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सावधान! खतरे में हैं पुलिसवाले, क्या सो रहे हैं ‘ऊपरवाले’

Tue, 25 Aug 2020 11:30 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2020 11:30 PM IST
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Police dangerous condition, sleep uper man
झांसी। थाने के बैरकों से लेकर कई पुलिस कार्यालयों की पिछले लंबे समय से मरम्मत न होने वह जर्जर हो गए है। इससे बैरकों में सोते समय और कार्यालयों में 24 घंटे ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मी अपनी सुरक्षा को लेकर दहशत में है। वे खुल कर न तो इस समस्या को उठा पाते हैं और न जिम्मेदार आला अधिकारी उनकी इस समस्या का समाधान करा रहे हैं। कानपुर पुलिसलाइन में बैरक की छत गिरने के बाद से पुलिस वाले असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
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जिन के कंधों पर लोगों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी है, लेकिन वह जर्जर भवनों के चलते खुद सुरक्षित नहीं है। जिले के पुलिसकर्मी जिन सरकारी इमारतों व थानों की बैरकों में अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं, वह जर्जर होने से बरसात में कभी भी धराशायी होने का डर बना रहता है। इसी के चलते पुलिसकर्मी अपने को असुरक्षित महसूस करते हुए दहशत में ड्यूटी कर रहे हैं।
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सोमवार को कानपुर पुलिस लाइन में बैरक की छत गिर जाने से एक सिपाही की मौत हो गई थी, जबकि कई घायल हो गए थे। यह घटना भले ही कानपुर की हो, लेकिन झांसी जिले में भी पुलिसकर्मियों पर इस तरह खतरा 24 घंटे मंडराता रहता है। थानों में सिपाहियों के लिए रहने वाले बैरक खस्ताहाल हैं। यहां की छतें जर्जर होने के साथ ही दरारें भी दूर से नजर आती हैं। छत की मिट्टी भी गिरती रहती है। लंबे समय से मरम्मत न होने के चलते यहां डर बना रहता है।
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अंग्रेजों के जमाने की इमारत में हो रहा काम
पुलिस लाइन में बनी स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) की इमारत पूरी खस्ताहाल है। एक तरफा हिस्सा तो पूरी तरह जर्जर है। कई सालों से मरम्मत न होने के कारण यह अब और जर्जर हो गई है। बरसात का पूरा पानी छतों से नीचे कार्यालयों में आता है। नाम न छापने की तर्ज पर पुलिसकर्मियों ने बताया कि नौकरी का सवाल है, क्या किया जाए। कई बार शिकायत कर चुके, लेकिन कोई भी सुनने वाला नहीं है।

आवासों का भी हाल बेहाल
पुलिस के लिए रहने के लिए बने आवासों का भी यही हाल है। टूटी और टपकती छतें, उखड़े फर्श, यह हमेशा का हाल है। लेकिन, सुध लेने वाला कोई नहीं है। नवाबाद थाने के सामने बने आवास व पुलिस कार्यालय के पीछे बने आवासों में रहने वाले पुलिसकर्मी दहशत में रहते हैं। बरसात में यहां की स्थिति और भी जर्जर हो जाती है।
समय-समय पर मरम्मत कार्य कराया जाता है। जिसके चलते बाकायदा बजट भी आता है। यदि कहीं कोई कमी है तो उसको जल्द दूर कराया जाएगा।
राहुल मिठास, एसपी
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