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बैंक की तरह ही अब रिकवरी एजेंसी वसूलेगी बिजली बिल

Tue, 22 Dec 2020 12:50 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 22 Dec 2020 12:50 AM IST
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Recovery agency carry light bill like as bank
झांसी। बिजली विभाग ने ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं से बकाया बिल वसूलने के लिए बैंक की तरह ही आगरा की एक रिकवरी एजेंसी को ठेका दे दिया है। यह एजेंसी नए साल से अपना काम शुरू करेगी। शुरूआत में एजेंसी को 30 करोड़ रुपये वसूलने का लक्ष्य दिया गया है। बदले में कंपनी को तीन से चार फीसदी कमीशन दिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र के 1.03 लाख उपभोक्ताओं पर 540 करोड़ रुपये बकाया चल रहा है।
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जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में 35 सबस्टेशन हैं, जिनसे 1.59 लाख उपभोक्ता जुड़े हैं। इनमें 1.03 लाख उपभोक्ताओं पर 540 करोड़ रुपये का बकाया चल रहा है। पिछले कई सालों से अधिकारी ग्रामीण उपभोक्ताओं से बकाया वसूलने के लिए तमाम प्रयास कर चुके हैं। जैसे गांव- गांव में वसूली शिविर लगाए, कई गांवों की बिजली काट दी गई, बिल जमा करने के लिए मोबाइल वैन गांव- गांव भेजी गईं। मगर, उपभोक्ता बकाया देने के लिए तैयार नहीं हुए। इस बार विभाग ने बकाया वसूलने के लिए आगरा की पाइबटल रिकवरी एजेंसी को ठेका दिया है। एजेंसी को शुरूआत में 30 करोड़ रुपये वसूलने के निर्देश दिए गए हैं। बदले में एजेंसी को वसूली गई राशि पर तीन से चार प्रतिशत कमीशन दिया जाएगा। एजेंसी का जब 12 लाख रुपये कमीशन बन जाएगा, तभी उसका भुगतान होगा।
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- ग्रामीण उपभोक्ताओं से बकाया वसूलने के लिए आगरा की रिकवरी एजेंसी को ठेका दिया गया है। एजेंसी में 150 कर्मी तैनात होंगे, जो गांव- गांव जाकर वसूली का काम करेंगे। एजेंसी कर्मियों से जो विवाद करेगा, उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। - जेपीएन सिंह, अधीक्षण अभियंता ग्रामीण।
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यहां बने हैं सबस्टेशन
जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों बड़ागांव, बबीना, बरुआसागर, सकरार, टहरौली, गुरसराय, गरौठा, मोंठ, समथर, चिरगांव, मऊरानीपुर, बामौर, एरच, पूंछ, भेल, बैदोरा समेत 35 स्थानों पर सबस्टेशन बने हैं।

मोबाइल वैन नहीं हो सकी सफल
जिले के 465 गांवों में विभाग के पास आज भी हर महीने बिल पहुंचाने और रीड़िंग करवाने की कोई व्यवस्था नहीं है। इन गांवों में अधिकांश मीटर खराब पड़े हैं। ग्रामीणों को खुद ही कार्यालय में बिल बनवाने आना पड़ता है। साल छह महीने में बिल बनता भी है तो वह न्यूनतम रीडिंग के हिसाब से बना दिया जाता है। बड़ी राशि का बिल हाथ में आने पर ग्रामीण उसे जमा करने से पीछे हट जाते हैं। बाबू एक दिन में बिल संशोधित कर दे, यह संभव नहीं है। इस कारण बिल लंबित पड़े रहते हैं। इस समस्या को कम करने के लिए विभाग ने एक सितंबर 2017 से मोबाइल कैश कलेक्शन वैन की शुरूआत की थी। कुछ महीने बाद चार और वैन चलाईं गईं। यह वैन गांव-गांव जाकर उपभोक्ताओं के बिल जमा करने का काम करती थी, लेकिन यह योजना डेढ़ साल भी नहीं चल सकी। विभाग को प्रत्येक वैन को 65 हजार रुपये किराया देना पड़ता था, जिसके सापेक्ष वसूली न के बराबर हो रही थी। मजबूरन योजना को बंद कर दिया गया।
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