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Jhansi News: गुरुकुल पद्धति से ग्रहण की शिक्षा, अब बढ़ा रहे गुरुओं का मान
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संस्कृत विद्यापीठ महाविद्यालय के प्राचार्य रहे डा. हरिपति सहाय कौशिक ने दिया बड़ा योगदान
संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। जिले के ग्राम वमनुवा में संस्कृत विद्यापीठ महाविद्यालय में कई विद्यार्थियों ने गुरुकुल पद्धति से पठन-पाठन किया और उच्च पदों पर आसीन होकर अपने महाविद्यालय और गुरु का मान बढ़ा रहे हैं। इसमें पूर्व प्राचार्य डा. हरपति सहाय कौशिक का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्राचीन संस्कृत साहित्य के ग्रंथों को उपलब्ध कराया और आधुनिक तकनीकी ज्ञान से भी जोड़ा।
संस्कृत और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में गुरुकुल पद्धति पर आधारित जनपद का एकमात्र आवासीय संस्कृत विद्यापीठ महाविद्यालय बुंदेलखंड में प्रसिद्ध रहा है। यहां से देवभाषा संस्कृत की पढ़ाई के बाद कई विद्यार्थी विभिन्न शैक्षिक संस्थाओं में गए। सेना में धर्मगुरु के पदों पर भी चयनित हुए। अनेक छात्र गुरु शिष्य परंपरा में रहकर वैदिक विद्वान के रूप में कर्मकांड और आध्यात्मिक क्षेत्र में प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं। महाविद्यालय में प्राचार्य रहे डा. हरपति सहाय कौशिक ने बताया कि उन्होंने महाविद्यालय के पुस्तकालय में प्राचीन संस्कृत साहित्य की लगभग डेढ़ हजार से अधिक पुस्तकों की व्यवस्था कराई। चारों वेद, सभी 18 पुराण और ज्योतिष एवं कर्मकांड के ग्रंथों को संग्रहित किया। कर्मकांड के प्रशिक्षण के लिए यज्ञशाला भी बनवाई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। जिले के ग्राम वमनुवा में संस्कृत विद्यापीठ महाविद्यालय में कई विद्यार्थियों ने गुरुकुल पद्धति से पठन-पाठन किया और उच्च पदों पर आसीन होकर अपने महाविद्यालय और गुरु का मान बढ़ा रहे हैं। इसमें पूर्व प्राचार्य डा. हरपति सहाय कौशिक का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्राचीन संस्कृत साहित्य के ग्रंथों को उपलब्ध कराया और आधुनिक तकनीकी ज्ञान से भी जोड़ा।
संस्कृत और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में गुरुकुल पद्धति पर आधारित जनपद का एकमात्र आवासीय संस्कृत विद्यापीठ महाविद्यालय बुंदेलखंड में प्रसिद्ध रहा है। यहां से देवभाषा संस्कृत की पढ़ाई के बाद कई विद्यार्थी विभिन्न शैक्षिक संस्थाओं में गए। सेना में धर्मगुरु के पदों पर भी चयनित हुए। अनेक छात्र गुरु शिष्य परंपरा में रहकर वैदिक विद्वान के रूप में कर्मकांड और आध्यात्मिक क्षेत्र में प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं। महाविद्यालय में प्राचार्य रहे डा. हरपति सहाय कौशिक ने बताया कि उन्होंने महाविद्यालय के पुस्तकालय में प्राचीन संस्कृत साहित्य की लगभग डेढ़ हजार से अधिक पुस्तकों की व्यवस्था कराई। चारों वेद, सभी 18 पुराण और ज्योतिष एवं कर्मकांड के ग्रंथों को संग्रहित किया। कर्मकांड के प्रशिक्षण के लिए यज्ञशाला भी बनवाई।
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