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Jhansi News: मेडिकल कॉलेज में प्रदेश का पहला न्यूरो साइंसेज सेंटर बनाने की तैयारी
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224 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा, न्यूरो रोगों के इलाज और सर्जरी की होगी सुविधा
नीरज वर्मा
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों के इलाज और सर्जरी की सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने की तैयारी है। कॉलेज प्रशासन ने इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो साइंसेज स्थापित करने के लिए शासन को 224 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। प्राचार्य के अनुसार, सेंटर बनने पर यह प्रदेश का पहला ऐसा सेंटर होगा, जहां न्यूरो रोगों के उपचार के साथ न्यूरो सर्जरी की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में ऑटिज्म समेत बच्चों की कई न्यूरो-डेवलपमेंटल समस्याओं के उपचार के लिए समुचित संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। स्पीच थेरेपी और बच्चों के मानसिक एवं विकासात्मक उपचार से संबंधित सुविधाओं का भी अभाव है। ऐसे में ऑटिज्म और जन्मजात न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझ रहे बच्चों के परिजनों को उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ने पर भी मरीजों को बाहर जाना पड़ता है।
न्यूरो सर्जरी के लिए भी बढ़ाए जाएंगे संसाधन
मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजी से संबंधित उपचार की कुछ सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन जटिल न्यूरो रोगों और न्यूरो सर्जरी के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है। कॉलेज प्रशासन का मानना है कि अलग न्यूरो साइंसेज सेंटर बनने से मरीजों को जांच, उपचार, सर्जरी और आगे के फॉलोअप की सुविधा एक ही स्थान पर मिल सकेगी।
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विशेषकर न्यूरो रोगियों का उपचार और फॉलोअप लंबे समय तक चलने के कारण एक समर्पित सेंटर की जरूरत महसूस की जा रही है। इसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के मरीजों को उनकी बीमारी के अनुसार विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराने की योजना है।
उच्चाधिकारियों से परामर्श के बाद भेजा प्रस्ताव
कॉलेज प्रशासन ने प्रदेश के उच्चाधिकारियों से परामर्श के बाद न्यूरो साइंसेज सेंटर के लिए 224 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। कॉलेज प्रशासन को प्रस्ताव पर शासन से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है। प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद सेंटर के निर्माण और सुविधाओं के विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
मोर्चरी के पास जगह चिह्नित
प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो साइंसेज बनाने का उद्देश्य नवजात से बुजुर्ग तक न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से पीड़ित मरीजों को एक ही स्थान पर विशेषज्ञ उपचार और जरूरत पड़ने पर सर्जरी की सुविधा देना है। न्यूरो रोगियों का फॉलोअप कई वर्षों तक चलता है, इसलिए समर्पित सेंटर की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इसके लिए अलग भवन आदि के निर्माण के लिए 224 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। मेडिकल कॉलेज परिसर में मोर्चरी के आसपास सेंटर के लिए जगह भी चिह्नित की गई है।
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नीरज वर्मा
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों के इलाज और सर्जरी की सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने की तैयारी है। कॉलेज प्रशासन ने इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो साइंसेज स्थापित करने के लिए शासन को 224 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। प्राचार्य के अनुसार, सेंटर बनने पर यह प्रदेश का पहला ऐसा सेंटर होगा, जहां न्यूरो रोगों के उपचार के साथ न्यूरो सर्जरी की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में ऑटिज्म समेत बच्चों की कई न्यूरो-डेवलपमेंटल समस्याओं के उपचार के लिए समुचित संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। स्पीच थेरेपी और बच्चों के मानसिक एवं विकासात्मक उपचार से संबंधित सुविधाओं का भी अभाव है। ऐसे में ऑटिज्म और जन्मजात न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझ रहे बच्चों के परिजनों को उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ने पर भी मरीजों को बाहर जाना पड़ता है।
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न्यूरो सर्जरी के लिए भी बढ़ाए जाएंगे संसाधन
मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजी से संबंधित उपचार की कुछ सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन जटिल न्यूरो रोगों और न्यूरो सर्जरी के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है। कॉलेज प्रशासन का मानना है कि अलग न्यूरो साइंसेज सेंटर बनने से मरीजों को जांच, उपचार, सर्जरी और आगे के फॉलोअप की सुविधा एक ही स्थान पर मिल सकेगी।
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विशेषकर न्यूरो रोगियों का उपचार और फॉलोअप लंबे समय तक चलने के कारण एक समर्पित सेंटर की जरूरत महसूस की जा रही है। इसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के मरीजों को उनकी बीमारी के अनुसार विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराने की योजना है।
उच्चाधिकारियों से परामर्श के बाद भेजा प्रस्ताव
कॉलेज प्रशासन ने प्रदेश के उच्चाधिकारियों से परामर्श के बाद न्यूरो साइंसेज सेंटर के लिए 224 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। कॉलेज प्रशासन को प्रस्ताव पर शासन से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है। प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद सेंटर के निर्माण और सुविधाओं के विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
मोर्चरी के पास जगह चिह्नित
प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो साइंसेज बनाने का उद्देश्य नवजात से बुजुर्ग तक न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से पीड़ित मरीजों को एक ही स्थान पर विशेषज्ञ उपचार और जरूरत पड़ने पर सर्जरी की सुविधा देना है। न्यूरो रोगियों का फॉलोअप कई वर्षों तक चलता है, इसलिए समर्पित सेंटर की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इसके लिए अलग भवन आदि के निर्माण के लिए 224 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। मेडिकल कॉलेज परिसर में मोर्चरी के आसपास सेंटर के लिए जगह भी चिह्नित की गई है।