साल भर में 1000 से अधिक लोग जारी करा रहे फोटोयुक्त डाक टिकट
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पहले डाक टिकटों पर महापुरुषों का ही फोटो होता था। अब शहर के आम लोग भी अपने फोटो से टिकट जारी करा रहे हैं। भारतीय डाक विभाग की ओर से संचालित की जाने वाली माई टिकट योजना के तहत जिले में प्रतिवर्ष एक हजार से अधिक लोग योजना का लाभ ले रहे हैं। योजना के तहत डाक टिकट के साथ ही लोग अपनी व परिजनों की फोटो को प्रकाशित करा सकते हैं। इसके लिए निर्धारित शुल्क तय किया गया है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष लगभग बीस फीसदी का इजाफा हुआ है।
जिले के प्रधान डाकघर में योजना की शुरुआत वर्ष 2014 में की गई थी। योजना के तहत ऐतिहासिक बैक ग्राउंड के साथ ही जारी करने वाले की तस्वीर होती है। इसके लिए विभाग की ओर से लगभग सौ से अधिक विकल्प दिये गये हैं। जिसको डाक टिकट संग्रह करने या डाक भेजने में लिफाफा पर चिपकाकर उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए तीन सौ रुपये शुल्क को तय किया गया है। तीन सौ रुपये में फोटो युक्त बारह डाक टिकटों की एक शीट दी जाती है।
शीट में टिकट के साथ ही जारी करवाने वाले का फोटो भी होता है। इस वर्ष एक हजार से अधिक लोगों ने फोटो युक्त डाक टिकट को बनवाया है। जो पिछले वर्ष की तुलना में बीस फीसदी अधिक है। इस संबंध में प्रवर डाक अधीक्षक उग्रसेन ने बताया कि माई टिकट योजना लोगों द्वारा काफी पसंद की जा रही है। हर साल एक हजार से अधिक लोग योजना का लाभ ले रहे हैं।
ऐसे जारी करा सकते हैं
इसके लिए डाकघर में फार्म की व्यवस्था की गई है। जिस पर आवेदक अपना नाम, मोबाइल नंबर, पहचान पत्र, पते के प्रमाण का डिटेल देना होता है। जिस व्यक्ति का फोटो डाक टिकट पर लगना होता है उसकी दो तस्वीर व नाम भी देना होता है। केबल आधा घंटे में ही टिकट जारी कर दिया जाता है।