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रमजान का जुमा : मस्जिदों में उमडेे़ रोजेदार
Sat, 11 May 2019 12:49 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Sat, 11 May 2019 12:49 AM IST
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ramdan
- फोटो : amarujala
झांसी। रमजान के पहले जुमे पर मस्जिदें रोजेदारों से भरी रहीं। मस्जिदों में अंदर जगह न होने तक तमाम लोगों को बाहर नमाज अदा करनी पड़ी। नमाज के बाद रहमत और बरकतों के लिए दुआएं मांगी गईं। जुमे की नमाज से पहले मस्जिदों में इमामों ने इस मुबारक महीने फजीलतें को बयां कीं। माहे रमजान को अल्लाह की ओर से बेहतर इनाम बताया गया।
नमाज से पहले इमाम ने कहा कि रमजान एक ऐसा महीना है, जिसमें दोजख के दरवाजों को बंद का रहमत और बरकतों के दरवाजों को खोल दिया जाता है। रोजेदार की दुआ हर हाल में अल्लाह कबूल करता हैं। इस महीने के चांद का दीदार होते ही शैतान को कैद कर दिया जाता है। इस पाक महीने में एक रात ऐसी भी है जो हजार रातों की इबादतों से बेहतर है। लोगों को इस पाक महीने की अहमियत को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस दिन लोग रमजान के महत्व से वाकिफ हो जाएंगे तो उनको कुछ बताने की जरूरत नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि जो लोग इस पाक महीने की अहमियत को नहीं समझ रहे हैं वो लोग खसारे (नुकसान) में हैं। इस महीने में रोजे हर मर्द औरत व बालिग पर फर्ज किए गए हैं। जानबूझ कर रोजों को छोड़ने वाले गुनाह के हकदार हाेंगे। कहा कि जिस तरह से दुश्मन से बचने के लिए डाल की जरूरत होती है ठीक उसी तरह से शैतान के वार से रोजा महफूूज रखता है। इस दौरान रोजेदारों को लड़ाई, झगडे़ व गलत कामों से दूर रहने की हिदायत दी गई।
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तकरीर के बाद शहर भर की मस्जिदों में नमाजे जुमा अदा की गई। नमाज के बाद मस्जिदों में दुआ हुई। अल्लाह से मुल्क में अमन चैन, भाईचारा, गर्मी से निजात, बीमारों को शिफा देने की दुआ की गई।
गंधीगर का टपरा स्थित मस्जिद बिसाती बाजार में मुफ्ती साबिर कासमी ने क हा कि अल्लाह को बंदों का दुआ मांगना काफी पसंद है। अल्लाह के खजाने में किसी भी चीज की कमी नहीं है। अल्लाह को सजदा काफी पसंद है। हमें अल्लाह की बंदगी के साथ पेश आना चाहिए। अल्लाह इफ्तार के वक्त रोजेदार की दुआ को कबूल करता है।
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नमाज से पहले इमाम ने कहा कि रमजान एक ऐसा महीना है, जिसमें दोजख के दरवाजों को बंद का रहमत और बरकतों के दरवाजों को खोल दिया जाता है। रोजेदार की दुआ हर हाल में अल्लाह कबूल करता हैं। इस महीने के चांद का दीदार होते ही शैतान को कैद कर दिया जाता है। इस पाक महीने में एक रात ऐसी भी है जो हजार रातों की इबादतों से बेहतर है। लोगों को इस पाक महीने की अहमियत को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस दिन लोग रमजान के महत्व से वाकिफ हो जाएंगे तो उनको कुछ बताने की जरूरत नहीं होगी।
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उन्होंने कहा कि जो लोग इस पाक महीने की अहमियत को नहीं समझ रहे हैं वो लोग खसारे (नुकसान) में हैं। इस महीने में रोजे हर मर्द औरत व बालिग पर फर्ज किए गए हैं। जानबूझ कर रोजों को छोड़ने वाले गुनाह के हकदार हाेंगे। कहा कि जिस तरह से दुश्मन से बचने के लिए डाल की जरूरत होती है ठीक उसी तरह से शैतान के वार से रोजा महफूूज रखता है। इस दौरान रोजेदारों को लड़ाई, झगडे़ व गलत कामों से दूर रहने की हिदायत दी गई।
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तकरीर के बाद शहर भर की मस्जिदों में नमाजे जुमा अदा की गई। नमाज के बाद मस्जिदों में दुआ हुई। अल्लाह से मुल्क में अमन चैन, भाईचारा, गर्मी से निजात, बीमारों को शिफा देने की दुआ की गई।
गंधीगर का टपरा स्थित मस्जिद बिसाती बाजार में मुफ्ती साबिर कासमी ने क हा कि अल्लाह को बंदों का दुआ मांगना काफी पसंद है। अल्लाह के खजाने में किसी भी चीज की कमी नहीं है। अल्लाह को सजदा काफी पसंद है। हमें अल्लाह की बंदगी के साथ पेश आना चाहिए। अल्लाह इफ्तार के वक्त रोजेदार की दुआ को कबूल करता है।