{"_id":"602ad7728ebc3ee9296faf4e","slug":"rasoi-gass-food-oil-and-clothes-rate-increase-jhansi-news-jhs1886485190","type":"story","status":"publish","title_hn":"महंगाई ने तोड़े रिकार्ड, गैस, पेट्रोल, डीजल, खाद्य तेल के साथ कपड़े भी महंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महंगाई ने तोड़े रिकार्ड, गैस, पेट्रोल, डीजल, खाद्य तेल के साथ कपड़े भी महंगे
Tue, 16 Feb 2021 03:59 PM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, झाँसी
अमर उजाला ब्यूरो, झाँसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 16 Feb 2021 03:59 PM IST
विज्ञापन
रसोई गैस की कीमतों में पिछले एक पखवाड़े के भीतर तीन बार बढ़ोतरी हो चुकी है। पेट्रोल-डीजल के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। खाद्य तेल की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। लगभग पच्चीस फीसदी की वृद्धि के साथ अब कपड़े भी महंगे हो चले हैं। यानी कि बाजार में हर ओर महंगाई छाई हुई है। इससे आम आदमी का बजट बुरी तरह से गड़बड़ाया हुआ है।
सभी को सरकार से कीमतों में नियंत्रण की दरकार है।
कोरोना काल में लागू किए गए लॉकडाउन व अन्य विपरीत परिस्थितियों से रोजगार और कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। इससे लोगों की आमदनी पर खासा असर आया है। अभी लोग इस मार से उबर भी नहीं पाए कि अब महंगाई ने आम आदमी को अपनी चपेट में ले लिया है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि बगैर सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलिंडर की कीमतों में पिछले एक पखवाड़े के भी तीन बार उछाला आया है और कीमतों में 75 रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
पिछले एक माह में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी खासी तेजी आई है। पेट्रोल 3.29 रुपये प्रति लीटर और डीजल 4.48 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो गया है। दो माह के भीतर खाद्य तेल के भाव 25-30 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं। इसके अलावा अब कपड़ों की कीमतों में भी तेजी का रुख अपना लिया है। साड़ी हो या रेडीमेड कपड़े, सभी की कीमतें पच्चीस फीसदी तक बढ़ गई हैं। इसकी वजह कपड़ा बुनने में काम आने वाले सभी प्रकार के धागों की कीमतों में आई तेजी को बताया जा रहा है।
विज्ञापन
पेट्रोल - डीजल एक महीने पहले और अब
15 जनवरी 15 फरवरी बढ़ोतरी
पेट्रोल 84.03 87.32 3.29 रुपये
डीजल 74.84 79.32 4.48 रुपये
यूं बढ़े बगैर सब्सिडी वाले सिलिंडर के दाम
01 फरवरी - 728.50 रुपये
04 फरवरी - 753.50 रुपये
15 फरवरी - 803.50 रुपये
खाद्य तेल इस तरह गरमाया (प्रति लीटर)
डेढ़ माह पहले अब
रिफाइंड तेल 90 115-120
सरसों तेल 110 136
लॉकडाउन का घाटा अब किया जा रहा पूरा
झांसी। कोरोना काल में कपड़ों का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ। लॉकडाउन और बाद में शादियां कम होने की वजह से सभी प्रकार के कपड़ों की बिक्री धड़ाम हो गई। यहां तक कि स्कूल यूनिफार्म तक की बिक्री नहीं हुई। कपड़ा कारोबारियों के अनुसार कपड़ा बनाने वाली कंपनियों को भारी नुकसान हुआ है। उनके खर्चे बराबर जारी हैं, जबकि बिक्री रसातल में आ गई है।
घाटा पूरा करने के लिए कीमतें बढ़ा दी गईं हैं। रेडीमेड कपड़ा व्यापारी राजकुमार डेंगरे के अनुसार कपड़ों की कीमतों में हर साल 05-10 फीसदी की वृद्धि सामान्य तौर पर होती है। लेकिन, इस बार कीमत एकाएक 25 फीसदी तक बढ़ गई हैं। ब्रांडेड व नॉन ब्रांडे सभी के दाम बढ़े हैं। साड़ी कारोबारी नंदू गुप्ता के अनुसार महंगी, सस्ती सभी प्रकार की साड़ियों की कीमतें बढ़ गई हैं।
रिफाइंड व सरसों का तेल का हर घर में उपयोग होता है। गैस सिलिंडर भी रसोई की जरूरी चीज है। सरकार को इनकी कीमतों में नियंत्रण के उपाय करने चाहिए।
दीपिका, सीपरी बाजार
कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं, जबकि आमदनी उस रफ्तार से नहीं बढ़ रही है। सरकार की कीमतों में नियंत्रण की बातें धरातल पर नजर नहीं आती हैं।
सुषमा, मिशन कंपाउंड
रसोई गैस सिलिंडर की कीमत लगातार बढ़ रही है, जबकि इस पर मिलने वाली सब्सिडी कम होती जा रही है। सरकार को सिलिंडर पर सब्सिडी बढ़ानी चाहिए।
ज्योति गुप्ता, जल संस्थान के पास
खाद्य पदार्थों की कीमतें नियंत्रित रहें, इसके लिए सरकार को प्रभावी पहल करना चाहिए। सरकार को आम आदमी को राहत देने का काम करना चाहिए।
भावना, मिशन कंपाउंड
विज्ञापन
सभी को सरकार से कीमतों में नियंत्रण की दरकार है।
कोरोना काल में लागू किए गए लॉकडाउन व अन्य विपरीत परिस्थितियों से रोजगार और कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। इससे लोगों की आमदनी पर खासा असर आया है। अभी लोग इस मार से उबर भी नहीं पाए कि अब महंगाई ने आम आदमी को अपनी चपेट में ले लिया है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि बगैर सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलिंडर की कीमतों में पिछले एक पखवाड़े के भी तीन बार उछाला आया है और कीमतों में 75 रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
विज्ञापन
पिछले एक माह में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी खासी तेजी आई है। पेट्रोल 3.29 रुपये प्रति लीटर और डीजल 4.48 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो गया है। दो माह के भीतर खाद्य तेल के भाव 25-30 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं। इसके अलावा अब कपड़ों की कीमतों में भी तेजी का रुख अपना लिया है। साड़ी हो या रेडीमेड कपड़े, सभी की कीमतें पच्चीस फीसदी तक बढ़ गई हैं। इसकी वजह कपड़ा बुनने में काम आने वाले सभी प्रकार के धागों की कीमतों में आई तेजी को बताया जा रहा है।
विज्ञापन
पेट्रोल - डीजल एक महीने पहले और अब
15 जनवरी 15 फरवरी बढ़ोतरी
पेट्रोल 84.03 87.32 3.29 रुपये
डीजल 74.84 79.32 4.48 रुपये
यूं बढ़े बगैर सब्सिडी वाले सिलिंडर के दाम
01 फरवरी - 728.50 रुपये
04 फरवरी - 753.50 रुपये
15 फरवरी - 803.50 रुपये
खाद्य तेल इस तरह गरमाया (प्रति लीटर)
डेढ़ माह पहले अब
रिफाइंड तेल 90 115-120
सरसों तेल 110 136
लॉकडाउन का घाटा अब किया जा रहा पूरा
झांसी। कोरोना काल में कपड़ों का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ। लॉकडाउन और बाद में शादियां कम होने की वजह से सभी प्रकार के कपड़ों की बिक्री धड़ाम हो गई। यहां तक कि स्कूल यूनिफार्म तक की बिक्री नहीं हुई। कपड़ा कारोबारियों के अनुसार कपड़ा बनाने वाली कंपनियों को भारी नुकसान हुआ है। उनके खर्चे बराबर जारी हैं, जबकि बिक्री रसातल में आ गई है।
घाटा पूरा करने के लिए कीमतें बढ़ा दी गईं हैं। रेडीमेड कपड़ा व्यापारी राजकुमार डेंगरे के अनुसार कपड़ों की कीमतों में हर साल 05-10 फीसदी की वृद्धि सामान्य तौर पर होती है। लेकिन, इस बार कीमत एकाएक 25 फीसदी तक बढ़ गई हैं। ब्रांडेड व नॉन ब्रांडे सभी के दाम बढ़े हैं। साड़ी कारोबारी नंदू गुप्ता के अनुसार महंगी, सस्ती सभी प्रकार की साड़ियों की कीमतें बढ़ गई हैं।
रिफाइंड व सरसों का तेल का हर घर में उपयोग होता है। गैस सिलिंडर भी रसोई की जरूरी चीज है। सरकार को इनकी कीमतों में नियंत्रण के उपाय करने चाहिए।
दीपिका, सीपरी बाजार
कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं, जबकि आमदनी उस रफ्तार से नहीं बढ़ रही है। सरकार की कीमतों में नियंत्रण की बातें धरातल पर नजर नहीं आती हैं।
सुषमा, मिशन कंपाउंड
रसोई गैस सिलिंडर की कीमत लगातार बढ़ रही है, जबकि इस पर मिलने वाली सब्सिडी कम होती जा रही है। सरकार को सिलिंडर पर सब्सिडी बढ़ानी चाहिए।
ज्योति गुप्ता, जल संस्थान के पास
खाद्य पदार्थों की कीमतें नियंत्रित रहें, इसके लिए सरकार को प्रभावी पहल करना चाहिए। सरकार को आम आदमी को राहत देने का काम करना चाहिए।
भावना, मिशन कंपाउंड