{"_id":"681293914e705f4d98010c03","slug":"private-banks-distanced-themselves-from-employment-schemes-government-banks-are-the-only-support-jhansi-news-c-11-1-jhs1032-545147-2025-05-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi News: रोजगार योजनाओं से निजी बैंकों ने बनाई दूरी, सरकारी बैंक ही सहारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi News: रोजगार योजनाओं से निजी बैंकों ने बनाई दूरी, सरकारी बैंक ही सहारा
विज्ञापन
विज्ञापन
हिमांशु पांडेय
झांसी। महज पांच मिनट में घर बैठे लोगों को लोन देने का दावा करने वाले निजी बैंक सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को ऋण देने पर राजी नहीं हैं। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी सीएम युवा उद्यमी ऋण योजना समेत तमाम रोजगार कार्यक्रमों के तहत बैंक ऋण देने में कोताही बरत रहे हैं।
हाल यह है कि सरकार की रोजगार योजनाएं सिर्फ सरकारी बैंकों की बदौलत आगे बढ़ रही हैं।सरकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी एवं निजी बैंकों के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय हैं, लेकिन फायदे का सौदा न होने से निजी बैंक इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। इसके चलते प्रधानमंत्री रोजगार सृजन, पीएम स्वनिधि, किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं में निजी बैंकों की भागीदारी शून्य है। महत्वाकांक्षी सीएम युवा उद्यमी योजना के लिए तहत युवाओं को पांच लाख रुपये ऋण दिया जाना है। निजी बैंकों के लिए 196 युवाओं को ऋण वितरित करने का लक्ष्य दिया गया। बैंकों को इससे संबंधित फाइलें भी भेज दी गईं, लेकिन छह से अधिक निजी बैंक मिलकर भी अभी तक सिर्फ दो ही ऋण स्वीकृत कर सके हैं जबकि पीएनबी समेत चार प्रमुख सरकारी बैंक 80 से अधिक ऋण स्वीकृत कर चुके हैं।यही हाल पीएमईजीपी (प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम) का है। इसके तहत, जनपद में 539 लाभार्थियों को फायदा दिया जाना था, लेकिन निजी बैंक 20 लाभार्थियों को ही ऋण दे सके। अन्य ऋण योजनाओं के लिए निजी बैंकों ने अपने दरवाजे बंद रखे हैं। लीड बैंक मैनेजर अजय शर्मा का कहना है कि निजी बैंकों को लक्ष्य के मुताबिक ऋण वितरित करने के लिए कहा गया है। नियमित तौर पर उनको पत्र भी भेजा जाता है।न
झांसी। महज पांच मिनट में घर बैठे लोगों को लोन देने का दावा करने वाले निजी बैंक सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को ऋण देने पर राजी नहीं हैं। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी सीएम युवा उद्यमी ऋण योजना समेत तमाम रोजगार कार्यक्रमों के तहत बैंक ऋण देने में कोताही बरत रहे हैं।
हाल यह है कि सरकार की रोजगार योजनाएं सिर्फ सरकारी बैंकों की बदौलत आगे बढ़ रही हैं।सरकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी एवं निजी बैंकों के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय हैं, लेकिन फायदे का सौदा न होने से निजी बैंक इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। इसके चलते प्रधानमंत्री रोजगार सृजन, पीएम स्वनिधि, किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं में निजी बैंकों की भागीदारी शून्य है। महत्वाकांक्षी सीएम युवा उद्यमी योजना के लिए तहत युवाओं को पांच लाख रुपये ऋण दिया जाना है। निजी बैंकों के लिए 196 युवाओं को ऋण वितरित करने का लक्ष्य दिया गया। बैंकों को इससे संबंधित फाइलें भी भेज दी गईं, लेकिन छह से अधिक निजी बैंक मिलकर भी अभी तक सिर्फ दो ही ऋण स्वीकृत कर सके हैं जबकि पीएनबी समेत चार प्रमुख सरकारी बैंक 80 से अधिक ऋण स्वीकृत कर चुके हैं।यही हाल पीएमईजीपी (प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम) का है। इसके तहत, जनपद में 539 लाभार्थियों को फायदा दिया जाना था, लेकिन निजी बैंक 20 लाभार्थियों को ही ऋण दे सके। अन्य ऋण योजनाओं के लिए निजी बैंकों ने अपने दरवाजे बंद रखे हैं। लीड बैंक मैनेजर अजय शर्मा का कहना है कि निजी बैंकों को लक्ष्य के मुताबिक ऋण वितरित करने के लिए कहा गया है। नियमित तौर पर उनको पत्र भी भेजा जाता है।न
विज्ञापन