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विवादित स्थानों पर लगाए गए बिजली के प्रीपेड मीटर
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झांसी। अब विवादित मकानों, दुकानों व अन्य प्रतिष्ठानों मेें विद्युत विभाग ने प्रीपेड मीटर लगाने का निर्णय लिया है। पहले चरण में महानगर के भीतर 95 प्रीपेड लगा दिए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इससे काफी हद तक बिजली चोरी रुकेगी। साथ ही झगड़े के कारण बिल जमा न होने वाले मामलों में भी कमी आएगी।
जिले में मकान मालिक व किराएदार के बीच विवाद के मामले बढ़ते जा रहे हैं। जांच में सामने आया है कि विवाद के चलते बिजली बिल न भरने के कारण विभाग को काफी नुकसान हो रहा है। मामला अदालत में चले जाने के कारण कोई भी बिजली बिल नहीं भरता। यदि कनेक्शन काट भी दिया जाता है तो अवैध तरीके से बिजली जलाई जाती है। ऐसे कई मामले भी पकड़े गए।
ऐसे में विभाग ने विवादित मकानों पर प्रीपेड कनेक्शन लगाने का निर्णय लिया है। इन मीटरों को बिना किसी नियम शर्त के बिजली विभाग उपभोक्ताओं के घरों में आसानी से लगाएगा। पोस्ट पेड मीटर से प्रीपेड मीटर का रेट कम है। सात हजार में एक फेज और 12 हजार में थ्री पेज मीटर लगते हैं।
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यह हैं खासियत
- मीटर को 100 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक रिचार्ज कराया जा सकेगा।
- मीटर का कार्ड जितने पैसे से चार्ज होगा उतना ही उपभोक्ता बिजली जला सकेगा।
- उपभोक्ता को अपने बिजली खर्च की जानकारी यूनिट में नहीं रुपयों में होगी।
- बचे हुए पैसे की जानकारी मीटर में लगे डिस्प्ले बोर्ड के जरिए मिलगी रहेगी।
छुट्टी के दिन नहीं कटेगी बिजली
प्रीपेड मीटर की खासियत यह है कि छुट्टी के दिन रिचार्ज खत्म होने के बाद भी बिजली गुल नहीं होगी। उपभोक्ता की बिजली अगले दिन तक चालू रहेगी, जब तक उपभोक्ता अपना कार्ड रिचार्ज करा सकेगा और उसे निर्बाध बिजली सप्लाई मिलेगी।
उपभोक्ताओं के आवेदन करने के साथ बिजली विभाग कनेक्शन देता है, लेकिन एक ही मकान में दूसरा कनेक्शन देने से पहले विभागीय अभियंता देखते हैं कि पिछला बिल बकाया तो नहीं है। मकान मालिक और किराएदार के बीच विवाद होने पर बकाया बिल जमा नहीं हो पाते हैं। ऐसे कई मामले कोर्ट में भी हैं। जिसे देखते हुए प्रीपेड कनेक्शन लगाने का निर्णय लिया गया है। डी यादवेंदु, अधिशासी अभियंता-प्रथम
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जिले में मकान मालिक व किराएदार के बीच विवाद के मामले बढ़ते जा रहे हैं। जांच में सामने आया है कि विवाद के चलते बिजली बिल न भरने के कारण विभाग को काफी नुकसान हो रहा है। मामला अदालत में चले जाने के कारण कोई भी बिजली बिल नहीं भरता। यदि कनेक्शन काट भी दिया जाता है तो अवैध तरीके से बिजली जलाई जाती है। ऐसे कई मामले भी पकड़े गए।
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ऐसे में विभाग ने विवादित मकानों पर प्रीपेड कनेक्शन लगाने का निर्णय लिया है। इन मीटरों को बिना किसी नियम शर्त के बिजली विभाग उपभोक्ताओं के घरों में आसानी से लगाएगा। पोस्ट पेड मीटर से प्रीपेड मीटर का रेट कम है। सात हजार में एक फेज और 12 हजार में थ्री पेज मीटर लगते हैं।
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यह हैं खासियत
- मीटर को 100 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक रिचार्ज कराया जा सकेगा।
- मीटर का कार्ड जितने पैसे से चार्ज होगा उतना ही उपभोक्ता बिजली जला सकेगा।
- उपभोक्ता को अपने बिजली खर्च की जानकारी यूनिट में नहीं रुपयों में होगी।
- बचे हुए पैसे की जानकारी मीटर में लगे डिस्प्ले बोर्ड के जरिए मिलगी रहेगी।
छुट्टी के दिन नहीं कटेगी बिजली
प्रीपेड मीटर की खासियत यह है कि छुट्टी के दिन रिचार्ज खत्म होने के बाद भी बिजली गुल नहीं होगी। उपभोक्ता की बिजली अगले दिन तक चालू रहेगी, जब तक उपभोक्ता अपना कार्ड रिचार्ज करा सकेगा और उसे निर्बाध बिजली सप्लाई मिलेगी।
उपभोक्ताओं के आवेदन करने के साथ बिजली विभाग कनेक्शन देता है, लेकिन एक ही मकान में दूसरा कनेक्शन देने से पहले विभागीय अभियंता देखते हैं कि पिछला बिल बकाया तो नहीं है। मकान मालिक और किराएदार के बीच विवाद होने पर बकाया बिल जमा नहीं हो पाते हैं। ऐसे कई मामले कोर्ट में भी हैं। जिसे देखते हुए प्रीपेड कनेक्शन लगाने का निर्णय लिया गया है। डी यादवेंदु, अधिशासी अभियंता-प्रथम