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90 दिनों में तैयार होगी मटर की फसल
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90 दिन में तैयार होगी मटर की फसल
झांसी। बुंदेलखंड में दलहन को बढ़ावा देने के लिए सरकार मटर के नए बीज उपलब्ध करा रही है। दंतेवाड़ा नाम से मटर की इस नई किस्म के जरिए किसान 90 दिनों के भीतर फसल हासिल कर सकेंगे, जबकि अभी करीब 150 दिन का समय लगता है। इस उपज के लिए पानी की जरूरत भी कम पड़ेगी। मटर की इस नई किस्म की मदद से किसान एक अतिरिक्त उपज भी हासिल कर सकेंगे।
सिंचाई की समस्या को देखते हुए कम पानी से तैयार होने वाली उपज का रकबा बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए मटर की नई प्रजाति दंतेवाड़ा के बीज किसानों को दिए जा रहे हैं। कृषि अधिकारियों के मुताबिक प्रयोग के तौर पर पिछले वर्ष इसे बुंदेलखंड के सरकारी फार्म में लगाया गया था, जहां यह सफलतापूर्वक तैयार हो गई। इस मटर की खासियत काफी कम समय में इसका तैयार होना है। 90 दिनों में ही इसकी उपज तैयार की जा सकती है। सामान्य मटर की उपज के मुकाबले साठ दिन पहले तैयार हो जाने से इसमें पानी एवं लागत भी कम आती है। सब्जियों समेत इस मटर की नमकीन फैक्ट्रियों में भी जबर्दस्त मांग रहती है। इसकी पैकेजिंग भी आसान है। इस तरह की मटर अभी छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में ही हो रही। सरकार इसके लिए पचास फीसदी की सब्सिडी भी दे रही।
कृषि उप निदेशक कमल कटियार के मुताबिक कृषि बीज भंडार में इसके बीज उपलब्ध करा दिए गए हैं। इस वर्ष करीब 71 हजार हेक्टयेर क्षेत्रफल में मटर बोई जानी है।
सूखने पर भी रहता है हरा रंग बरकरार
सामान्य मटर सूखने के बाद पीली पड़ जाती है, लेकिन इस प्रजाति की खासियत है कि सूखने के बाद भी इसका हरा रंग बरकरार रहता है। इस वजह से इसकी पहचान अलग से ही हो जाती है। इस खासियत की वजह से नमकीन फैक्ट्रियों में भी इसका काफी अधिक इस्तेमाल होता है।
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झांसी। बुंदेलखंड में दलहन को बढ़ावा देने के लिए सरकार मटर के नए बीज उपलब्ध करा रही है। दंतेवाड़ा नाम से मटर की इस नई किस्म के जरिए किसान 90 दिनों के भीतर फसल हासिल कर सकेंगे, जबकि अभी करीब 150 दिन का समय लगता है। इस उपज के लिए पानी की जरूरत भी कम पड़ेगी। मटर की इस नई किस्म की मदद से किसान एक अतिरिक्त उपज भी हासिल कर सकेंगे।
सिंचाई की समस्या को देखते हुए कम पानी से तैयार होने वाली उपज का रकबा बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए मटर की नई प्रजाति दंतेवाड़ा के बीज किसानों को दिए जा रहे हैं। कृषि अधिकारियों के मुताबिक प्रयोग के तौर पर पिछले वर्ष इसे बुंदेलखंड के सरकारी फार्म में लगाया गया था, जहां यह सफलतापूर्वक तैयार हो गई। इस मटर की खासियत काफी कम समय में इसका तैयार होना है। 90 दिनों में ही इसकी उपज तैयार की जा सकती है। सामान्य मटर की उपज के मुकाबले साठ दिन पहले तैयार हो जाने से इसमें पानी एवं लागत भी कम आती है। सब्जियों समेत इस मटर की नमकीन फैक्ट्रियों में भी जबर्दस्त मांग रहती है। इसकी पैकेजिंग भी आसान है। इस तरह की मटर अभी छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में ही हो रही। सरकार इसके लिए पचास फीसदी की सब्सिडी भी दे रही।
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कृषि उप निदेशक कमल कटियार के मुताबिक कृषि बीज भंडार में इसके बीज उपलब्ध करा दिए गए हैं। इस वर्ष करीब 71 हजार हेक्टयेर क्षेत्रफल में मटर बोई जानी है।
सूखने पर भी रहता है हरा रंग बरकरार
सामान्य मटर सूखने के बाद पीली पड़ जाती है, लेकिन इस प्रजाति की खासियत है कि सूखने के बाद भी इसका हरा रंग बरकरार रहता है। इस वजह से इसकी पहचान अलग से ही हो जाती है। इस खासियत की वजह से नमकीन फैक्ट्रियों में भी इसका काफी अधिक इस्तेमाल होता है।
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