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27 वर्षों से पौधे रोप रहे रामकुमार अब ‘रामवृक्ष’ के नाम से पहचाने जाते हैं

Mon, 11 Jul 2022 12:51 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 11 Jul 2022 12:51 AM IST
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Ramkumar, who has been planting saplings for 27 years, is now known as 'Ram Vriksha'
झांसी। शहर के निवासी रामकुमार को अब ‘रामवृक्ष’ के नाम से पहचाना जाने लगा है। उन्हें ये नाम मिला है उनके काम से। रेलवे में लोको पायलट के पद पर कार्यरत रामकुमार नामदेव पिछले 27 सालों से पौधरोपण करते आ रहे हैं। अब तक वे 1374 पौधे लगा चुके हैं। खास बात यह है कि वे लगाए हुए सभी पौधों का अपने पास रिकॉर्ड भी रखते हैं। किसी पौधे के नष्ट हो जाने पर वे उसके स्थान पर दूसरा पौधा रोप देते हैं। उनके लगाए हुए सैकड़ों पौधे अब विशाल वृक्ष में तब्दील हो चुके हैं। बगैर किसी शोर-शराबे के उनका पौधरोपण का अभियान लगातार जारी है।
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रामकुमार ने बताया कि ट्रेन से आते-जाते समय आसपास की बंजर जमीन को देखकर उन्हें बड़ा कष्ट होता था। धरती को हरा-भरा बनाने के लिए साल 1995 में अभियान शुरू किया था। हालांकि, ड्यूटी के बाद कम ही समय मिल पाता था। ऐसे में ड्यूटी के साथ पौधरोपण शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि 2012 तक वे मालगाड़ी चलाते रहे। मालगाड़ी में हाल्ट (ठहराव) लंबे मिल जाते थे। इस समय का उपयोग वे पौधरोपण के लिए करते थे। आसपास बिखरे पत्थर बटोर कर उसका ट्री-गार्ड भी तैयार कर देते हैं। दोबारा से उसी रूट पर जाने पर पौधे की खबर लेते रहते थे। पौधों को सींचने के लिए कई बोतलों में पानी भरकर साथ में ले जाते थे।
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उन्होंने बताया कि ग्वालियर, आगरा, जालौन, बांदा व कानपुर में उनके द्वारा रोपे गए सैकड़ों पौधे अब वृक्ष में तब्दील हो चुके हैं। पिछले दस सालों से सवारी गाड़ी चला रहे हैं। तब से वे झांसी में ही पौधे रोपते आ रहे हैं। यहां स्टेशन, रेल कारखाने के इर्दगिर्द व हाट के मैदान में उनके द्वारा रोपे गए तमाम पौधे छायादार वृक्ष बन चुके हैं।
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रामकुमार ने बताया कि अपने रोपे हुए छोटे से पौधे को बड़ा होेता देखकर ठीक उसकी प्रकार की अनुभूति होती है, जिस प्रकार माता-पिता को अपनी संतानों को बढ़ता देखकर होती है। पेड़ की छाया के नीचे लोगों को बैठा देखकर अलग ही सुकून मिलता है।
पत्नी का भी मिला भरपूर सहयोग
झांसी। रामकुमार ने बताया कि उनके इस काम में रानी देवी का भी हमेशा से पूरा सहयोग मिलता है। उन्होंने बताया कि वे पौध अपने घर पर ही तैयार करते हैं। जब वे ड्यूटी पर चले जाते हैं तो पत्नी ही पौध का ख्याल रखती है। तैयार होने पर पत्नी पौध को रोपने के लिए उन्हें सौंप देती हैं।

साइकिल पर रहता है पौधरोपण का पूरा सामान
झांसी। राकुमार साइकिल से चलते हैं। उनकी साइकिल पर पौधरोपण का पूरा सामान रहता है। हैंडल पर एक ओर लटके थैले में पानी से भरी आठ-दस बोतलें होती हैं, जबकि दूसरी ओर गड्ढे खोदने व ट्री-गार्ड बनाने के लिए कन्नी, छेनी, हथौड़ा, आरी जैसे औजार भी रहते हैं। साइकिल पर गैंती, फाबड़ा व सब्बल हर समय होता है।
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