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जूनोटिक रोगों के इलाज से बेहतर है बचाव : जिलाधिकारी
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जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जूनोटिक समिति की बैठक हुई
कहा- होर्डिंग और बैनर के माध्यम से आमजन को दें जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। जूनोटिक रोग उन बीमारियों या संक्रमणों को कहा जाता है जो किसी जानवर या कीट से मनुष्यों में प्रेषित होते हैं। उन्हें ज़ूनोसिस भी कहा जाता है। जानवर बैक्टीरिया, कवक, वायरस और परजीवी जैसे हानिकारक रोगजनकों को ले जाते हैं। ये रोगजनक जब मनुष्यों के संपर्क में आते हैं, तो जूनोटिक रोग पैदा करते हैं। यह जानकारी जिलाधिकारी अवनीश कुमार ने विकास भवन सभागार में आयोजित जूनोटिक समिति की बैठक में दिए।
उन्होंने कहा कि इन बीमारियों से बचाव करना सबसे बेहतर है। इसके लिए जरूरी है कि हाइजीन का ध्यान रखा जाए। जैसे कि साफ पानी पिएं और खाना पकाने के लिए सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें। जूनोटिक कमेटी की बैठक में उपस्थित सीएमओ/ सीएमएस को जिला अस्पताल में कुत्ते काटने की बचाव के लिए इंजेक्शन उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। डॉ. उत्सव राज ने बताया कि जानवर के काटने पर तुरंत घाव को 15 से 20 मिनट तक पानी से धोने से रैबीज वायरस की मात्रा कम हो जाती है। कुत्ते आदि जानवर के काटने पर 24 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचकर टीकाकरण करवाने से रैबीज की संभावना कम हो जाती है। मौके पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुधाकर पांडेय, सीएमएस महिला डॉ. राज नारायण, सीएमएस पुरुष डॉ. पीके कटियार, एसीएमओ डॉ. राजीव भदौरिया, डॉ. रवि शंकर आदि रहे। संवाद
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कहा- होर्डिंग और बैनर के माध्यम से आमजन को दें जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। जूनोटिक रोग उन बीमारियों या संक्रमणों को कहा जाता है जो किसी जानवर या कीट से मनुष्यों में प्रेषित होते हैं। उन्हें ज़ूनोसिस भी कहा जाता है। जानवर बैक्टीरिया, कवक, वायरस और परजीवी जैसे हानिकारक रोगजनकों को ले जाते हैं। ये रोगजनक जब मनुष्यों के संपर्क में आते हैं, तो जूनोटिक रोग पैदा करते हैं। यह जानकारी जिलाधिकारी अवनीश कुमार ने विकास भवन सभागार में आयोजित जूनोटिक समिति की बैठक में दिए।
उन्होंने कहा कि इन बीमारियों से बचाव करना सबसे बेहतर है। इसके लिए जरूरी है कि हाइजीन का ध्यान रखा जाए। जैसे कि साफ पानी पिएं और खाना पकाने के लिए सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें। जूनोटिक कमेटी की बैठक में उपस्थित सीएमओ/ सीएमएस को जिला अस्पताल में कुत्ते काटने की बचाव के लिए इंजेक्शन उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। डॉ. उत्सव राज ने बताया कि जानवर के काटने पर तुरंत घाव को 15 से 20 मिनट तक पानी से धोने से रैबीज वायरस की मात्रा कम हो जाती है। कुत्ते आदि जानवर के काटने पर 24 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचकर टीकाकरण करवाने से रैबीज की संभावना कम हो जाती है। मौके पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुधाकर पांडेय, सीएमएस महिला डॉ. राज नारायण, सीएमएस पुरुष डॉ. पीके कटियार, एसीएमओ डॉ. राजीव भदौरिया, डॉ. रवि शंकर आदि रहे। संवाद
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