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Jhansi News: बुंदेलखंड की प्रचंड गर्मी में भी लहलहा रही मूंगफली
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- अब तक खरीफ सीजन में ही होती थी बुवाई
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। इस बार बुंदेलखंड की प्रचंड गर्मी में भी मूंगफली की फसल लहलहा रही है। किसानों को मालामाल करने और नुकसान से बचाने के लिए पहली बार उद्यान विभाग ने जायद सीजन में ही करीब 500 हेक्टेयर में मूंगफली की बुवाई कराई है। यह फसल नब्बे दिन में तैयार हो जाएगी। मौजूदा समय में मूंगफली में पौधे विकसित होने लगे हैं। इसे लेकर किसान खुश नजर आ रहे हैं।
पूरे देश में बुंदेलखंड की मूंगफली की सर्वाधिक मांग रहती है। खास तौर से गुजरात एवं दक्षिण भारत तक यहां की मूंगफली की आपूर्ति की जाती है। इसका सर्वाधिक प्रयोग खाद्य तेल तैयार करने में होता है। अब तक झांसी में मूंगफली की बुवाई खरीफ सीजन में होती है लेकिन, पिछले पांच साल से हर खरीफ सीजन में अतिवृष्टि के चलते मूंगफली को काफी नुकसान होता है।
वहीं, रबी सीजन के बाद (अप्रैल से जून) तीन माह तक खेत खाली रहते हैं। इसको देखते हुए उद्यान विभाग ने इस बार प्रयोग के तौर पर मऊरानीपुर के स्यावरी गांव समेत टहरौली आदि जगहों पर करीब पांच सौ हेक्टेयर में मूंगफली की बुवाई कराई है। उद्यान विभाग के अफसरों का कहना है कि पहले इन सभी जगहों पर स्प्रिंकलर लगवाए गए। इससे मूंगफली के लिए मिट्टी में आवश्यक नमी का इंतजाम हो सका। स्प्रिंकलर से सिंचाई की वजह से यहां मूंगफली की खेती संभव हो रही है। 186 किसानों ने मूंगफली की बुवाई की है। जून माह तक यह फसल पूरी हो जाएगी। इसके बाद खरीफ सीजन में भी इसमें मूंगफली का उत्पादन हो सकेगा।
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प्रयोग के तौर पर इस सीजन में मूंगफली की बुवाई कराई गई है। यह प्रयोग सफल रहा है। मूंगफली के पौधे विकसित हो रहे हैं। अब अगले सीजन में यह रकबा बढ़ाया जाएगा।
विनय कुमार यादव, उपनिदेशक, उद्यान
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। इस बार बुंदेलखंड की प्रचंड गर्मी में भी मूंगफली की फसल लहलहा रही है। किसानों को मालामाल करने और नुकसान से बचाने के लिए पहली बार उद्यान विभाग ने जायद सीजन में ही करीब 500 हेक्टेयर में मूंगफली की बुवाई कराई है। यह फसल नब्बे दिन में तैयार हो जाएगी। मौजूदा समय में मूंगफली में पौधे विकसित होने लगे हैं। इसे लेकर किसान खुश नजर आ रहे हैं।
पूरे देश में बुंदेलखंड की मूंगफली की सर्वाधिक मांग रहती है। खास तौर से गुजरात एवं दक्षिण भारत तक यहां की मूंगफली की आपूर्ति की जाती है। इसका सर्वाधिक प्रयोग खाद्य तेल तैयार करने में होता है। अब तक झांसी में मूंगफली की बुवाई खरीफ सीजन में होती है लेकिन, पिछले पांच साल से हर खरीफ सीजन में अतिवृष्टि के चलते मूंगफली को काफी नुकसान होता है।
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वहीं, रबी सीजन के बाद (अप्रैल से जून) तीन माह तक खेत खाली रहते हैं। इसको देखते हुए उद्यान विभाग ने इस बार प्रयोग के तौर पर मऊरानीपुर के स्यावरी गांव समेत टहरौली आदि जगहों पर करीब पांच सौ हेक्टेयर में मूंगफली की बुवाई कराई है। उद्यान विभाग के अफसरों का कहना है कि पहले इन सभी जगहों पर स्प्रिंकलर लगवाए गए। इससे मूंगफली के लिए मिट्टी में आवश्यक नमी का इंतजाम हो सका। स्प्रिंकलर से सिंचाई की वजह से यहां मूंगफली की खेती संभव हो रही है। 186 किसानों ने मूंगफली की बुवाई की है। जून माह तक यह फसल पूरी हो जाएगी। इसके बाद खरीफ सीजन में भी इसमें मूंगफली का उत्पादन हो सकेगा।
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प्रयोग के तौर पर इस सीजन में मूंगफली की बुवाई कराई गई है। यह प्रयोग सफल रहा है। मूंगफली के पौधे विकसित हो रहे हैं। अब अगले सीजन में यह रकबा बढ़ाया जाएगा।
विनय कुमार यादव, उपनिदेशक, उद्यान