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परेशानियों में गुजरा 2015

Thu, 31 Dec 2015 02:15 AM IST
ब्यूरो
ब्यूरो Updated Thu, 31 Dec 2015 02:15 AM IST
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railway
झांसी। रेलवे के लिए यह साल परेशानियों भरा रहा। 17 जून को इटारसी स्टेशन के आरआरआई सिस्टम में लगी आग के कारण रेलवे को करोड़ों रुपयों का नुकसान हुआ।
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26 मार्च को बीना से झांसी की तरफ आ रही मालगाड़ी के छह डीजल टैंकर के तालबेहट स्टेशन के निकट पटरी से उतरने व चार अगस्त को मध्य प्रदेश के हरदा में दो ट्रेनों के पटरी से उतरने से भी रेलवे को अच्छी खासी चपत लगी। महीनों यातायात प्रभावित हुआ। यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

रही सही कसर महिला यात्रियों से छेड़खानी की घटनाओं ने पूरी कर दी। यात्रियों के सामान चोरी होने के मामलों में जबर्दस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस साल झांसी स्टेशन पर जरूर यात्रियों की सुविधाओं में बढ़ोतरी हुई।
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यह रही उपलब्धि

- झांसी व ग्वालियर स्टेशन पर एस्केलेटर का संचालन शुरू
- झांसी स्टेशन पर उच्च क्षमता के 54 सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम अंतिम चरण में चल रहा है।
- ट्रेनों में साफ- सफाई करने का ठेका 26 दिसंबर 2013 के बाद फिर शुरू।
- 26 कोचों की वाशिंग पिट बनकर हुई तैयार।
- सांसद निधि से स्टेशन पर लगी बेंच।
- भिंड- इटावा नई रेल लाइन पर मालगाड़ियों का संचालन शुरू।

यह नहीं हो सका
 -कर्मचारियों व सामग्री की कमी के कारण कोच मरम्मत कारखाने में गति नहीं पकड़ सका काम।
-ला फास्टा के बंद होने से लजीज व्यंजनों को तरस रहे यात्री।
-गरीब यात्रियों को रेलवे परिसर में उपलब्ध नहीं हो सकी सुविधाएं।
खूब हुई चर्चा
-रेलवे यूनियन का एडीआरएम से विवाद
-रेलवे अस्पताल में रनिंग कर्मचारियों का बड़ी संख्या में अनफिट होना
-रेलवे स्टेशन पर ला फास्टा का चालू व बंद होना
-चार अप्रैल को रेलवे बोर्ड अध्यक्ष का झांसी स्टेशन का आकस्मिक निरीक्षण
-23 फरवरी की रात राजधानी एक्सप्रेस में सवार फरीदाबाद के व्यापारी विमल अग्रवाल की पत्नी मंजू के बैग से एक करोड़ के जेवरात चोरी।

ज्यों-ज्यों दवा की मर्ज बढ़ता गया
झांसी। पुलिस महकमे के लिए वर्ष 2015 उपलब्धियों भरा रहा। जनता से जुड़ने के लिए कई प्रयोग किए गए। अपराधों का खुलासा भी हुआ, लेकिन अपराधों में कमी नहीं आई। महिला उत्पीड़न तो तीन साल में सबसे अधिक बढ़ा।
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जनता की समस्याओं के निदान के लिए आईजी कानपुर द्वारा 16 अप्रैल को ‘एक नंबर भरोसे का’ लांच किया गया। आठ माह (259 दिन) में झांसी से ‘भरोसा’ के पास 6926 लोगों ने शिकायतें कीं जिनमें से 6880 का निदान कराया जा चुका है। आईजी के  ‘भरोसा’ को प्रौढ़ होता देख जिले के कप्तानों ने भी इस दिशा में प्रयास किए।

तत्कालीन एसएसपी किरन एस. ने एप लांच किया, जिसकी आयु काफी अल्प रही। वर्तमान एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे ने 24 नवंबर को हेल्प लाइन नंबर 9454403666 लांच किया है, जिसमें अपराध, अपराधी, अवैध कारोबार आदि के संबंध में सूचनाएं मांगी गई हैं। 33 दिन के हेल्प लाइन नंबर पर 50 गुप्त सूचनाएं मिली हैं, जिनमें से अधिकांश पर पुलिस ने कार्रवाई की है।

महिला उत्पीड़न और महिलाओं से होने वाले अपराध पर अंकुश को शासन से लेकर जिला स्तर पर प्रयास किए गए, लेकिन सफलता की जगह असफलता हाथ आई। इस बार हत्याओं व चेन स्नैचिंग को छोड़ दिया जाए तो बलात्कार, अपहरण, महिला उत्पीड़न, दहेज हत्या के ग्राफ में इजाफा हुआ है।

-पांच अक्तूबर को डा. अभय गुप्ता निवासी वीरांगना नगर के पुत्र आरुष का फिरौती के लिए अपहरण किया गया। पुलिस ने नौ घंटे में अपहृत बालक को मुक्त कराकर दो अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार किया।

-पांच दिसंबर को कोतवाली के सर्राफा कारोबारी कमलेश अग्रवाल का अपहरण हुआ। बदमाशों ने 25 लाख रुपये की फिरौती मांगी। पुलिस ने आठ घंटे में ही प्रेमनगर के राजगढ़ के जंगल में बने मकान की घेराबंदी करके अपहृत को मुक्त करा लिया। इस मामले में महिला अपहर्ता समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया।

-दुर्दांत सरदार सिंह गुर्जर की गिरफ्तारी ने भी पुलिस को काफी राहत दी। हालांकि, सरदार को झांसी की पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी। 15 जुलाई को दतिया के उन्नाव बालाजी की पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।
अब भी है अनसुलझा है मामला

-सीपरी बाजार थाना क्षेत्र से अपहृत बालक परमजोत उर्फ कुक्की का अब तक पता नहीं चल सका।

बुंविवि- 2015
थोड़ा मिला, थोड़े की जरूरत है
सब हेड: साल 2015 में बीयू ने स्थापित किए कई कीर्तिमान, कई की रह गई दरकार
झांसी।  साल 2015 खत्म होने को है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का मूल्यांकन करें तो ‘डिजिटल विश्वविद्यालय’ के सपने को लेकर शुरू हुआ साल का सफर कई कीर्तिमान दे गया। कई बार दामन को दागदार भी कर गया। वहीं, कुछ सपने जो पूरे नहीं हो सके, उसकी उम्मीद नए साल पर छोड़कर जा रहा है।

उपलब्धियों से भरी झोली
-साल 2015 में बुंविवि को आईएसओ प्रमाणित होने का गौरव मिला।
-बुंविवि में अलग-अलग विभागों में दस स्मार्ट क्लासेस शुरू की गईं। 1975 से मौजूदा समय तक के विद्यार्थियों के चार्टों का डिजिटाइजेशन किया गया। ऐसा करने वाली यह पहली यूनिवर्सिटी बन गई।
-पूर्व वीसी ने ऑनलाइन टेंडर करवाने की घोषणा की। जल्द ही विश्वविद्यालय में टेंडर फॉर्म ऑनलाइन  भरे जाएंगे।
-सूचना के अधिकार के तहत मांगी जाने वाली जानकारियों को भी ऑनलाइन करने का निर्णय लिया गया। अब आवेदक की अपील दायर होने से ही उसकी मॉनीटरिंग शुरू हो जाएगी। आवेदक को लगातार कार्रवाई के बारे में अपडेट करने के साथ ही सूचना देने के समय की भी जानकारी मिल जाएगी।
-नवंबर महीने में परीक्षा भवन का मूल्यांकन केंद्र का भी शुभारंभ हो गया। अब यही पर कॉपियों की जांच की जाएगी। इससे पूर्व 17 अक्तूबर 2014 को राज्यपाल राम नाईक ने परीक्षा भवन के प्रशासनिक भवन को लोकार्पण किया था, जिसके बाद से यही पर बीयू अधिकांश परीक्षाएं कराता है। पांच हजार सीटों की क्षमता वाले इस भवन में सत्र 2015-16 के झांसी के प्राइवेट अभ्यर्थियों की परीक्षा होगी।
-पशु अनुसंधान कार्यशाला की भी नींव राज्यपाल द्वारा रखी गई। प्रयोगशाला का उद्देश्य आयुर्वेदिक दवाओं पर शोध करना है।
-स्ववित्त पोषित योजनांतर्गत कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के मानदेय में बढ़ोतरी पर मुहर लगा दी गई। शिक्षकों का मानदेय 15, तो कर्मचारियों का 20 फीसदी की वृद्धि हो जाएगी।
-बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को इस बार 31वें अंतर विश्वविद्यालय सेंट्रल जोन यूथ फेस्टिवल की मेजबानी का भी मौका मिला।

फिर भी रह गई कसर
-लार्ड बुद्धा, समता ब्वॉयज हॉस्टलों में पानी की समस्या का निदान नहीं किया जा सका।

-दिसंबर के शुरूआती सप्ताह में आयोजित हुई एल्युमिनाई मीट बुरी तरह फेल हो गई। इसके आयोजन से पूर्व विश्वविद्यालय द्वारा विदेशों से पुरातन छात्र आने की उम्मीद जताई जा रही थी लेकिन हाथों की उंगलियों के बराबर पुरातन छात्रों की उपस्थिति ने आयोजकों के प्रबंधन की हवा निकाल दी।

-पूर्व कुलपति ने अपने प्रयासों के चलते जुलाई में पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा तो करवा दी लेकिन इसको शुरू करवाने में सफलता हासिल नहीं कर पाए। एकेडमिक देख रहे अधिकारी वार्षिक कलेंडर के हिसाब से सितंबर में प्रस्तावित पीएचडी कोर्स वर्क को शुरू कराने में नाकाम हो गए।


-हर साल की तरह इस बार भी बीयू फर्जी डिग्रियों के दागों से बच नहीं पाया। बीयू की फर्जी मार्कशीट बनवाने के लगातार मामले सामने आते रहे। पांच-पांच लाख में बीएड की फर्जी डिग्रियां बांटने का मामला हो या फिर पीएचडी की फर्जी डिग्री का हर बार दामन पर छींटे विश्वविद्यालय पर आए।
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