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Jhansi News: बुंदेलों की लाठी पर कवि सोहन शर्मा की कविता हो रही चरितार्थ

Thu, 16 Jan 2025 04:53 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jan 2025 04:53 PM IST
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Poet Sohan Sharma's poem is being translated on the sticks of Bundelas

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विष्णुकांत तिवारी



बड़ागांव। लाठी में बड़े गुन हैं इसे समझें न बेकार। लाठी रण बीच में बन जाती हथियार। कवि सोहन शर्मा की यह पंक्तियां बुंदेलखंड में रहने वालों पर सटीक बैठती हैं। यही कारण है कि आज के आधुनिक दौर में बुंदेलखंड में लाठियों के प्रति दीवानगी बनी हुई है। शहर के अलावा गांवों के लोग आज भी लाठी लेकर चलने में अपनी शान समझते हैं।
समय-समय पर इसका वे बखूबी इस्तेमाल भी करते हैं। इन लाठियों का बाजार भी पारीछा बांध के पास साल में एक बार सजता है। यहां लगने वाले मेले में बांस की लोहे और पीतल से जड़ी लाठियों को खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही हैं। यहां 150 से लेकर 500 रुपये तक की लाठियां मौजूद हैं। इनकी ऊंचाई भी पांच से लेकर 10 फुट तक है।
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मकर संक्रांति पर यह मेला लगता है। मेले में घरेलू सामान के साथ-साथ लाठियों की भी खूब बिक्री होती है। बुंदेलखंड के अलग-अलग जिलों से व्यापारी यहां रंगबिरंगी लाठियां बेचने के लिए आते हैं। यहां लाठियों की दस दुकानें लगाई गई हैं। दुकानों में लुहांगरी, चांव बांस के अलावा अन्य प्रकार की लाठियां बिक्री के लिए लाई गई हैं। 50 किलोमीटर दूर मोंठ से आए वीरेंद्र दुबे का कहना है कि किसानों का अस्त्र ही लाठी है। खेत खलिहान की रक्षा से लेकर घर की सुरक्षा के लिहाज से लाठी बड़े काम की चीज है।
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जालौन से आए कारोबारी लाखन सिंह ने बताया कि पशुपालक, किसानों के साथ-साथ घरों की रक्षा के लिए लोग लाठियां खरीदने आ रहे हैं। 150 से 500 रुपये तक की सजावटी और मजबूत लाठियां उपलब्ध हैं। इसकी बिक्री जोरों पर हो रही है।

मिट्टी कला की भी झलक



निवाड़ी मगरपुर से आए मिट्टी बर्तन के शिल्पकार गोपाल और बालमुकुंद बताते हैं कि छह महीने पहले से ही वह मिट्टी के बर्तन तैयार करने में जुट जाते हैं। मेले में हुई आमदनी से ही उनके परिवार का भरण-पोषण होता है। वह हर साल इस मेले में मिट्टी की हांडी, कड़ाही, घड़ा, चिलम-हुक्का, मटकी, गुल्लक आदि सामान फाड़ लगाकर बेचते हैं। इसके अलावा, लकड़ी के बेलन, लोहे के औजार और पत्थर की चक्की, सिलबट्टे आदि सामान भी लोग खरीदते हुए नजर आए। मेले में बांस की सामग्री बेच रहे चिरगांव के रमेश ने बताया कि ललितपुर के गांवों से वह इन चीजों को थोक में खरीदकर लाते हैं। वह कई साल से यहां दुकान लगा रहे हैं।




बांस की डलिया और सूप तक की हो रही खरीदारी

बांस से बनी डलिया, सूप आदि का उपयोग विवाह आदि मांगलिक कार्यों में होता है। किसान और पशुपालक भी बांस के सामान की खरीदारी करते हैं। मूल्य पूछने पर दुकानदार ने बताया कि बांस की डलिया 60 से लेकर 300 रुपये तक की है। सूप का मूल्य 60 से 200 रुपये तो हाथ पंखे का रेट 20 से 50 रुपये तक है। साहब सिंह यादव ने बताया कि उन्हें हर साल इस मेले का इंतजार होता है। वह अपने दोस्तों के साथ यहां आते हैं और कुछ न कुछ जरूरत का सामान खरीदते हैं। (संवाद)
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