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Jhansi News: रानी लक्ष्मीबाई के ससुर ने बनवाया था गणेश मंदिर
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- 200 साल पुराना है इतिहास, यही हुई थी रानी की राजा गंगाधर राव से शादी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। पानी वाली धर्मशाला के पास स्थित करीब 200 साल पुराने गणेश मंदिर का निर्माण रानी लक्ष्मीबाई के ससुर ने कराया था। रानी लक्ष्मीबाई की शादी भी इसी मंदिर में हुई थी। इन दिनों मंदिर में गणेशोत्सव की तैयारियां तेजी से जारी हैं।
मंदिर कमेटी के सचिव संतोष खानवलकर ने बताया कि गणेश मंदिर का निर्माण रानी लक्ष्मीबाई के ससुर और झांसी के राजा शिवराम भाऊ नेवालकर ने वर्ष 1796 से 1814 तक कराया था। तब से लेकर अब तक यह झांसी के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इसी मंदिर में 19 मई 1842 को रानी लक्ष्मीबाई की शादी झांसी के राजा गंगाधर राव के साथ हुई थी।
शादी से पूर्व रानी को मनु के नाम से जाना जाता है। महाराष्ट्रीय परंपरा के अनुसार वैवाहिक संस्कार के बाद इसी मंदिर में मनु को नया नाम लक्ष्मीबाई मिला था, जो कालांतर में नारी अस्मिता का प्रतीक बनकर उभरा।
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इसके अलावा यह मंदिर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का साक्षी भी है। युद्ध के दौरान अंग्रेजों के तोप के गोले से मंदिर की इमारत बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसे युद्ध की समाप्ति के बाद महाराष्ट्र समाज के लोगों ने दुरुस्त कराया था।
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जारी है जीर्णोद्धार
वर्ष 1917 में झांसी के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर आत्माराम गोविंद दबे ने गणेश मंदिर का वृहद स्तर पर जीर्णोद्धार कराया था। इसके बाद अब जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। यह काम महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी की ओर से कराया जा रहा है। राजस्थान के शिल्पी इसे एक बार फिर से तराश रहे हैं।
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कल होगी प्रतिमा की स्थापना
गणेश मंदिर में शनिवार को सुबह 11 बजे विधि विधान के साथ गणेश प्रतिमा की स्थापना होगी। जबकि, विसर्जन शोभा यात्रा 14 सितंबर को निकाली जाएगी। इसी बीच मंदिर में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठानों के अलावा अंताक्षरी, वाद-विवाद प्रतियोगिता, एक मिनट शो, सुगम संगीत, संगीतमय अखंड रामायण पाठ आदि का आयोजन होगा।
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मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए उसका जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। इसके अलावा 7 सितंबर से शुरू होने जा रहे गणेशोत्सव की तैयारियां भी तेजी से जारी है। - संतोष खानवलकर, सचिव-महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी।
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। पानी वाली धर्मशाला के पास स्थित करीब 200 साल पुराने गणेश मंदिर का निर्माण रानी लक्ष्मीबाई के ससुर ने कराया था। रानी लक्ष्मीबाई की शादी भी इसी मंदिर में हुई थी। इन दिनों मंदिर में गणेशोत्सव की तैयारियां तेजी से जारी हैं।
मंदिर कमेटी के सचिव संतोष खानवलकर ने बताया कि गणेश मंदिर का निर्माण रानी लक्ष्मीबाई के ससुर और झांसी के राजा शिवराम भाऊ नेवालकर ने वर्ष 1796 से 1814 तक कराया था। तब से लेकर अब तक यह झांसी के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इसी मंदिर में 19 मई 1842 को रानी लक्ष्मीबाई की शादी झांसी के राजा गंगाधर राव के साथ हुई थी।
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शादी से पूर्व रानी को मनु के नाम से जाना जाता है। महाराष्ट्रीय परंपरा के अनुसार वैवाहिक संस्कार के बाद इसी मंदिर में मनु को नया नाम लक्ष्मीबाई मिला था, जो कालांतर में नारी अस्मिता का प्रतीक बनकर उभरा।
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इसके अलावा यह मंदिर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का साक्षी भी है। युद्ध के दौरान अंग्रेजों के तोप के गोले से मंदिर की इमारत बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसे युद्ध की समाप्ति के बाद महाराष्ट्र समाज के लोगों ने दुरुस्त कराया था।
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जारी है जीर्णोद्धार
वर्ष 1917 में झांसी के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर आत्माराम गोविंद दबे ने गणेश मंदिर का वृहद स्तर पर जीर्णोद्धार कराया था। इसके बाद अब जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। यह काम महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी की ओर से कराया जा रहा है। राजस्थान के शिल्पी इसे एक बार फिर से तराश रहे हैं।
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कल होगी प्रतिमा की स्थापना
गणेश मंदिर में शनिवार को सुबह 11 बजे विधि विधान के साथ गणेश प्रतिमा की स्थापना होगी। जबकि, विसर्जन शोभा यात्रा 14 सितंबर को निकाली जाएगी। इसी बीच मंदिर में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठानों के अलावा अंताक्षरी, वाद-विवाद प्रतियोगिता, एक मिनट शो, सुगम संगीत, संगीतमय अखंड रामायण पाठ आदि का आयोजन होगा।
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मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए उसका जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। इसके अलावा 7 सितंबर से शुरू होने जा रहे गणेशोत्सव की तैयारियां भी तेजी से जारी है। - संतोष खानवलकर, सचिव-महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी।