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कोरोना काल में टूटे कारोबारियों के रिश्ते... अदालतों की दहलीज पर पहुंचे

Thu, 05 May 2022 01:18 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 05 May 2022 01:18 AM IST
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Relationships of businessmen broken during the Corona period... reached the threshold of the courts
झांसी। कोरोना वायरस का संक्रमण लोगों की सेहत और जिंदगी के साथ-साथ आपसी रिश्तों पर भी भारी पड़ा है। खासतौर पर महामारी के दौर में लोगों के कारोबारी संबंधों में खासी खटास आई है। लेनदेन में आपसी भरोसा टूटा और मामला अदालत की चौखट तक जा पहुंचा। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जिले की अलग-अलग अदालतों में चेक बाउंस होने संबंधी तकरीबन आठ हजार मामले विचाराधीन हैं। जबकि, पहले ये संख्या औसतन डेढ़ से दो हजार हुआ करती थी।
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लेनदेन में आपसी भरोसा कायम रहे, इसके लिए लोग पोस्ट डेटेड चेक दे देते हैं। खासतौर पर कारोबार में इसका चलन अधिक होता है। चेक की तय मियाद पूरी होने पर उसे बैंक में जमा कर रकम खड़ी कर ली जाती है। लेकिन, कोरोना काल में लॉकडाउन जैसी परिस्थितियों से कारोबार और रोजगार पटरी से उतर गए थे, जो अब तक अपनी रफ्तार नहीं पकड़ पाए हैं। इसी का नतीजा है कि चेक बाउंस होने के मामले बढ़ गए हैं। उधारी का पैसा वापस न मिल पाने पर लोग एनआई एक्ट के तहत अदालतों का दरवाजा खटखटा रहे हैं।
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एनआई एक्ट की विशेष अदालत में ही तीन हजार से अधिक मुकदमे विचाराधीन हैं। जबकि, इस अदालत में केवल नवाबाद थाना क्षेत्र के मामलों की सुनवाई होती है। इसके अलावा अन्य थाना क्षेत्रों से जुड़े मामले अलग-अलग अदालतों में विचाराधीन है। अदालतों में एनआई एक्ट के लगभग आठ हजार मामले चल रहे हैं। कोरोना काल के दौरान इन मामलों में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है।
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केस - 1
13 लाख की चेक नहीं हो पाई कैश
झांसी। थोक कपड़ा कारोबारी पंकज ने मऊरानीपुर के एक फुटकर व्यापारी को फरवरी 2020 में 13 लाख रुपये का माल दिया था। व्यापारी ने पंकज को चेक दी थी, जिसे दो महीने बाद कैश कराना था। इसी बीच लॉकडाउन लागू हो गया। इसके बाद जब बाजार खुले तो कारोबार ढंग से नहीं चला। ऐसे में व्यापारी पंकज की उधारी नहीं चुका पाया। जबकि, पंकज को सूरत के कारोबारियों को पैसा भेजना था। ऐसे में पंकज के फुटकर कारोबारी से रिश्ते बिगड़ गए। चेक बाउंस होने के बाद मामला अदालत में पहुंच गया।
केस - 2
कारोबार बंद किया, पैसा भी नहीं चुकाया
झांसी। सुभाष गंज के व्यापारी सौरभ ने ललितपुर के एक व्यापारी को पिछले साल नौ लाख रुपये का प्लास्टिक का माल भेजा था। व्यापारी ने दो महीने में भुगतान करने के वादे के साथ सौरभ को चेक दे दी थी। सौरभ के व्यापारी से सालों से कारोबारी रिश्ते चले आ रहे थे। चेक के आदान-प्रदान के साथ लेनदेन चलता रहता था। लेकिन, व्यापारी ने नौ लाख रुपये का भुगतान नहीं कर पाया। सौरभ को बगैर बताए उसने अपना कारोबार बंद कर दिया। मजबूरी में सौरभ को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
अदालतों में पहले के मुकाबले पिछले छह माह के भीतर एनआई एक्ट के मामले तेजी से बढ़े हैं। इन मामलों की अदालतों में लगातार सुनवाई हो रही है और फैसले भी सुनाए जा रहे हैं।

- मृदुल कांत श्रीवास्तव, जिला शासकीय अधिवक्ता
कोरोना काल की शुरुआत से ही कारोबार पटरी से उतर गए थे, जो अब तक नहीं संभल पाए हैं। व्यापारियों की लंबी उधारी फंसी हुई हैं। मजबूरी में व्यापारी एनआई एक्ट के तहत मुकदमे कायम कर रहे हैं।
- बृजबिहारी सोनी, नगर अध्यक्ष - उप्र उद्योग व्यापार मंडल
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