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‘पुष्पावती’ को नालों के गंदे पानी से मिलेगा छुटकारा, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से होगी सफाई
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झांसी। सीपरी बाजार क्षेत्र के सात नालों का गंदा पानी जल्द ही पहूज (पुष्पावती) नदी में नहीं गिरेगा। नालों के पानी की सफाई के लिए शिवपुरी मार्ग बाईपास पर स्मार्ट सिटी योजना के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनने जा रहा है। इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए नगर निगम ने टेंडर डलवाने की प्रक्रिया को पूरा कर लिया है। फरवरी में काम शुरू होने की उम्मीद है। इस योजना के पूरे होने पर महानगर की सवा लाख आबादी को नदी के प्रदूषित पानी को नहीं पीना पड़ेगा। तत्कालीन सांसद / केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने पहूज नदी को गोद लिया था। लेकिन उनके कार्यकाल में नदी के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं हो सका।
पहूज नदी वर्षों से गंदी की जा रही है। रेलवे वर्कशाप, सीपरी बाजार, नंदनपुरा, प्रेमनगर, आवास विकास कॉलोनी समेत आसपास के नालों का गंदा पानी पहूज नदी में जा रहा है। खाती बाबा क्षेत्र से रेलवे वर्कशाप, रेलवे कॉलोनी, केके पुरी, संगम विहार से लहरगांव होते हुए नाला पहूज नदी में गिरता है। इसी तरह नंदनपुरा, ताज कंपाउंड, सीपरी बाजार का नाला भी पहूज नदी में गिरता है। इतना ही नहीं, सीपरी बाजार और नंदनपुरा क्षेत्र की छोटी- बड़ी नालियों का गंदा पानी भी नदी में गिरता है। इन नालों का गंदा पानी नदी के पानी में मिलकर फिल्टर प्लांट तक जाता है, जहां फिटकरी से उसे साफ किया जाता है। बाद में घरों में पानी की आपूर्ति की जाती है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती द्वारा नदी को गोद लेने से यह उम्मीद जागी थी कि अब नदी के दिन बदल जाएंगे और जो गंदगी नदी में बहाई जा रही है, वह बंद हो जाएगी। महानगरवासियों को पीने का पानी शुद्ध मिलने लगेगा। परंतु, ऐसा हो नहीं सका।
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पहूज नदी की सफाई के लिए 01 जनवरी 2010 को बृहद स्तर पर नदी के किनारे ‘आल्हा घाट’ पर स्वच्छता अभियान चलाया गया था। तब नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने संकल्प लिया था कि अब पहूज नदी को गंदा नहीं होने देंगे। लेकिन, दोबारा ध्यान नहीं दिया गया। नगर निगम अब स्मार्ट सिटी योजना के तहत शिवपुरी मार्ग बाईपास पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने जा रहा है। प्लांट से सीपरी बाजार क्षेत्र के सभी नालों को जोड़ दिया जाएगा। इसकी क्षमता 23 एमएलडी (दो करोड़ तीस लाख लीटर) होगी। इसमें चार एमएलडी पानी को दोबारा नदी में डाला जाएगा। जबकि बाकी पानी को बगीचे आदि दूसरे उपयोग में लाया जाएगा।
- पहूज नदी में गिरने वाले सभी नालों को स्माल सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीवेट्स एसटीपी) से सीधा जोड़ा जाएगा। नालों का चार एमएलडी पानी साफ करके नदी में गिराया जाएगा, जिससे गंदगी नदी में नहीं जाएगी। यह काम स्मार्ट सिटी के अंतर्गत होगा। टेंडर डल गए हैं। फरवरी से धरातल पर काम शुरू हो जाएगा।
अमित शर्मा, अधिशासी अभियंता व नोडल अधिकारी स्मार्ट सिटी।
नदी से जुड़ी आस्था
पहूज नदी के साथ झांसी और दूरदराज के जिलों के लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। मान्यता है कि उन्नाव बालाजी में पहूज नदी में नहाने से चर्म रोग (सेहुआं) ठीक हो जाते हैं। आस्था की नदी होने के बाद भी इसमें नालों का पानी बहाया जा रहा है।
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पहूज नदी वर्षों से गंदी की जा रही है। रेलवे वर्कशाप, सीपरी बाजार, नंदनपुरा, प्रेमनगर, आवास विकास कॉलोनी समेत आसपास के नालों का गंदा पानी पहूज नदी में जा रहा है। खाती बाबा क्षेत्र से रेलवे वर्कशाप, रेलवे कॉलोनी, केके पुरी, संगम विहार से लहरगांव होते हुए नाला पहूज नदी में गिरता है। इसी तरह नंदनपुरा, ताज कंपाउंड, सीपरी बाजार का नाला भी पहूज नदी में गिरता है। इतना ही नहीं, सीपरी बाजार और नंदनपुरा क्षेत्र की छोटी- बड़ी नालियों का गंदा पानी भी नदी में गिरता है। इन नालों का गंदा पानी नदी के पानी में मिलकर फिल्टर प्लांट तक जाता है, जहां फिटकरी से उसे साफ किया जाता है। बाद में घरों में पानी की आपूर्ति की जाती है।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती द्वारा नदी को गोद लेने से यह उम्मीद जागी थी कि अब नदी के दिन बदल जाएंगे और जो गंदगी नदी में बहाई जा रही है, वह बंद हो जाएगी। महानगरवासियों को पीने का पानी शुद्ध मिलने लगेगा। परंतु, ऐसा हो नहीं सका।
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पहूज नदी की सफाई के लिए 01 जनवरी 2010 को बृहद स्तर पर नदी के किनारे ‘आल्हा घाट’ पर स्वच्छता अभियान चलाया गया था। तब नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने संकल्प लिया था कि अब पहूज नदी को गंदा नहीं होने देंगे। लेकिन, दोबारा ध्यान नहीं दिया गया। नगर निगम अब स्मार्ट सिटी योजना के तहत शिवपुरी मार्ग बाईपास पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने जा रहा है। प्लांट से सीपरी बाजार क्षेत्र के सभी नालों को जोड़ दिया जाएगा। इसकी क्षमता 23 एमएलडी (दो करोड़ तीस लाख लीटर) होगी। इसमें चार एमएलडी पानी को दोबारा नदी में डाला जाएगा। जबकि बाकी पानी को बगीचे आदि दूसरे उपयोग में लाया जाएगा।
- पहूज नदी में गिरने वाले सभी नालों को स्माल सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीवेट्स एसटीपी) से सीधा जोड़ा जाएगा। नालों का चार एमएलडी पानी साफ करके नदी में गिराया जाएगा, जिससे गंदगी नदी में नहीं जाएगी। यह काम स्मार्ट सिटी के अंतर्गत होगा। टेंडर डल गए हैं। फरवरी से धरातल पर काम शुरू हो जाएगा।
अमित शर्मा, अधिशासी अभियंता व नोडल अधिकारी स्मार्ट सिटी।
नदी से जुड़ी आस्था
पहूज नदी के साथ झांसी और दूरदराज के जिलों के लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। मान्यता है कि उन्नाव बालाजी में पहूज नदी में नहाने से चर्म रोग (सेहुआं) ठीक हो जाते हैं। आस्था की नदी होने के बाद भी इसमें नालों का पानी बहाया जा रहा है।