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राशन, पानी के लिए किसानों ने कलेक्ट्रेट में डाला डेरा

Tue, 19 Apr 2016 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 19 Apr 2016 12:31 AM IST
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Rations , water poured into the farmers camped Collectorate
dhrna prdrsn, jhansi news - फोटो : amar ujala
झांसी। सूखे से झुलस रहे क्षेत्र के किसानों ने विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट में हंगामेदार प्रदर्शन किया। इस दौरान किसान जिलाधिकारी चैंबर के पोर्च में बैलगाड़ी बांधे रहे। परिसर में तंबू लगाकर देर रात तक यहां किसानों का डेरा रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को समझाने की कोशिश भी की, परंतु वह नहीं माने। उन्होंने मांग पूरी न होने तक कलेक्ट्रेट में डेरा डाले रहने का एलान किया।
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गांव में न पीने को पानी है और न ही खाने को अन्न। पशुओं के लिए चारे तक का इंतजाम भी नहीं है। हाथ सभी के खाली हैं, परंतु राहत किट चुनिंदा परिवारों को ही दी जा रही है। पात्र होने के बाद भी ग्रामीण विधवा, वृद्धावस्था व समाजवादी पेंशन के लाभ से वंचित हैं और तो और तमाम गरीबों को सरकारी राशन भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में हम कैसे जिएं? प्रशासनिक अधिकारियों से यह सवाल कलेक्ट्रेट में आंदोलनरत किसानों ने किए। बुंदेलखंड किसान पंचायत के अध्यक्ष महेंद्र शर्मा के नेतृत्व में आयोजित खूंटा गाढ़ो आंदोलन के तहत सोमवार को सुबह से ही किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर में डेरा जमा लिया।
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जिलाधिकारी के पोर्च में उन्होंने बैलगाड़ी खड़ी कर दी व बकरियां बांध दीं। जबकि, परिसर में तंबू लगाकर सैकड़ों किसान धरने पर बैठ गए। इस दौरान उन्होंने लोक गीतों के जरिये अपनी पीड़ा बताई। दिन में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) रमाशंकर गुप्ता ने मौके पर पहुंचकर किसानों को समझाने की कोशिश की, परंतु वह अपनी मांगों पर अड़े रहे। शाम को नगर मजिस्ट्रेट भी मौके पर पहुंचे, लेकिन किसानों ने समस्या निस्तारण न होने तक कलेक्ट्रेट में डेरा डाले रहने की चेतावनी दी। देर रात तक किसान हाथों में लाठियां लेकर कलेक्ट्रेट में जमे रहे।
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किसानों ने यह रखीं प्रमुख मांगें
- पुनर्वास की जमीन पर किसानों को मालिकाना हक दिया जाए।  
- कुदरत के कोप से खराब हुई फसलों का वंचित किसानों को तत्काल मुआवजा मिले।
- पशुओं को चारे के लिए प्रत्येक ब्लाक में कई-कई आश्रय स्थल खोले जाएं।
- संकटग्रस्त गांवों में पेयजल की व्यवस्था की जाए।
- ग्राम बमेर में चकबंदी कार्य बंद कराया जाए।

अपशब्दों का किया प्रयोग
खूंटा गाढ़ो आंदोलन के दौरान किसान बेहद आक्रोशित नजर आए। यहां तक कि उन्होंने प्रशासन के लिए जमकर अपशब्दों का प्रयोग किया। किसान मोर्चा के अध्यक्ष ने भी अपने उद्बोधन में प्रशासन के लिए जमकर अपशब्द कहे। इस भाषा की लोगों ने आलोचना की।
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