल जैन, मदन लाल जैन, राकेश जैन, बबलू, अंकित जैन, डा. महेश जैन, गुलाब चंद्र जैन का महामहोत्सव समिति ने सम्मान किया।
यति सम्मेलन में आज
सुबह 5:15 बजे: जाप्यानुष्ठान
सुबह 6:15 बजे: अभिषेक नित्यार्चन
सुबह 8 बजे: पाद प्रक्षालन, पूजन, शास्त्र विमोचन, गणाचार्य विराग सागर महाराज व संघ की मंगल दिव्य देशना।
दोपहर 1 बजे: समवसरण महाअर्चना बड़ी जयमाला।
दोपहर 2 बजे: प्रतिभा सम्मान, विराग सागर जी एवं संघ की दिव्य देशना
शाम 7 बजे: चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा व भक्तिमय आरती।
रात 8 बजे: शास्त्र सभा
रात 8:30 बजे : राजेंद्र एंड पार्टी के कलाकारों द्वारा नाटक का मंचन।
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गणाचार्य ने दिव्य देशना में कहा कि मेरी यहीं प्रार्थना है कि संसार के सभी प्राणियों के जीवन में ज्ञान रूपी दीपक का प्रकाश हो। अज्ञान रूपी दीपक हमेशा के लिए दूर हो जाए। अज्ञानी प्राणी ज्ञान के अभाव में न जाने कितने प्रकार के पाप कर लेता है। ज्यादा से ज्यादा और अधिक भौतिक सुख सुविधाएं पाने क ी लालच में बेसुध हुआ जा रहा है, जिसका फल भविष्य में प्रत्येक क्षण दुख प्रदान करता है। सत्यता तो यह है कि जीवन का कोई भरोसा नहीं है। कब, किस मोड़ पर जीवन की शाम हो जाए। यदि जीवन की शाम होने से पहले हम संभल जाए और संभलकर सावधान हो जाए, तो अच्छा है।
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उन्होंने कहा कि पुण्य की घड़ी जब उदय मानी जाती है, जब कोई व्यक्ति पुण्य की ओर बढ़ता है। संयम लेने और उनका पालन करने का संकल्प लेने का समय ही पुण्य उदय होने का क्षण है। धन, दौलत या संपदा प्राप्त होना पुण्य का उदय नहीं है। यह केवल तुम्हारे पुराने पुण्य का उदय है। पुरुषार्थ में लगकर अगले जन्म को सुधारने की कोशिश में लग जाओ। अन्यथा पूर्व कर्मों के पुण्य उदय से जो सुख सुविधाएं मिली है, वह आगे मिलने वाली नहीं है। प्रवचन अवसर पर पुलिस उपनिरीक्षक जयवीर सिंह यादव ने आचार्य श्री का आशीर्वाद लेकर रात्रि भोजन न करने और शाकाहारी भोजन करने का संकल्प लिया।
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कामिनी ने तीन कलश सिर पर रख किया मंगलाचरण
यति सम्मेलन में आईं खंडवा की कामिनी ने सिर पर तीन कलश और उसके ऊपर दीपक रखकर मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। रात में शास्त्र सभा के बाद राजेंद्र एंड पार्टी के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
अहिंसा प्रधान देश है भारत
आचार्य विशुद्ध सागर जी ने कहा कि भारत अहिंसा प्रधान देश है, जिसमें सभी धर्म संप्रदाय के लोग शांति से रहते है। विश्व को शांति का संदेश देता है, हमारा भारत। यति सम्मेलन में ससंघ आए आचार्य विशुद्ध सागर जी ने गुरु विराग सागर की महिमा का वर्णन कर कहा कि आचार्य श्री ने अब तक दस प्रांतों में शिविर लगाकर 21 लाख लोगोें को अहिंसा, व्यसन मुक्ति और शाकाहार अभियान से लाभान्वित कर उन्हें अहिंसा के मार्ग पर लगा दिया है। उन्होंने प्राचीन परंपराओं को पुनर्जीवित कर इसे सजाने और संवारने का काम किया है। युग प्रतिक्रमण एवं यति सम्मेलन के इस आयोजन से करगुवां जी महा तीर्थ बन गया है। श्रमणी आर्यिका विशिष्ट श्री माताजी ने कहा कि गुरु परमात्मा की कृति, आत्मा की विधि, संसार की निधि और मोक्ष मार्ग की विधि है। इससे पूर्व यति सम्मेलन में आए विशुद्ध सागर जी का मंदिर के मुख्य द्वार पर अगवानी की गई।
करगुवां जी में वर्षा योग कर चुके है विशुद्ध सागर
आचार्य विशुद्ध सागर जी ने 16 वर्ष की आयु में ही गणाचार्य विराग सागर जी से दीक्षा ले ली थी। तब वह कक्षा दस में पढ़ते थे। भिंड जिले में जन्में आचार्य का लौकिक नाम पहले राजेंद्र था। महाराष्ट्र राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के कई जिलों व कस्बों में वह पद विहार कर गए। वर्ष 1999 में उन्होंने करगुवां जी मंदिर में वर्षायोग किया था। उनके अनुसार गृहस्थ जीवन में आत्म सुख नहीं है। आत्म सुख के लिए उन्होंने वैराग्य अपना लिया।
ये रहे मौजूद
सम्मेलन में राजीव जैन, अजीत जैनबंधु शास्त्री, वरुण जैन, कैलाश चंद्र जैन, दिगंबर जैन पंचायत समिति के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जैन, प्रवीण जैन, प्रदीप जैन आदित्य, शैलेंद्र जैन, सुभाष जैन, विनोद जैन, निखिल जैन, दिनेश जैन, सोनू वैसाखिया, यश मैनवार, कुमकुम, बाबूलाल सराफ, मनीष जैन, योगेश जैन आदि मौजूद रहे। वहीं, महापौर किरन वर्मा, डा. नीति शास्त्री, अशोक यादव, बालकृष्ण अरोरा, निर्मल जैन, मदन लाल जैन, राकेश जैन, बबलू, अंकित जैन, डा. महेश जैन, गुलाब चंद्र जैन का महामहोत्सव समिति ने सम्मान किया।
यति सम्मेलन में आज
सुबह 5:15 बजे: जाप्यानुष्ठान
सुबह 6:15 बजे: अभिषेक नित्यार्चन
सुबह 8 बजे: पाद प्रक्षालन, पूजन, शास्त्र विमोचन, गणाचार्य विराग सागर महाराज व संघ की मंगल दिव्य देशना।
दोपहर 1 बजे: समवसरण महाअर्चना बड़ी जयमाला।
दोपहर 2 बजे: प्रतिभा सम्मान, विराग सागर जी एवं संघ की दिव्य देशना
शाम 7 बजे: चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा व भक्तिमय आरती।
रात 8 बजे: शास्त्र सभा
रात 8:30 बजे : राजेंद्र एंड पार्टी के कलाकारों द्वारा नाटक का मंचन।