फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Poets captivated the audience at the poetry symposium, showcasing the composite culture of Ganga-Jamuni Tehzeeb.

Jhansi News: काव्य गोष्ठी में कवियों ने बांधा समां, दिखी गंगा-जमुनी तहजीब

Wed, 02 Sep 2026 01:35 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Updated Wed, 02 Sep 2026 01:35 AM IST
विज्ञापन
Poets captivated the audience at the poetry symposium, showcasing the composite culture of Ganga-Jamuni Tehzeeb.
काव्य गोष्ठी में उपस्थित कवि।
बबीना। साहित्यिक मासिक काव्य गोष्ठी के सौजन्य से लगातार तेरहवें वर्ष भी कवि एवं साहित्यकार सुशील जैन के निवास पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में विभिन्न विधाओं के कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम में गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल देखने को मिली।
विज्ञापन

गोष्ठी की अध्यक्षता झांसी के सुप्रसिद्ध बुंदेली कवि बाला प्रसाद यादव ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में गोपाल नारायण कुमुद उपस्थित रहे। कार्यक्रम के शुभारंभ पर सुशील जैन ने सरस्वती वंदना की। कवि प्रवेश नायक ने वीर रस की रचना प्रस्तुत करते हुए कहा, वीरता की अवतार भई, इतिहास लिखा गई झांसी को, बुंदेलखंड को नाम करके धूल में मिला गईं गोरन खों। वहीं काशीराम अकेला ने देशभक्ति से ओतप्रोत पंक्तियां हम आजादी के परवाने, हम वतन पे मरने मिटने वाले प्रस्तुत कर माहौल में जोश भर दिया। जाने-माने साहित्यकार रामनाथ कव्वाल ने एक से बढ़कर एक गजलें सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी।
विज्ञापन

झांसी के बलवीर सिंह यादव ने चौकड़िया प्रस्तुत की। प्रकाश दुबे ने अपनी रचना प्रियवर तुमसे होता अनुराग नहीं सुनाई। मुख्य अतिथि गोपाल नारायण कुमुद ने बुंदेली रचना धर्मा जवहि विधायक बन गऔ, पिछलग्गू सम्राट ऊंट वो गधा सुरीलो बन गऔ सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। गोष्ठी के अध्यक्ष बाला प्रसाद यादव ने वृद्धावस्था और बदलते सामाजिक सरोकारों पर बुंदेली रचना प्रस्तुत करते हुए कहा, वृद्धा आश्रम में बाई दद्दा प्रान गंवा रए, लल्ला जब से बने कलट्टर वृद्धाश्रम पौंचा रए।
विज्ञापन
विज्ञापन

कार्यक्रम का संचालन करते हुए सुशील जैन ने सिकंदर के प्रसंग के माध्यम से जीवन की नश्वरता को रेखांकित करते हुए कहा, रहे हाथ खाली, कमाई खाक मुट्ठी भर, गुजरते हुए यही कहता रहा सिकंदर। गोष्ठी के दौरान कवियों की रचनाओं पर श्रोताओं ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर प्रकाश जैन, रमेश साहू, कमलेश पांडे, चंद्र प्रकाश राय, प्रवीण कोतवाल, राजकुमार साहू आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed